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गुरुवार, 8 जुलाई 2021

मंगरौरा प्रमुख पद पर भाजपा उम्मीदवार एवं मंत्री मोती सिंह के लड़के राजीव प्रताप नंदन सिंह का निर्विरोध निर्वाचन होना तय

मंत्री मोती सिंह के दिल में बसता है मंगरौरा का प्रमुख पद...


कैबिनेट मंत्री मोती सिंह मंगरौरा प्रमुख पद से शुरू की थी अपनी राजनीतिक जीवन की शुरुवात...!!!


मंत्री मोती सिंह बेटे नंदन सिंह को प्रमुख बनाने के लिए एड़ी-चोटी कर दिए एक...


प्रतापगढ़ के कथित दिग्गजों ने अपनी-अपनी विधानसभाओं में ब्लाक प्रमुख चुनाव में आज नामांकन में सारी ताकत लगाकर किसी भी तरह अपने उम्मीदवार को निर्विरोध कराने के लिए कोई दूसरा उम्मीदवार नामांकन न करने पाए उसके लिए उसका अपहरण तक कराना पड़े तो भी प्रतापगढ़ के माननीयों को तनिक भी हिचक न होगी अधिसूचना जारी होने से पहले ही प्रतापगढ़ के माननीयों के चमचों और गुंडों द्वारा क्षेत्र पंचायत सदस्यों के प्रमाण पत्र तक जमा करा लिए गए और उन्हें इतना डरा दिया गया कि कहीं जुबान खोली तो जीवन से भी हाथ धो लोगे। किसी के घर वालों को डराया जा रहा है तो किसी के ऊपर फेंक मुकदमा लिखाया जा रहा है। 


राजनीति के इस गंदे खेल की सारी हदें उस वक्त खत्म हो जाती हैं जब ब्लॉक प्रमुख पद के लिए उम्मीदवारी की तैयारी करने वाले ब्यक्ति के ब्यवसायिक प्रतिष्ठानों की जाँच कराना और उसके लड़के की गाड़ी की जाँच कराना और फेंक मामले में फंसाने की पूरी योजना बनाना आज के राजनेताओं की रणनीति का हिस्सा बन चुकी है। इसकी शुरुआत सबसे पहले जिले के सबसे कथित कद्दावर कांग्रेसी नेता प्रमोद कुमार के क्षेत्र लालगंज से शुरू हुई। लालगंज के पूर्व ब्लॉक प्रमुख रमेश प्रताप सिंह जो भाजपा नेता छोटे सरकार के बड़े भाई हैं। रमेश प्रताप सिंह को फंसाने के लिए एक बीडीसी की पत्नी से उसके पति के अपरण से इसकी शुरुआत कल दोपहर में ही कर दी गई। 


ब्लॉक प्रमुख के चुनाव में जनपद प्रतापगढ़ की सबसे महत्वपूर्ण सीट मंगरौरा विकास खंड की है, जिस पर कैबिनेट मंत्री मोती सिंह के एकलौते लड़के राजीव प्रताप सिंह उर्फ नंदन सिंह की निर्विरोध उम्मीदवारी से माना जा रहा है। मंत्री मोती सिंह अपनी राजनीति की शुरुआत मंगरौरा के प्रमुख पद से शुरू की थी। बाद में कांग्रेस से एमएलसी बने और भाजपा में शामिल होकर विधायक बने। भाजपा से विधायक बनकर पहली बार राजनाथ सिंह के मुख्यमंत्री काल में कृषि राज्य मंत्री बने थे। मोती सिंह पट्टी से विधायक निर्वाचित होते रहे हैं और वर्तमान में योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं। 


मंत्री मोती सिंह लोकसभा चुनाव-2019 से ही अपने एकलौते पुत्र राजीव प्रताप उर्फ नंदन सिंह को अपने जीवन काल में अपना उत्तराधिकारी बनाकर अपने दायित्वों को पूर्ण करना चाहते थे,परन्तु बात बिगड़ गई और टिकट संगम लाल गुप्ता को दे दिया गया। फिर मंत्री मोती सिंह जी चाहते थे कि नंदन सिंह को जिला पंचायत अध्यक्ष के पद पर चुनाव लड़ाया जाएगा। जिला पंचायत अध्यक्ष पद की सीट महिला खाते में चली गई तो मंत्री जी अपनी पत्नी उर्मिला सिंह को जिला पंचायत सदस्य पद का उम्मीदवार बनवाया, परन्तु कुछ ही मिनट में मंत्री जी की पत्नी का टिकट कट गया। उसी समय से मंत्री मोती सिंह अपनी विधानसभा पट्टी की सभी चारों ब्लॉक पर अपना ब्लॉक प्रमुख स्थापित कराने के लिए दिमागी रूप से कसरत करने लगे। 


जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव में अध्यक्ष पद की भाजपा उम्मीदवार क्षमा सिंह के पति एवं भाजपा पप्पन सिंह ने सार्वजनिक रूप से मंत्री मोती सिंह पर आरोप लगाया कि वह कैबिनेट मंत्री के साथ-साथ चुनाव प्रभारी रहे, फिर भी मंत्री जी की भूमिका संदिग्ध रही। इस घटना से मंत्री जी की छवि पर बहुत खराब प्रभाव पड़ा। पट्टी ब्लॉक प्रमुख पद पर मंत्री जी के भतीजे राकेश सिंह उर्फ पप्पू कई बार ब्लॉक प्रमुख रह चुके हैं। सो वहाँ की चिंता मंत्री जी को करने की जरुरत नहीं है। सबसे खास मंगरौरा प्रमुख पद को मंत्री जी अपनी अस्मिता से जोड़कर देखने लगे। मंगरौरा प्रमुख पद पर मंगरौरा के ही रहने वाले अखिलेश सिंह क्षेत्र पंचायत सदस्य पद का चुनाव जीतने के बाद से क्षेत्र में बीडीसी से सम्पर्क कर अपनी उम्मीदवारी के लिए प्रचार-प्रसार करने लगे। ये बात मंत्री जी को बहुत नागवार लगी और अखिलेश सिंह को चुनाव न लड़ने की सलाह और सुझाव देने के साथ उनके अति करीबी लोंगो से उन्हें न लड़ने की सलाह दिलाने का कार्य शुरू किया ताकि नंदन सिंह निर्विरोध मंगरौरा प्रमुख पद पर निर्वाचित हो सके। 


फिलहाल मंगरौरा प्रमुख पद का आज नामांकन है और अखिलेश सिंह अब अपना नामांकन नहीं करना चाहते। क्योंकि मंत्री सिंह नैतिकता की सारी हदें पारकर उन्हें और उनके बेटे को फंसाने की रणनीति में लग चुके हैं। क्योंकि कोतवाली नगर की पुलिस द्वारा कल शाम को राजपाल चौराहे पर वाहनों की चेकिंग मंगरौरा प्रमुख पद के नामांकन से जोड़कर देखा जा रहा है। यदि अखिलेश सिंह मंगरौरा प्रमुख पद पर नामांकन नहीं करते तो नंदन सिंह निर्विरोध मंगरौरा प्रमुख बन जायेंगे और पिता मोती सिंह की तरह मंगरौरा प्रमुख पद से अपने राजनीतिक जीवन की यात्रा की शुरुवात करेंगे। जिस तरह प्रमोद कुमार ने एक योजना के तहत अपनी पुत्री मोना मिश्रा को अपना उत्तराधिकारी बनाया ठीक उसी तरह से मंत्री मोती सिंह भी अपने एकलौते पुत्र को अपनी राजनीतिक विरासत समय के साथ सौंपना चाहते हैं। मंत्री मोती सिंह की इच्छा थी कि नंदन सिंह सीधे सांसद निर्वाचित हो जाते,परन्तु अपना सोचा हर जगह सफल नहीं हो पाता। 


सांसद और जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी तो नंदन सिंह न पा सके,परन्तु मंगरौरा प्रमुख की कुर्सी पर उनका निर्वाचन निर्विरोध होना लगभग तय माना जा रहा है। क्योंकि अखिलेश सिंह अपने बेटे और परिवार के किसी भी सदस्य के सीने पर लात रखकर राजनीति नहीं करना चाहते। बेटा जेल जाए और ब्यवसायिक प्रतिष्ठानों पर अनायास सिस्टम द्वारा जाँच पड़ताल के नाम पर हैरान व परेशान किया जाए यह उन्हें स्वीकार नहीं। कोतवाली नगर के राजापाल चौराहे पर कल शाम जिस अंदाज में वाहन चेकिंग कर अखिलेश सिंह के लड़के विशाल सिंह और उनके साथियों की चार वाहनों की तलाशी लेकर कोतवाली नगर की पुलिस उन सभी को ले जाकर उनके वाहनों से लकड़ी के बेंत और डंडे की बरामदगी दिखाकर शांति भंग का चालान किया, उससे लग गया कि मंत्री मोती सिंह के आगे अखिलेश सिंह सरेंडर कर चुके हैं। अखिलेश सिंह को लगने लगा था कि यदि वह मंगरौरा प्रमुख पद पर चुनाव लड़ते हैं तो मंत्री मोती सिंह अपने एकलौते बेटे नंदन सिंह की राह में रुकावट बनने के दोषी होंगे।  


हालाँकि मंत्री मोती सिंह और अखिलेश सिंह में कुछ दिन पहले लखनऊ में कुंवर वीरेंद्र प्रताप सिंह के मध्यस्थता में एक बैठक हुई और उस बैठक के बाद ही यह तय हो गया कि अखिलेश सिंह अब मंगरौरा प्रमुख पद पर अपना नामांकन नहीं करेंगे। इस तरह नंदन सिंह मंगरौरा प्रमुख पद पर निर्विरोध निर्वाचित हो जायेंगे और मंत्री की नाक बाख जायेगी। ऐसी जानकारी कुंवर वीरेंद्र प्रताप सिंह अपने फेसबुक पर पोस्ट डालकर सार्वजनिक किया है। कुंवर वीरेंद्र प्रताप सिंह के मुताविक मंत्री मोती सिंह और अखिलेश सिंह में बहुत ही सौहार्दपूर्ण वातावरण में बातचीत हुई और दोनों के मन में आपसी वैमनस्यता जैसी कोई बात नहीं रही। कुंवर वीरेंद्र प्रताप सिंह मानते हैं कि अखिलेश सिंह और मंत्री मोती सिंह के परिवार में कोई ब्यक्ति राजनैतिक लड़ाई लगवाना चाहता है। इसलिए मंत्री मोती सिंह और कुंवर वीरेंद्र प्रताप सिंह मंगरौरा अखिलेश सिंह के आवास गए और दोनों के बीच उभरे मतभेद को खत्म करने का कार्य किया ऐसा कुंवर वीरेंद्र प्रताप सिंह ने दावा किया है।   


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