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सोमवार, 12 जुलाई 2021

उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा और केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा का प्रमाण पत्र हुआ आजीवन मान्य

देश में शिक्षकों की योग्यता निर्धारण हेतु संसद ने राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद को किया है,अधिकृत...!!!

राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद् द्वारा निर्गत आदेश...

अनिवार्य और निःशुल्क शिक्षा व शिक्षा के अधिकार कानून 2009 के तहत छः से चौदह वर्ष के बच्चों को अनिवार्य और निःशुल्क शिक्षा प्रदान  करने का कानून भारत में प्रभावी है। जिसके तहत शिक्षकों की योग्यता निर्धारण हेतु संसद ने राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद को अधिकृत किया है। दिनांक 23 अगस्त, 2010 को राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद ने अधिसूचना जारी करके शिक्षक बनने हेतु शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) उत्तीर्ण करने का नियम बनाया। दिनांक 11 फरवरी, 2011 को राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परीक्षा ने गाइडलाइन जारी किया कि शिक्षा पात्रता परीक्षा कैसे होगी, नियम क्या होगा व प्रमाण पत्र की वैधता क्या होगी। यह सब स्पष्ट किया। जिसमें प्रमाण पत्र की वैधता सात वर्ष निर्धारित की। जबकि राज्यों ने पांच वर्ष की ही वैधता का प्रमाण पत्र जारी किया।

शिक्षा विभाग द्वारा जारी आदेश की प्रति...

दिनांक 3 जून, 2021 को केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने शिक्षक पात्रता परीक्षा प्रमाण पत्र की अवधि आजीवन कर दिया। यह आदेश दिनांक 11 फरवरी, 2011 से ही प्रभावी किया। जिससे कि जिसका प्रमाण पत्र शून्य हो चुका था वह पुनः जीवित हो गया। दिनांक 9 जून, 2021 को राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद ने सभी राज्य और केंद्र की संस्था को प्रमाण पत्र आजीवन करने का पत्र जारी किया। विशेष सचिव उत्तर प्रदेश ने दिनांक 16 जून, 2021 को राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद लखनऊ को अनुपालन का आदेश किया। परिचर्चा रही कि जिसका प्रमाण पत्र मृत हो चुका होगा, क्या वह पुनः जारी किया जाएगा या पुराना ही प्रमाण पत्र मान्य होगा। 

परीक्षा नियामक प्राधिकारी के आदेश की प्रति...

आज परीक्षा नियामक प्राधिकारी प्रयागराज जो कि उत्तर प्रदेश की शिक्षक पात्रता परीक्षा आयोजित करती हैउक्त संस्था ने सचिव बेसिक शिक्षा परिषद प्रयागराज, समस्त प्राचार्य/उप शिक्षा निदेशक जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) व समस्त जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी उत्तर प्रदेश को पत्र जारी करके आदेशित किया कि प्रमाण पत्र में निर्दिष्ट पांच वर्ष की वैधता को आजीवन वैधता पढ़ा जाए।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक का पत्र...

इस तरह दिनांक 11 फरवरी, 2011 से लेकर अब तक जो भी प्रमाण पत्र जारी हुए थे वह आजीवन वैध हो गए और जो भी भविष्य में जारी होंगे उसमें आजीवन वैध वर्णित रहेगा। 
इसमें मात्र एक समस्या आएगी कि वर्ष 2011 से 2015 तक जिन लोगों ने परीक्षा उत्तीर्ण की थी उन लोगों में बहुत से अभ्यर्थियों ने प्रमाण पत्र की वैधता समाप्त होने के बाद प्रमाण पत्र को या तो फाड़कर फेंक दिया या उसे इस तरह उपेक्षित कर दिया कि उसका मिलना ही मुश्किल है। ऐसे लोगों के लिए देखिए द्वितीय प्रति जारी होती है कि नहीं होती है।


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