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सोमवार, 24 मई 2021

उत्तर प्रदेश में योगी सरकार में बड़े फेरबदल के मिल रहे हैं,संकेत

आगामी विधान सभा चुनाव 2022 को लेकर संघ को सताने लगी भाजपा की साख की चिंता...!!!

पीएम मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और संघ प्रमुख मोहन भगवत की चल रही है,गहन मन्त्रणा... 

संघ की मोदी शाह के साथ मीटिंग उत्तर प्रदेश में कोरोना के बदतर हालात और इससे जनता में भारी आक्रोश के मद्देनजर आगामी विधान सभा चुनाव-2022 पर असर न पड़े,इसके लिए चर्चा हुईउम्मीद है कि जल्द ही योगी मंत्रिमंडल में फेरबदल कर जनता के बीच सम्बन्ध स्थापित करने के लिए कुछ बदलाव कर कुछ मंत्रियों को संगठन की जिम्मेदारी दी जाय...

जब-जब किसी बड़े राज्य अथवा उत्तर प्रदेश के विधान सभा चुनाव की बारी आती है, तब-तब संघ को भाजपा की साख की फिक्र सताने लगती है। क्योंकि त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में पूरे प्रदेश में जिला पंचायत सदस्य के पद का चुनाव इस बार भाजपा ने अपने समर्थन से अपने पार्टी के नेताओं को चुनावी मैदान में उतारा जिसमें कई उम्मीदवार पैरासूट वाले आ गए जिससे पार्टी के मूल कार्यकर्ता भी बगावत करके चुनावी मैदान में उतर गए जिसके बाद भाजपा के समर्थित उम्मीदवारों की स्थिति बद से बद्तर हो गई। 2 मई को जब त्रिस्तरीय चुनाव का परिणाम आया तो भाजपा चारों खाने चित नजर आने लगी


डैमेज कंट्रोल के लिए भाजपा ने अपने उन बागी उम्मीदवारों को मनाने का कार्य शुरू किया जो जिला पंचायत चुनाव जीतकर भाजपा की इज्जत का जनाजा निकाल दिया था "सुबह का भूला शाम तक घर आ जाए तो उसे भूला नहीं कहते", वाली कहावत को चरितार्थ करते हुए अपने रूठे कार्यकर्ताओं को माला पहनाकर उनका स्वागत स्थानीय नेताओं से स्वागत कराकर उन्हें अपना जीता हुआ जिला पंचायत सदस्य के कंधे पर अब उन जिलों में जिला पंचायत अध्यक्ष पद को पाने के लिए बेताब हैं त्रिस्तरीय चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश के मंत्रिमंडल में फेरबदल पर विचार चल रहा था,परन्तु उस पर अमल न हो सकी त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के परिणाम को भाजपा विधान सभा चुनाव-2022 से जोड़कर देख रही थी,परन्तु चुनाव परिणाम अप्रत्याशित आया जिसके बाद भाजपा शीर्ष नेतृत्व और संघ के बड़े नेता आपस में मंथन करने लगे।  


उत्तर प्रदेश में चौदह वर्षों के वनवास के बाद भाजपा को सत्ता सुख प्राप्त हुआ, परन्तु भाजपा नेताओं को सत्ता मिलते ही उनके स्वभाव में रावण जैसा घमंड समाहित हो जाता है जनता से दूरी और जनहित की बात करना भाजपा नेताओं को अच्छा नहीं लगता। फिर भी भाजपा की डूबती नाव को बचाने की कोशिश संघ परिवार करता रहा है। उत्तर प्रदेश में जिला पंचायत सदस्य पद पर उतरे भाजपा समर्थित उम्मीदावर की हार के बाद भारतीय जनता पार्टी की साख की चिंता अब संघ को सता रही है। जबकि वर्तमान परिदृश्य की बात करें तो संघ परिवार में भी कार्य करने वाले लोगों में राष्ट्रवाद और जनहित कि भावना खत्म हो चुकी है। 


संघ से जुड़े लोग भी अवसरवादी और भौतिकतावादी हो चुके हैं। यही भाजपा और संघ के पदाधिकारी जब अखिलेश की सरकार थी तो अखिलेश सरकार में 5-5 मुख्यमंत्री होने का आरोप लगा रहे थे। सूबे में जब योगी सरकार बनी तो एक मुख्यमंत्री और दो उप मुख्यमंत्री के पद का सृजन किया गया और एक संगठन महामंत्री सुनील बंसल को पार्टी कार्यालय पर बैठाकर उत्तर प्रदेश की सरकार संचालित करने का कार्य किया जाने लगा। इसे लेकर आपस में मनमुटाव भी हुआ, परन्तु  भाजपा शीर्ष नेतृत्व  और संघ के बड़े पदाधिकारी डैमेज कंट्रोल को संभालने का कार्य किये। 


यूपी प्रदेश प्रभारी ओम माथुर जी तो तंग आकर अपने पद से त्यागपत्र तक दे दिया। फिर भी उत्तर प्रदेश में आपसी खींचतान दुरुस्त न हो सकी। योगी सरकार में भ्रष्ट नौकरशाही दो पार्ट में विभाजित दिखी। एक पार्टी कार्यालय सुनील बंसल के खेमे में तो दूसरा योगी आदित्यनाथ जी के खेमे में बटे नजर आये स्थिति इतनी बद्तर हो गई कि आर्थिक मोर्चे व साहसी निर्णयों के अवसर पर दोनों एकजुट दिखायी पड़े, किन्तु अकर्मण्य प्रतिनिधियों ने केन्द्र की सकारात्मक मंशा के विपरीत विकास की धारा में नित नये अड़गे क्षेत्र से लेकर संगठन स्तर तक खड़े किये। वही हाल योगी सरकार में नौकरशाही की रही। 


तेल लगाने में विश्वास रखने वाले और चापलूस किस्म के अफसर योगी सरकार को बर्बाद करके रख दिया। जो अफसर मुलायम सरकार में मलाईदार पद पर रहे वही मायावती सरकार में माया मैडम के खास बने रहे। मजेदार बात यह रही कि जब सूबे में अखिलेश सरकार आई तो वही मौकापरस्त नौकरशाह अखिलेश यादव के खास बन गए। उससे अधिक चौकाने वाली बात यह रही कि वही चाटुकार अफसर योगी सरकार में भी अपनी चाटुकारिता के माध्यम से योगी जी के खास बने हैं फिलहाल विश्वास का स्तर, जल स्तर से भी तेज नीचे की ओर भाग रहा है। देखना बड़ा दिलचस्प होगा कि किस मोहनी वर्षा से संघ और भाजपा नेता आमजनों के बीच गिरते (क्षेत्र व संगठन) विश्वास के स्तर को सम्भाल पायेंगे। 

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