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गुरुवार, 29 जुलाई 2021

NEET में केंद्रीय कोटा की मांग, ओबीसी वर्ग के केन्द्रीय मंत्रियों एवं सांसदों ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी काे सौंपा, ज्ञापन

यथार्थ रूप में परिलक्षित होती गोस्वामी तुलसीदास जी की बातें, रामचंद्र कह गए सिया से ऐसा  कलयुग आएगा, हंस चुगेगा दाना तुन का, कौआ मोती खाएगा...!!!


आरक्षण मेरा जन्म सिद्ध अधिकार है, क्या ये सत्य है...? आरक्षण किस आधार पर दिया गया था...? जाति पर या गरीबी के आधार पर...???

 

NEETमें ओबीसी रिजर्वेशन लागू होने का मसला काफी समय से लटका है। इसकी मांग लंबे समय से होती आई है। इसे लेकर बुधवार को एनडीए के ओबीसी सांसदों के एक प्रतिनिधमंडल ने पीएम से मुलाकात की...!!!


पीएम से मुलाकात करते ओबीसी सांसदों का प्रतिनिधमंडल...

नई दिल्ली। राष्ट्रीय पात्रता एवं प्रवेश परीक्षा (नीट) के तहत मेडिकल कालेजों में प्रवेश में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए केन्द्रीय कोटा लागू करने की मांग को लेकर केन्द्रीय श्रम मंत्री भूपेन्द्र यादव के नेतृत्व में ओबीसी वर्ग के केन्द्रीय मंत्रियों एवं सांसदों ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी काे एक ज्ञापन सौंपा। मोदी को ज्ञापन सौंपने वालों में यादव के अलावा केन्द्रीय इस्पात मंत्री आरसीपी सिंह, केन्द्रीय वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल, सांसद रामनाथ ठाकुर, गणेश सिंह, सकलदीप राजभर, जयप्रकाश निषाद और सुरेन्द्र नागर शामिल थे। ज्ञापन में नीट परीक्षा में ओबीसी वर्ग के लिए केन्द्रीय कोटा लागू करने की मांग की गयी है। ओबीसी नेताओं के कृत्यों से ऐसा प्रतीत होता है कि आरक्षण का कोढ़ अब खत्म नहीं होगा, क्योंकि उस पर ओबीसी नेताओं को वोटबैंक दिखता है और आरक्षण से ओबीसी के बच्चे तरक्की करेंगे। समाज में भले ही आपसी गतिरोध बढ़ जाये, परन्तु आरक्षण रूपी कोढ़ का इलाज ओबीसी नेताओं द्वारा नहीं करने दिया जायेगा

नए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 12 जुलाई कोनेशनल एलिजिबिलिटी एंड एंट्रेंस टेस्‍ट (नीट) की तारीखों का ऐलान किया। यह परीक्षा एमबीबीएस और बीडीएस पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए अनिवार्य है। परीक्षा राष्‍ट्रीय स्‍तर पर होती है। हालांकि, इस साल की घोषणा में भी एक बात साफ है। इसमें कहा गया है कि इस बार भी यह नेशनल एग्‍जाम अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए आरक्षण मानदंडों को लागू किए बिना ही होगा। इसके तहत ओबीसी को 27 फीसदी आरक्षण की सीमा तय है। इसी के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया। NEET में ओबीसी के लिए सरकार की ओर से आरक्षण नहीं लागू किए जाने के विरोध में आवाज बुलंद होने लगी। कई छात्र संगठन इसे लेकर देशव्‍यापी हड़ताल की धमकी भी चुके हैं। आरक्षण की ब्यवस्था गरीबी के आधार पर की गई थी और उसका उद्देश्य महज इतना था कि जो लोग पिछड़ गए हैं, उन्हें विकास की मुख्य धारा में लाने के लिए ही आरक्षण की ब्यवस्था संविधान में केवल 10 वर्षों के लिए ही की गई थी, जो स्वार्थी और लालची नेताओं ने उसे जीवन पर्यंत समझ बैठे हैं  


हाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऑल इंडिया मेडिकल एजुकेशन कोर्ट में ओबीसी और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (ईडब्ल्यूएस) के आरक्षण के मुद्दे की समीक्षा की। साथ ही संबंधित मंत्रालयों को इसे प्राथमिकता के आधार पर हल करने का निर्देश दिया। एक सूत्र ने बताया कि समीक्षा बैठक में प्रधानमंत्री ने इच्छा व्यक्त की कि चिकित्सा शिक्षा के अखिल भारतीय कोटा (एआईक्यू) में ओबीसी आरक्षण का मुद्दा संबंधित मंत्रालयों की ओर से प्राथमिकता के आधार पर हल किया जाए। पीएम ने स्वास्थ्य मंत्रालय से चिकित्सा शिक्षा के लिए विभिन्न राज्यों की ओर से ईडब्ल्यूएस आरक्षण के कार्यान्वयन की स्थिति की समीक्षा करने को भी कहा। इस बैठक में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री मनसुख मंडाविया, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, कानून एवं न्याय और समाज कल्याण सचिवों के साथ-साथ अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए। बैठक में दो कोटे के मुद्दे पर चर्चा की गई।


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