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रविवार, 23 मई 2021

खूब चरितार्थ हुई कोरोना संक्रमण काल में नीम हकीम खतरे जान की कहावत

मेडिकल की पढ़ाई के समय पढ़ते थे कि Mucormycosis या ब्लैक फंगस भी कोई बीमारी है,पर कभी कोई मरीज में ब्लैक फंगस नहीं देखा...!!!

ब्लैक फंगस का सच...
पिछले 10-15 दिन से भारतीय मीडिया सुबह-शाम लोगों में ब्लैक फंगस के नाम से घबराहट फैला रहा है। ये वही लोग हैं जिन्होंने न्यूज चैनल्स पर खुलेआम स्टेरॉइड्स (Steroids) को करोना में लाइफ सेविंग बताया था और उनकी Doses पर भी डिस्कस करते थे। लोगों ने जो कि घर पर आइसोलेशन में थे। बिना डॉक्टर की सलाह से ब्लड शुगर लेवल्स की जाँच कराए बिना Mild Symptoms में भी हाईडोज Steroids लिए। क्योंकि लोगों को यह समझाया गया कि जांच तो डॉक्टर फालतू में लिखता है। जब गूगल और यूट्यूब है तो डॉक्टर की क्या जरूरत...???


इसका परिणाम हुआ कि Steroids से इम्यूनिटी Compromise हुई और Co-morbid Diabetes से फंगल इन्फेक्शन का रिस्क बढ़ा। फिर क्या हुआ वो सबको पता है। Mucormycosis को Epidemic घोषित कर दिया गया और इसकी भी दवा की ब्लैक मार्केटिंग शुरू हो गई। मीडिया ने 15-20 दिन पहले Remdesivir की कमी को खूब दिखाया, जिसके कारण बिना जरूरत के लोगों ने दवाएं खरीदी और दवाओं की खूब ब्लैक मार्केटिंग हुई। सबसे अधिक रेमडेसिविर की ब्लैक मार्केटिंग हुई। आज इसे कोई नहीं पूछ रहा। 


ऑक्सिजन की कमी दिखायी गयी। Doctors और Clinics को ऑक्सिजन नहीं मिल रही थी। पर जो लोग समाज सेवक हैं,उनको ऑक्सीजन सिलेंडर, ऑक्सीजन Concentrator आराम से मिलते रहे। परन्तु बाजार में उसकी कमी की खबर चलवाकर ब्लैक मार्केटिंग के माहिर खिलाड़ियों द्वारा खेल शुरू किया गया। उसके बाद तो ऑक्सीजन के लंगर लगने लगे। समाजसेवी घर-घर सिलिंडर लेकर देने लगे। ब्लैक मार्केटिंग भी जमकर हुई। पर इन समाजसेवी लोगों के पास वर्तमान परिस्थिति को समझने की बुद्धि नहीं होती। वेल्डिंग (Welding) वाले सिलेंडर में भी ऑक्सीजन भरा कर लोगों की सेवा करने लगे। 


ऑक्सीजन में मेडिकल ऑक्सीजन की जगह Industrial ऑक्सीजन भी सप्लाई हुई। Oxygen Flow Meter में Non-Sterile पानी का भी प्रयोग खूब हुआ। कोई पूँछने वाला नहीं। स्वास्थ्य विभाग से जुड़े अफसर भी खूब अमानवीय ब्यवहार जनता के साथ किये। सरकारी हॉस्पिटल में ऑक्सीजन के अभाव में मरीज दम तोड़ रहे थे। जिसकी खबरें प्रमुखता से प्रकाशित हुई और न्यूज चैनलों पर दिन भर छाई रहती थी। सोशल मीडिया Facebook, WhatsApp से कथित समाजसेवी लोग हफ्ते भर में डॉक्टर भी बन गए। Oxygen Concentrator समाजसेवी लोग रेंट पर दे रहे हैं,Without Sterilisation...!!!


अब इन सबके कारण फंगल इन्फ़ेक्शन नहीं होगा तो मरीज की किस्मत। यही कारण है कि ब्लैक फंगल Infection फैल रहा है। पहले ये Rare Hospital Acquired इन्फ़ेक्शन था पर अब ये epidemic है। धन्यवाद समाजसेवी लोगों का और उन लोगों का जो गूगल WhatsApp पर पढ़कर डॉक्टर बनते हैं और बाकी लोगों को करोना का घर बैठे Treatment बताते हैं। इसलिए हमेशा Qualified Doctor से ही सलाह लें। घर पर खुद डॉक्टर बनेंगे तो बचना मुश्किल हैं। अब भोगो। कोई बचाने वाला नहीं है। सभी का एक दायरा होता है। परन्तु अफवाह और मूर्खता एवं नासमझी का कोई दायरा नहीं। 

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