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शनिवार, 19 जून 2021

उत्तर प्रदेश के डीजीपी एचसी अवस्थी ने ठुकराया सेवा विस्तार का ऑफर, 30 जून को हो रहे रिटायर

UPके ईमानदार पुलिस महानिदेशक एचसी अवस्थी ने ठुकराई अपने सेवा विस्तार की पेशकश...
उत्तर प्रदेश के डीजीपी एचसी अवस्थी...
लखनऊ। देश की नौकरशाही में कुछ नौकरशाह सरकार की मख्खनबाजी करके सरकार के खास बनकर अपनी सर्विस का कार्यकाल बढ़ाने में कामयाब हो जाते हैं और कुछ नौकरशाह सर्विस में रहते हुए ही सरकार के मुख्यमंत्री अथवा संगठन के प्रभाशाली पदाधिकारी के सम्पर्क में रहते हुए रिटायर्ड होने के बाद उस दल में शामिल होकर राजनीतिक क्षेत्र में आकर अपनी किस्मत आजमाते हैं। कुछ तो वीआरएस लेकर मंत्री तक बनने में सफल रहे। ताजा उदहारण देखना हो तो अरविन्द कुमार शर्मा गुजरात कैडर के आईएएस ने वीआरएस और उत्तर प्रदेश में विधान परिषद् सदस्य बन गये। अभी मंत्री अथवा डिप्टी सीएम बनना बाकी है। मोदी सरकार में विदेश सचिव रहे जयशंकर प्रसाद को रिटायर्ड होने के बाद सीधे भाजपा ने पिछले दरवाजे से पार्टी की सदस्यता दिलाकर विदेशमंत्री बना दिया।

बसपा शासन काल में मायावती के खास नौकरशाह पीएल पुनिया नौकरी से अवकाश प्राप्त करने के बाद कांग्रेस में चले गए। मायावती मुख्यमंत्री रहते उत्तर प्रदेश में एडीजी कानून ब्यवस्था से आउट ऑफ टर्म प्रमोशन देकर बृजलाल को उत्तर प्रदेश का डीजीपी बनाया और रिटायर्ड होकर भाजपा में शामिल हो गए। हद से तब हो गई जब न्यायपालिका की सर्वोच्च कुर्सी पर बैठने वाला ब्यक्ति जो भारत के प्रधान न्यायाधीश के पद से रिटायर्ड होकर भाजपा के आशीर्वाद से राज्यसभा जाकर भारत के प्रधान न्यायाधीश के पद को अपमानित किया। रंजन गोगोई के ऐसा करने से न्यायपालिका के प्रति आम जनमानस में गलत सन्देश देने का कार्य किया।

किसी भी प्रदेश में तीन पद बहुत ही महत्वपूर्ण होता है। प्रदेश में मुख्य सचिव, अपर मुख्य सचिव (गृह) और प्रदेश के डीजीपी का पद सबसे उच्च पद माना गया है। ये तीनों पद सरकार के नाक, कान और आँख के सामान माने गए हैं। इस तरह इन तीनों पदों पर आसीन ब्यक्ति सरकार और उस राजनीतिक दल के पदाधिकारियों के बहुत खास होते हैं जो सत्ताधारी दल होते हैं। अब यूपी की नौकरशाही से जुड़ी सबसे खबर आ रही है। सूत्रों के हवाले से पता चला है कि यूपी के डीजीपी एचसी अवस्थी ने सेवा विस्तार (एक्सटेंशन) की पेशकश को ठुकरा दिया है। यूपी के डीजीपी एचसी अवस्थी इसी महीने 30 जून को रिटायर हो रहे हैं। नए डीजीपी के चयन की प्रक्रिया का पालन करते हुए यूपी सरकार ने उपयुक्त आईपीएस अधिकारियों का एक पैनल यूपीएससी को भेजा था। बताया जाता है कि सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश का हवाला देते हुए यूपीएससी ने अधिकारियों का वो पैनल यूपी सरकार को वापस भेजा दिया है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक किसी भी अधिकारी को दो साल के लिए डीजीपी के पद नियुक्त किया जाना चाहिए। एचसी अवस्थी के लिए डीजीपी के पद पर 2 साल जनवरी, 2022 में पूरे हो रहे हैं। लिहाजा उनको जनवरी, 2022 तक पद पर रहना चाहिए। डीजीपी को चुनने की प्रक्रिया के अनुसार डीजीपी के रिटायरमेंट से तीन महीने पहले राज्य को अगले डीजीपी के लिए यूपीएससी को पैनल भेजना चाहिए। इस तर्क के साथ ही यूपीएससी ने यूपी सरकार को जनवरी से तीन महीने पहले पैनल भेजने को कहा। सोचिये ऐसे भी ईमानदार अधिकारी हैं जिन्हें मौका मिल रहा है तो उस मौके को भी लात मार दे रहे हैं और अपने स्वाभिमान को बचाने के लिए बड़ा से बड़ा लाभ छोड़ देने में जरा सा भी देर नहीं करते।

यूपीएससी के इस जवाब के बाद राज्य सरकार ने डीजीपी एचसी अवस्थी को जनवरी तक सेवा विस्तार की पेशकश की, लेकिन सूत्रों के अनुसार एचसी अवस्थी ने सरकार की इस पेशकश को न मानते हुए सेवा विस्तार लेने से मना कर दिया है। बताया जा रहा है कि एचसी अवस्थी ने सरकार को लिख कर दिया है कि वो 30 जून को ही रिटायरमेंट लेना चाहते हैं। डीजीपी एचसी अवस्थी के इस फैसले से स्वाभिमानी किस्म के अफसरों में एक अच्छा सन्देश जायेगा कि हर अफसर मौकापरस्त और चाटुकार नहीं होता। अपने निजी लाभ के लिए वह नेताओं की परिक्रमा नहीं करता और हर बड़े ऑफर को अपने स्वाभिमान के आगे लात मार सकता है। साथ ही इस उदहारण को बकवास सिद्ध कर दिया जो लोग कहते हैं कि आज वही ईमानदार है जिसे मौका नहीं मिला। जिसे विश्वास न हो वह डीजीपी एचसी अवस्थी के फैसले से सबक ले सकता है।

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