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गुरुवार, 18 मार्च 2021

वरिष्ठ कांग्रेसी नेता प्रमोद और रामपुरखास की विधायक अराधना मिश्रा "मोना" का जबर्दस्त होता है,मीडिया मनेजमेंट

राजधानी लखनऊ से लेकर जिला मुख्यालय सहित तहसील मुख्यालय लालगंज तक मीडिया मैनेजमेंट देखना हो तो प्रमोद और मोना की देखिये,ब्यवस्था।

पत्रकारों को खाने-पीने और आने-जाने तक की ब्यवस्था का रखा जाता है,विशेष ख्याल। प्रमोद और मोना की ब्यवस्था के आगे अन्य जनप्रतिनिधियों की ब्यवस्था हो जाती है,धड़ाम।

पूर्व सांसद प्रमोद कुमार...
देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पानी पी पीकर कोसने वाले 70 वर्षीय वरिष्ठ कांग्रेसी नेता प्रमोद कुमार अभी भी महोत्सव और राष्ट्रीय एकता के नाम पर बाबा घुइसरनाथ धाम की पवित्र भूमि पर भोजपुरी कलाकारों से भोजपुरी गानों पर उनके नृत्य को निहारते रहेऐसा ही आयोजन सपा संस्थापक एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव अपने गाँव सैफई में महोत्सव के नाम पर कराते रहे। मुलायम सिंह और उनके बेटे अखिलेश यादव द्वारा कराए जाने वाले उस रंगारंग आयोजन की भी जमकर आलोचना हुई थी। फिर भी ये नेतागण घोर आलोचना के बाद भी अपनी आदत में सुधार लाना नहीं चाहते...!!!
रामपुरख़ास विधायक आराधना मिश्रा "मोना"

मीडिया का सबसे तगड़ा मैनेजमेंट प्रमोद और मोना ने कर रखा है। जब खबर मोना और प्रमोद की आती है तो लालगंज में पत्रकारों को तो मैनेज किया ही जाता है। मुख्यालय के सभी पत्रकारों को भी मैनेज करने की कोशिश होती है। वो कोशिश लगभग-लगभग सफल भी रहती है। लोकसभा चुनाव हो, चाहे विधानसभा ! सब कुछ पूर्व से ही मैनेज करके प्रमोद और मोना की टीम उसे सफल बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ती। ब्लॉक प्रमुख और लालगंज नगर पंचायत के चुनाव में पहले प्रमोद दखल देते थे, परन्तु रामपुर खास का उत्तराधिकार बदलते ही उसकी भी कमान मोना अपने हाथ में ले ली हैं।

प्रमोद कुमार और अराधना मिश्र उर्फ मोना की जनसभा की फाइल फोटो...
प्रतापगढ़ जनपद में जिला मुख्यालय पर बसपा शासन काल में सदर प्रतापगढ़ के विधायक संजय त्रिपाठी के नेतृत्व में जीआईसी में प्रतापगढ़ महोत्सव हुआ था। फिर किसी विधायक ने महोत्सव कराने के प्रति ध्यान नहीं दिया। उस महोत्सव में सरकारी धन दोनों हाथ से उड़ाया गया था। फिल्म जगत के गायक उदित नारायण आये थे। उनके हवाई जहाज से आने-जाने का खर्च साथ ही खाने-पीने की फ्री में ब्यवस्था जिला प्रशासन ने की थी। उदित नारायण के जाते समय उनके खाते में 8लाख का RTGS भी किया गया था। वजह तत्कालीन जिलाधिकारी प्रतापगढ़ नीतीश्वर कुमार का लिखा एक गीत उदित नारायण ने गाया था। उसकी वजह से नीतीश्वर कुमार उनके मुरीद रहे। सो मौका मिलते ही तत्कालीन जिलाधिकारी प्रतापगढ़ नीतीश्वर कुमार सरकारी धन उदित नारायण पर उड़ेल दिया।

महोत्सव और राष्ट्रीय एकता के नाम पर बाबा घुइसरनाथ धाम में रंगारंग कार्यक्रम में मचा धमाल...
लखनऊ और सैफई महोत्सव की तरह प्रतापगढ़ में गड़वारा विधानसभा जो अब विश्वनाथगंज विधानसभा है, का नेतृत्व स्व राजाराम पांडेय करते थे। उन्होंने अजगरा महोत्सव कराने की शुरुआत की। तत्कालीन जिलाधिकारी आर एस वर्मा ने मुलायम सिंह कैबिनेट में मंत्री रहे स्व राजाराम पांडेय के प्रस्ताव पर अजगरा महोत्सव की शुरुआत की । अब तो कई महोत्सव होने लगे। रानीगंज विधानसभा में माँ बाराही देवी धाम में वर्तमान विधायक अभय कुमार उर्फ धीरज ओझा ने महोत्सव कराया था। बाबा घुइसरनाथ धाम में महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रमोद कुमार और वर्तमान विधायक रामपुर खास अराधना मिश्रा उर्फ मोना धार्मिक आयोजन कराते रहे। देखा देखी की राजनीति में अब राष्ट्रीय एकता व महोत्सव का नाम देकर वहाँ भी रंगारंग आयोजन होने लगे।

महोत्सव में फूहड़ डांस का हुआ आयोजन...
अपना नाम वर्ड की गिनीज बुक में दर्ज कराने वाले वरिष्ठ कांग्रेसी नेता प्रमोद कुमार की राज्यसभा की सदस्यता जाते ही महाशिवरात्रि पर्व पर बाबा घुइसरनाथ धाम में होने वाले आयोजनों में उसका असर दिखने लगा। प्रमोद कुमार अपनी पकड़ हर दल में रखते थे। सत्ता चाहे जिस दल का हो, परन्तु प्रमोद कुमार का काम जिला मुख्यालय से राज्य मुख्यालय लखनऊ तक उनके कार्य को कोई विभाग रोकने की हिम्मत नहीं करता था। परन्तु भाजपा की योगी सरकार में प्रमोद और रामपुर खास विधानसभा की विधायक मोना की पकड़ अन्य सरकारों से कमजोर पड़ गई है। क्योंकि रामपुर खास विधानसभा में बाबा घुइसरनाथ धाम में संस्कृति विभाग से विकास के नाम पर कई बार बड़े-बड़े पैकेज लेने में सफल रहे।

कांग्रेसी नेता प्रमोद कुमार ने महोत्सव में भीड़ एकत्र के लिए कोरोना वायरस से हुआ था,समझौता...
राष्ट्रीय एकता और महोत्सव के नाम पर प्रमोद कुमार संस्कृति विभाग से धन निर्गत कराकर आयोजन को सफल बनाने का ढ़िढोरा पीटने का कार्य बड़ी चालाकी से किया जाता रहा। उपस्थित लोगों को लगता था कि ये सारी ब्यवस्था प्रमोद और मोना अपनी जेब से करते हैं। इस राज़ का फ़ांस उस वक्त हुआ जब मीडिया कर्मियों के सम्मान में नकदी वाला 11000/ रुपये के लिफाफे में कटौती हो गई। सिर्फ अंग वस्त्र पाकर मन मसोसकर कुछ पत्रकार संतोष कर लिये तो कुछ इतने नाराज हुए कि वो सम्मान में मिले अंग वस्त्र वहीं छोड़कर चले आये। पत्रकारों को ये नगद पुरस्कार वर्ष-2019 तक मिला था। वर्ष-2020 एवं 2021 से पत्रकारों को नगद धनराशि का लिफाफा बन्द हो गया। जो चर्चा का विषय बना हुआ है, परन्तु पत्रकारों की बात कौन लिखे ? पत्रकार दूसरे की खबर तो लिखता है,परन्तु अपनी बारी आती है तो उसे साँप सूंघ जाता है l

महोत्सव में भीड़ को पुलिस नियंत्रित नहीं कर सकी तो नेताजी ने स्वयं संभाली कमान...
सूत्रों के अनुसार वर्ष-2019 में दिया गया पत्रकारों को नगद धनराशि का सम्मान भी प्रमोद और मोना निजी ब्यवस्था से की थी। उस बार भी बड़ी फजीहत के बाद नगद धनराशि का लिफाफा पत्रकारों को दिया गया था। कुछ चुनिंदा बड़े बैनर के पत्रकारों को बन्द कमरें में नगद धनराशि का लिफाफा देकर मनाया गया था। जब पत्रकार नगद सम्मान पाने के लिए इस कदर आतुर होगा तो पत्रकारिता की ऐसी की तैसी होना लाजिमी है। फिर निष्पक्ष खबर की उम्मीद पत्रकारों से करना बेईमानी होगी। किसी की एक कप चाय पी लेने के बाद उसके सामने गलत बात के विरोध का जज़्बा लोगों में खत्म हो जाता है। यहाँ तो जिला मुख्यालय से आने-जाने के लिए साधन एवं खाने-पीने से लेकर सम्मान समारोह और नगद लिफाफे की ब्यवस्था जब मिलेगा तो कलम में जंग लगना तय है।

गजब की अश्लीलता परोसी गई और नेताजी के समर्थक इसे शिव भक्ति का गीत बता रहे हैं...
जिला मुख्यालय से भी मीडिया मैनेजमेंट का प्रमोद और मोना के दरबार में पूरा ख्याल विशेष रूप से रखा जाता है। धार्मिक आयोजन की आड़ में पत्रकारों को अंग वस्त्र और नगद धनराशि का लिफाफा देकर पत्रकारों को सम्मानित किया जाता था, ताकि खबरों को बढ़िया कवरेज मिले और कभी भूल चूक से कोई बात बिगड़े तो मीडिया के साथी लोग उसे मैनेज कर लें। पत्रकारों को अंग वस्त्र भेंट करने के साथ नकद रुपये देने की परम्परा जो बनी थी वो दो साल पहले संस्कृति विभाग से धन न मिलने की वजह से बन्द करना पड़ा। उससे पहले जिले के बड़े बैनर के पत्रकारों को बन्द कमरें में समान्नित किया गया था। वर्ष-2019 में ही पत्रकारों को नकद रुपये से भरे लिफाफे बड़ी जद्दोजहद के बाद सम्मान में भेंट किये गए थे। उसी के बाद ही लिफाफे में नकद रुपये देने की परंपरा बन्द हो गई। एक पत्रकार को नकद रुपये वाला लिफाफा जब भेंट स्वरूप नहीं मिला तो वह भेंट किये गए अंग वस्त्र को भी त्याग कर अपने घर चला आया। अब पत्रकारों को सप्रेम भेंट के रूप में सिर्फ अंग वस्त्र दिए जाते हैं। इसके बाद भी प्रतापगढ़ की मीडिया पर सबसे अधिक पकड़ यदि किसी जनप्रतिनिधि की है तो वह प्रमोद और मोना की है। क्योंकि पत्रकारों की नजरों के सामने घटित घटना भी प्रतापगढ़ के पत्रकार हजम कर गए। हैं न कमाल की बात

2 टिप्‍पणियां:

  1. बेहद शानदार विश्लेषण व अकाट्य सत्य को आपने सारगर्भित शब्दों के माध्यम से रिपोर्ट तैयार की है ..
    आपको पढकर सदैव निर्भीक पत्रकारिता का स्पष्ट भान होता है, वास्तव में पत्रकारिता को आप जैसे ही योद्धाओं की आवश्यकता है .. पत्रकारिता के नाम पर चाटुकारिता करने वालों की नही ..

    जवाब देंहटाएं

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