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शनिवार, 26 जून 2021

जिला पंचायत अध्यक्ष पद के नामांकन में बाजी मारते हुए सपा उम्मीदवार अमरावती यादव ने सबसे पहले किया नामांकन

सपाइयों को अपने ही जिला पंचायत सदस्यों पर नहीं है,एतबार...!!! 
सपा उम्मीदवार अमरावती यादव के नामांकन में नहीं दिखे सपा के जीते 17जिला पंचायत सदस्य,फिर कैसे होगी नैय्या पार...!!! 

जिला पंचायत अध्यक्ष पद का नामांकन करती सपा उम्मीदवार अमरावती यादव...

प्रतापगढ़ जिला पंचायत के नामांकन में आज समाजवादी पार्टी की अधिकृत उम्मीदवार अमरावती यादव समाजवादी पार्टी के नेताओं के साथ नामांकन स्थल विकास भवन के सामने कटरा रोड़ स्थित अफीम कोठी पहुँच कर अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। जिला पंचायत अध्यक्ष पद हेतु अमरावती यादव जी के पर्चा दाखिला में शामिल पूर्व मंत्री शिवाकांत ओझा, पूर्व विधायक सदर नागेंद्र सिंह "मुन्ना यादव" पूर्व विधायक पट्टी राम सिंह पटेल, पूर्व विधायक श्याद अली, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष प्रमोद मौर्य एवं समाजवादी पार्टी के कार्यवाहक जिला अध्यक्ष अनीश खान, जिला महासचिव कादिर जिलानी सहित समाजवादी पार्टी के अन्य पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता नामांकन स्थल के बाहर उपस्थित रहे।  

जिला पंचायत अध्यक्ष पद के नामांकन में सपाइयों ने दिखाई एकजुटता...

जिला पंचायत अध्यक्ष पद हेतु सपा प्रत्याशी अमरावती यादव ने पर्चा दाखिल किया, बता दें कि अमरावती यादव जिला पंचायत सदस्य पद का चुनाव दूसरी बार रिकॉर्ड मतों से जीती हैं। इनके घर के सात सदस्य क्षेत्र पंचायत का चुनाव जीते हैं। जिला पंचायत अध्यक्ष पद की उम्मीदार अमरावती यादव पट्टी विधानसभा क्षेत्र के बिनैका गाँव निवासी सभापति यादव के भाई सुभाष यादव की पत्नी हैं। अमरावती यादव के घर पर पुरुष वर्ग वर्तमान में फरारी काट रहा है और अमरावती यादव का ज्येठ सभापति यादव के ऊपर ढ़ाई लाख रूपये का इनाम है तो पति सुभाष यादव भी पुलिस का इनामिया मुल्जिम है जो वर्तमान में भगोड़ा घोषित है और पुलिस उन सबको अपने तरीके से खोज रही है। रातदिन खोजने के बाद भी प्रतापगढ़ पुलिस को सभापति यादव और अमरावती यादव का पति सुभाष यादव नहीं मिल रहे हैं। पुलिस के मुखबिर से तेज तो सभाजीत यादव और सुहाश यादव के सूत्र मजबूत हैं।  

सपा उम्मीदवार के नामांकन में नहीं दिखे सपा के जीते 17जिला पंचायत सदस्य...

यह बात कम समझ में आई कि 17 जिला पंचायत सदस्य जीतने वाली समाजवादी पार्टी के पास क्या अमरावती यादव ही एक अदद उम्मीदवार रही जिसे समाजवादी पार्टी ने बहुत गुणा गणित लगाने के बाद अपना उम्मीदवार बनाया। पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष प्रमोद मौर्य जिनके चाचा बसपा में कद्दावर नेताओं में शुमार रहे और बसपा छोड़कर भाजपा में शामिल हुए तो योगी सरकार में मंत्री बने है। सवाल उठता है कि अपने चाचा स्वामी प्रसाद मौर्य के दम पर बसपा कार्यकाल में जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव जीतने वाले प्रमोद मौर्य की पत्नी भी जिला पंचायत सदस्य का चुनाव जीती हैं। किन परिस्थितियों प्रमोद मौर्य की पत्नी को समाजवादी पार्टी अपना उम्मीदवार नहीं बनाया ? फिलहाल समाजवादी पार्टी के कार्यशैली पर सवाल उठते रहे हैं कि समाजवादी पार्टी में सिर्फ यादव और मुसलमानों की ही पूंछ है और उन्हीं को अधिक तवज्जों भी दिया जाता है, वो चाहे संगठन में पद देने की बात हो अथवा किसी चुनाव में उम्मीदवार की बात हो !

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