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शुक्रवार, 30 अप्रैल 2021

जिला अस्पताल प्रतापगढ़ के इमरजेंसी सेवा में तैनात स्वास्थ्य कर्मियों और मरीज के तीमारदारों में मारपीट की आखिर वजह क्या...?

चिकित्सक,फार्मासिस्ट, वार्डबॉय को दौड़ा-दौड़ा कर लोग क्यों पीटने के लिए हो रहे हैं,मजबूर...???

पूर्व डीजीसी क्रिमिनल शचीन्द्र प्रताप सिंह की पत्नी का फैजाबाद इलाज के लिए ले जाते समय हुआ निधन...

जिला अस्पताल में धरती के कथित भगवान को लोग क्यों बना रहे हैं,अपनी नाराजगी का शिकार...???

जिला अस्पताल में मारपीट के बाद एकत्र हुए लोग...

इस विषम परिस्थिति में मरीज के परिजनों और स्वास्थ्यकर्मियों से इतना जरुर कहना चाहूँगा कि वे भी धैर्यता का परिचय देते हुए कोरोना संक्रमण काल में एक-दूसरे का सहयोग करते हुए इसे परास्त करें न कि आपस में मारपीट करके जिला अस्पताल की इमरजेंसी ही बाधित कर दें,जिससे और मरीज भी अपने जीवन से हाथ धो लें। जब सम्पूर्ण जिले की सीएचसी और पीएचसी में OPDबंद चल रही है तो वहाँ पर तैनात चिकित्सक जिला अस्पताल में क्यों नहीं हो रहे अटैच जिससे चिकित्सकों की कमी का रोना रोने से मिल सके निजात। चूँकि जिला अस्पताल में स्वीपर और सफाई कर्मियों से ली जा रही कोरोना संक्रमण काल में भर्ती मरीजों के इलाज में ड्यूटी। किसी का निकाल लेते हैं आक्सीजन किट तो किसी का बहने देते हैं,ग्लूकोज चढ़ाने के लिए लगे सिस्टम से ब्लड। धरती के कथित भगवान और मरीज के परिजन/तीमारदार में इसी बात को लेकर होती है,मारपीट...!!!

जिला अस्पताल प्रतापगढ़ की बंद बड़ी इमरजेंसी सेवा...

जिला अस्पताल के सामने प्रताप बहादुर पार्क के गेट पर चाय पान की दुकान पर रहती है,काफी भीड़। जिला अस्पताल में मरीज भर्ती कराने और महामारी काल में आक्सीजन सिलेंडर की कालाबाजारी सहित मार्केट में न मिल पाने वाली दवाओं को दुगने-तिगुने दामों में उपलब्ध कराने का ठेका लेने वाले और जिला अस्पताल में दलाली करने वाले लोग लगाये रहते हैं,मजमा। कोरोना संक्रमण काल की गाइडलाइन का हो रहा है,उल्लंघन। जबकि जिला अस्पताल के अन्दर पुलिस चौकी स्थापित है और बाहर चौक से पुलिस लाइन के बीच में पुलिस के आलाधिकारियों की होती रहती है,पड़ताल।

कोरोना संक्रमण काल में बंद पड़ी जिला अस्पताल की इमरजेंसी सेवा...

जिला अस्पताल प्रतापगढ़ में लगातार स्वास्थ्य कर्मियों की पिटाई से विकलांग हो चुकी स्वास्थ्य ब्यवस्था कोमा में पहुँच है। वजह एक दिन पहले चिकित्सक और लैब टेक्नीशियन की आधी रात में हुई थी,तीमारदारों द्वारा पिटाई। आज सुबह वार्डबॉय और फार्मासिस्ट की पिटाई से जिला अस्पताल में इमरजेंसी सेवा भी बंद हो गई। कोरोना संक्रमण काल के इस दौर में क्या जिला मुख्यालय स्थित जिला अस्पताल की इमरजेंसी सेवा को बंद किया जा सकता है ? यदि नहीं बैंड किया जा सकता है तो इनके विरुद्ध भी कठोर से कठोर कार्रवाई प्रदेश की योगी सरकार को करना चाहिए ताकि महामारी के इस भयवाह स्थिति में हड़ताल करने की बात कोई भी स्वास्थ्य कर्मी अपने मन मस्तिष्क में लाने की हिम्मत न कर सके।

मारपीट के बाद जिला अस्पताल प्रतापगढ़ के सारे स्वास्थ्य कर्मी हड़ताल पर...

जिला मुख्यालय पर एक मात्र जिला अस्पताल है, जिसमें जिले के सारे मरीज इस महामारी काल में आ रहे हैं और उनकी देखरेख और उपचार में घोर लापरवाही बरती जा रही है। जबकि योगी सरकार कह रही है कि अस्पताल पहुँचने वाले प्रत्येक मरीज का हरहाल में इलाज किया जाना चाहिए, परन्तु प्रतापगढ़ का जिला अस्पताल में जिस कदर अनियमितता और लापरवाही बरती जा रही वह अक्षम्य है। जब मरीज के परिजन जिला अस्पताल आते हैं तो सोचते हैं कि सरकार ने कहा है तो यहाँ इलाज की ब्यवस्था जरूर होगी। उसे क्या पता कि जिस जिला अस्पताल में वह अपना मरीज भर्ती कर रहा है वह अस्पताल नहीं बल्कि वह आज के दौर में कसाईखाना यानि कत्लखाना बन चुका है।

कोरोना संक्रमण काल में जिला महिला अस्पताल की पुरानी बिल्डिंग में एल-1 सेंटर संचालित है जिसकी सम्पूर्ण निगरानी और देखभाल CMO प्रतापगढ़ डॉ अरविन्द कुमार श्रीवास्तव करते हैं। जिला अस्पताल में सीएमएस डॉ पी पी पाण्डेय का संचालन है और नोडल अफसर होने के कारण CMO प्रतापगढ़ का दखल जिला अस्पताल पर भी रहता है,क्योंकि जिला अस्पताल परिसर में ही CMO कार्यालय भी है और केंद्र और राज्य सरकार की तमाम स्वास्थ्य सेवायें जिला अस्पताल परिसर में ही संचालित है। आयुष्मान भारत और कोविड सेंटर का संचालन भी जिला अस्पताल से ही किया जा रहा है। कुल मिलाकर जिले की स्वास्थ्य सेवा सीएमओ डॉ अरविन्द कुमार श्रीवास्तव के हाथ में है।

प्रतापगढ़ के सीएमओ जिले के मरीज की सेवा में लगने वाले संसाधन की ब्यवस्था करने में पूरी तरह विफल हैं और उन्हीं मरीजों के लिए आये बजट को खाने के लिए सीएमओ दिन रात एक किये रहते हैं। किस मद से कितना धन बच जाए ? बस इसी गणित में उलझे रहते हैं और संसाधन के आभाव में जब जिला अस्पताल की इमरजेंसी सेवा अथवा कोविड एल-1 में भर्ती मरीज दम तोड़ देते हैं तो कुप्रशासन और अब्यवस्था से नाराज परिजन धरती के कथित भगवान से मारपीट करने लगते हैं। यही हकीकत है जिसे शासन व जिला प्रशासन को स्वीकार कर उस पर अमल करना चाहिए। पुलिस द्वारा सिर्फ मुकदमा लिख लेने और मारपीट के आरोपियों को गिरफ्तार करके जेल भेज देने मात्र से बात बनने वाली नहीं है।

यह बात जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सेवा दे रहे स्वास्थ्य कर्मी भी मान रहे हैं कि संसाधन के अभाव में भर्ती मरीजों की देखभाल उस तरह नहीं हो पा रही है जिस तरह सामान्यतः होनी चाहिए। परन्तु इसके लिए वह जिम्मेदार नहीं बल्कि वह जिम्मेदार हैं, जिनके हाथ में संसाधन उपलब्ध कराने का दायित्व है। गलती CMO और CMS करें और मरीजों के परिजनों/तीमारदारों का लात हम खाएं। इस समस्या का हल जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन सहित योगी सरकार को निकालना पड़ेगा। नहीं तो अभी शुरुआत है। आगे चलाकर स्थिति और भयावह होगी। आज सुबह जो घटना घटित हुई वह इसी का नतीजा है। जिला अस्पताल में भर्ती तिमारदारों और स्वास्थ्य कर्मियों के बीच मारपीट में तैनात वार्डबॉय जेपी का सिर फट गया। मारपीट में फार्मासिस्ट राकेश यादव और वार्डबॉय गंभीर रूप से घायल हो गए।

स्वास्थ कर्मियों के मुताविक जो लोग उनके साथ मारपीट किये वो अपने की कैबिनेट मंत्री का करीबी बता रहे थे। जिला अस्पताल से ऑक्सीमीटर तक लूट ले जाने तक का आरोप स्वास्थ्य कर्मी लगा रहे थे। सांस लेने में दिक्कत के चलते जिला अस्पताल में महिला मरीज भर्ती हुई थी। स्वास्थ्य कर्मियों के साथ मारपीट की दूसरी बड़ी घटना आज जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में कारित हुई। जिला अस्पताल में पुलिस चौकी होने के बावजूद इमरजेंसी में तीमारदारों और स्वास्थ्य कर्मियों के बीच मारपीट की घटना घटित होना सिस्टम पर सवालिया निशान खड़ा करता है। जिला अस्पताल में सुरक्षा के लिये तैनात पुलिस कर्मी बेबस नजर आते हैं। अपनी सुरक्षा के प्रति स्वास्थ्य कर्मियों में आक्रोश दिख रहा है और स्वास्थ्य कर्मियों का आक्रोश इतना बढ़ गया कि महामारी काल में भी जिला अस्पताल की इमरजेंसी सेवा को बंद कर दिया गया। जिससे जिला अस्पताल पहुँच रहे मरीज और तीमारदारों को बड़ी असुविधा हो रही है।

पुलिस के मुताविक थाना- कोतवाली नगर पुलिस को जिला अस्पताल प्रतापगढ़ में चिकित्सक/कर्मचारी से मारपीट की सूचना उसे प्राप्त हुई। इस सूचना पर तत्काल स्थानीय पुलिस मौके पर पहुँची तो ज्ञात हुआ 01- जितेन्द्र प्रताप सिंह पुत्र सुरेश सिंह 02- सौमित्र शेखर पुत्र विनोद कुमार सिंह 03- तुषार सिंह पुत्र जितेन्द्र प्रताप सिंह निवासीगण किशनपुर थाना- कन्धई जनपद प्रतापगढ़ का मरीज कल शाम से जिला अस्पताल प्रतापगढ़ में भर्ती था। किसी बात को लेकर आज सुबह 06:00 बजे मरीज के परिजनों द्वारा चिकित्सक/कर्मचारियों से मारपीट की गई, जिसमें वार्डबाॅय जय प्रकाश यादव घायल हो गये। पुलिस द्वारा जितेन्द्र व तुषार को हिरासत में ले लिया गया है। मौके पर शांति व्यवस्था कायम है। अन्य विधिक कार्यवाही की जा रही है।

पूर्व डीजीसी क्रिमिनल शचीन्द्र प्रताप सिंह की पत्नी को सांस लेने में तकलीफ हुई तो परिजन उन्हें जिला अस्पताल लाये और उन्हें इमरजेंसी में भर्ती किया, जहाँ पर उनका इलाज चल रहा था। परिजनों का आरोप है कि उन्हें ऐसी जगह पर स्थान दिया गया, जहाँ उनके बगल में शव पड़े थे। सही जगह मांगने व सही इलाज की ब्यबस्था हेतु प्रयास करने पर वहां पर कार्यरत स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा उनके परिजनों के साथ बदत्तमीजी की गई। जब इमरजेंसी सेवा बंद हो गई तो इलाज के अभाव में परिजन अपने मरीज को फैजाबाद एम्बुलेंस से ले जाना चाहा। शचीन्द्र प्रताप सिंह का आरोप है कि उनके एम्बुलेंस को जिला अस्पताल में स्वीपर और सफाई कर्मियों की आड़ में दलाली करने वाले आधा दर्जन गुंडों द्वारा उनकी पत्नी के एम्बुलेंस को घंटों रोक रखा गया, जिससे इलाज के अभाव में उनकी पत्नी को फैजाबाद ले जाते समय मृत्यु हो गई। सवाल बड़ा है,परन्तु उत्तर देने के लिए कोई नहीं। प्रतिदिन दर्जनों मरीज जिला अस्पताल में इलाज के अभाव में दम तोड़ रहे है। कौन है,स्वास्थ्य सेवा में घोर लापरवाही की वजह से हो रही मरीजों की मौत का जिम्मेवार...???

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