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बुधवार, 28 अप्रैल 2021

कसाई बनकर कोविड अस्पताल सेंटर का संचालन कर रहा है, प्रतापगढ़ का सीएमओ डॉ अरविंद कुमार श्रीवास्तव

सही कहा गया है कि लात के देवता बात से नहीं मानते...!!!

तीमारदारों के आगे हाथ जोड़ने की नौटंकी करता CMO प्रतापगढ़ डॉ A Kश्रीवास्तव...

जिस मरीज के तीमारदार माँ बहन एक करने की कूबत रखते हैं, उसके मरीज को सीएमओ प्रतापगढ़ डॉ अरविन्द कुमार श्रीवास्तव बिना देर किये भर्ती कर लेते हैं। जब सीएमओ को कोई गरियाता है तो अधीनस्थ बहुत खुश होते हैं। पीछे से कहते हैं कि बहुत अच्छा हुआ। यह हरामी इसी का पात्र है। ये हालात सीएमओ प्रतापगढ़ के हैंथाना जेठवारा क्षेत्र के पूरे सुखदेव कटरा गुलाब सिंह प्रतापगढ़ की रहने वाली नीलम मिश्रा पत्नी अजय मिश्र की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद भी जिला अस्पताल "महिला" की पुरानी बिल्डिंग में बने कोविड अस्पताल एल-2 में स्वास्थ्य कर्मचारियों द्वारा मरीज को नहीं किया जा रहा था,भर्ती। एल-2 में तैनात चिकित्सक बिना सीएमओ के इजाजत एक भी मरीज की नहीं लेते भर्ती

आपदा को अवसर में बदलने वाला धरती का पहला CMO डॉ अरविन्द कुमार श्रीवास्तव...
सीएमओ प्रतापगढ़ डॉ अरविंद कुमार श्रीवास्तव के तुगलकी फरमान नीलम मिश्रा को भर्ती न करने से परिजन थे,बेहाल। मरीज नीलम मिश्रा की ऑक्सीजन लेबल लगातार घट रही थी। दो घण्टे जिला अस्पताल में चक्कर काटने के बाद जब परिजनों का धैर्य खत्म हो गया तो परिजनों के एक साथी बृजेश गुप्ता को आया ताव और इमरजेंसी में बैठे सीएमओ प्रतापगढ़ डॉ अरविंद कुमार श्रीवास्तव को धर दबोचातीमारदारों के परिचय बृजेश गुप्ता एल-2 में बेड खाली होने की जानकारी पहले अपने स्तर से की। जब जगह खाली होने की बात निश्चित हो गई तो तानाशाह बने सीएमओ के पास बृजेश गुप्ता पहुँचे और पहुँचते सीएमओ का भद्रा उतार लिया। बगल में सांसद संगम लाल गुप्ता के पीआरओ/प्रतिनिधि अभिषेक पांडेय के बड़े भाई अनिल पाण्डेय एडवोकेट जो मुँह पर काला मास्क लगा रखे हैं, वो भी किसी मरीज को लेकर अस्पताल पहुँचे थे। देखिये कैसे चरण बंदना कर रहे हैं,अनिल पाण्डेय एडवोकेट...

बड़ा सवाल यह है कि जब एल-2 में बेड खाली था तो सीएमओ प्रतापगढ़ डॉ अरविंद कुमार श्रीवास्तव कोरोना संक्रिमत मरीज जिसकी ऑक्सीजन लेबल भी लगातार घट रही थी,उसे क्यों भर्ती लेने से मना कर रहे थे ? इस यक्ष प्रश्न का जवाब तो सीएमओ प्रतापगढ़ ही दे सकते हैं। परन्तु कोरोना संक्रमण काल में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के आदेश को धता बता रहे हैं,प्रतापगढ़ के सीएमओ डॉ अरविंद कुमार श्रीवास्तव। शासनादेश के मुताविक किसी भी मरीज को स्वास्थ्य विभाग यह कह करना मना नहीं कर सकता कि उसके यहाँ बेड नहीं है, ऑक्सीजन नहीं है अथवा डॉक्टर नहीं है। किसी भी तरह का बहाना स्वास्थ्य विभाग का मुखिया जो जिले में तैनात है,नहीं कर सकता। प्रतापगढ़ के हालात इतना खराब है कि यहाँ तो जनप्रतिनिधि जो कोरोना संक्रमण से संक्रिमत होकर होम आइसोलेशन पर है,उसे स्वास्थ्य विभाग कोई दवा नहीं दे रहा है। प्रतापगढ़ सदर विधायक राजकुमार पाल इसके उदहारण हैं

यदि स्वास्थ्य उपकरण से लेकर किसी चीज का अभाव है तो जिले में तैनात सीएमओ इसका जिम्मेदार होगा। सीएमओ की जिम्मेदारी होगी कि वह निजी अस्पतालों में मरीज को भर्ती कराए। साथ ही निजी अस्पताल में यदि किसी उपकरण अथवा ऑक्सीजन आदि की कमी हो तो उसकी भी उपलब्धता सीएमओ ही करेगा। जबकि प्रतापगढ़ का सीएमओ डॉ अरविन्द कुमार श्रीवास्तव ऐसा कुछ भी नहीं कर रहे हैं। सीएमओ प्रतापगढ़ इतना नीच और कमीना किस्म का ज़ालिम इंसान है कि उसमें मानवीय संवेदना मृत हो चुकी है। वह धन कमाने के चक्कर में 90फीसदी मरीजों को बिना इलाज के ही भगा देता है। इलाज तो वही 10फीसदी लोग करा पा रहे हैं जो सीएमओ की ऐसी की तैसी करने की माद्दा रखते हों। यदि प्रतापगढ़ के सीएमओ से मरीज अथवा तीमारदार सर अथवा साहेब-साहेब करके बात किया तो उसको जिला अस्तपाल परिसर से भगाया जाना तय है। स्वयं सीएमओ प्रतापगढ़ डॉ अरविन्द कुमार श्रीवास्तव मरीज और मरीज के तीमारदार को अस्पताल से भाग जाने का फरमान सुनाता है

जिन्हें विश्वास न हो वह नीचे वीडियो से इसकी पुष्टि कर ले। जब बृजेश गुप्ता सीएमओ प्रतापगढ़ की ऐसी तैसी करना शुरू किए तो नीलम मिश्रा फौरन भर्ती कर ली गई। फिर उन्हें बेड भी मिला और ऑक्सीजन भी। लोग स्वास्थ्य विभाग और बैंक में जाते हैं तो बहुत संकोच और डरे, सहमें होते हैं। बैंक में डरते हैं कि यही से धन लेना और देना रहता है,जिस कारण यहाँ ब्यवहार खराब न हो ! बैंककर्मी भले दो बात उस उपभोक्ता को सुना दे,परन्तु उपभोक्ता कुछ बोलने से परहेज कर जाता है। ठीक यही हाल स्वास्थ्य महकमें और मरीज एवं उसके तीमारदारों का रहता है। चिकित्सक और नर्स एवं वार्ड ब्याय चाहे जितनी उलाहना अथवा दुर्ब्यवहार कर ले,परन्तु मरीज और तीमारदार चुपचाप सुनता व सहता रहता है l दो फीसदी मामले तब बिगड़ते हैं जब स्वास्थ्य महकमें की घोर लापरवाही से किसी मरीज की जान चली जाती है और मरीज के साथ तीमारदार दबंग किस्म के रहते हैं तो वही हंगामा भले कर दें ! बाकी तो चुपचुप सहते सुनते रहते हैं

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