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सोमवार, 29 मार्च 2021

जावेद अहमद की जालसाजी से प्रतापगढ़ शहरियों में फैली दहशत

आईये जाने कौन है, मान्यवर जावेद अहमद और क्या है, इनका असल ब्यवसाय ? कौन है, इनका मददगार और कौन है, इनका संरक्षक...???

जावेद अहमद देश के सविधान और कानून से ऊपर हैं,तभी तो बिना पैनकार्ड अंकित कराये ही करा  लिया एग्रीमेंट...!!!

पुलिस अधीक्षक प्रतापगढ़ से पीड़ित बृजेश कुमार गुप्ता ने की फरियाद, षड्यंत्रकारी जावेद अहमद के षड्यंत्र से बचाने की लगाई गुहार...!!!

भूमाफिया जावेद अहमद के जगलरई की पूरी दास्ता पीड़ित बृजेश ने लिखकर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री सहित ब्यवस्था में बैठे सभी जिम्मेदारों को शिकायती पत्र भेजकर सही तथ्यों से अवगत कराते हुए कड़ी कार्यवाही की माँग की है...!!!

 जनाब जावेद अहमद के जलवे,सार्वजनिक स्थल पर स्मोकिंग करते हुए... 
माननीय न्यायालय श्रीमान् मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट महोदय के आदेश के क्रम में 156 (3) CRPC के अंतर्गत कोतवाली नगर में पंजीकृत FIR नम्बर- 0117/2021, दिनांक- 6 फरवरी, 2021 के सन्दर्भ में वास्तविक घटना की वस्तुस्थिति से अवगत कराने के सम्बन्ध में जाने सही तथ्य। कभी-कभी जो दिखता है वो रहता नहीं और जो रहता है वो दिखता नहीं। जनाब जावेद अहमद के द्वारा प्रायोजित कहानी और सबनम द्वारा माननीय न्यायालय श्रीमान् मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के यहाँ दाखिल वाद में भी सारे तथ्य गोलमोल है l ठीक उसी तरह जिस तरह दामिनी फिल्म की कहानी में दामिनी को एक बार पागल बताया गया है और बाद में उसे ही बहुत चालाक बताया गया l सबनम के मुकदमों का भी वही हाल है। जनाब जावेद अहमद जितनी चाभी भरते हैं उतना ही खिलौना चलता है। फिर खड़ा हो जाता है। इसलिए समाज में ऐसे लोगों के चेहरे से फरेबे और जालसाजी वाला नकाब उतरना चाहिए और जनता को इनकी असलियत का सामना करना चाहिए

जावेद अहमद द्वारा रमेश वाजपेयी से लिया गया एग्रीमेंट... 

पीड़ित बृजेश कुमार गुप्ता की कहानी सुने उसकी जुबानी। बृजेश कुमार गुप्ता जो पल्टन बाजार, थाना-कोतवाली नगर जनपद प्रतापगढ़ पंचमुखी मंदिर चौराहा, थाना- कोतवाली नगर, प्रतापगढ़ का रहने वाला है और टेलरिंग यानि कपड़े की सिलाई का कार्य करता है। उसके पिता भैरवदीन गुप्ता पल्टन बाजार, शिव मंदिर और श्रम प्रवर्तन कार्यालय के बीच में कढ़ाई और सिलाई का कार्य विगत 40वर्षों से करते आ रहे हैं। भैरवदीन गुप्ता जहाँ अपनी दुकान किराये पर संचालित कर रहे थे, वहीं रमेश वाजपेयी अपनी एक दुकान 9 बाई 16 की बेंच रहे थे। इस बात की जानकारी बृजेश कुमार गुप्ता को जब हुई तो वह रमेश वाजपेयी से उसका बैनामा अपने पिता के हक में करा लिया और सरकारी अभिलेखों में उसका नामांतरण कराकर अपने पिता की किराये वाली दुकान उसमें शिफ्ट कर लिया। बस यही बात जनाब जावेद अहमद को अखर रही है कि उसका क्या होगा ? उसने जो भूमाफियाओं के पैसे एग्रीमेंट में लगवाएं हैं, उसका क्या होगा ? सभी साझीदारों को किस तरह लाभ दिया जाएगा ? जब मूल धन ही फंस गया हो

राम आसरे ने जावेद अहमद को किया है,एग्रीमेंट...
उक्त दुकान का बैनामा लेने से पहले देश, प्रदेश और जिले के किसी भी थाने में बृजेश कुमार गुप्ता पर कोई आपराधिक मुकदमा दर्ज नहीं था। उक्त दुकान का बैनामा दिनांक- 15/04/2019 को कराया गया, जबकि पीड़ित बृजेश के पिता की दुकान के बगल का 12 बाई 80 के मकान का एग्रीमेंट दिनांक-16/10/2017 को रमेश वाजपेयी से मान्यवर जावेद पुत्र मुंशी रजा निवासी-पतुलकी थाना-अंतु, जिला प्रतापगढ़ द्वारा कराया गया। इस तरह प्रार्थी और उसके पिता से मान्यवर जावेद अहमद उसी दुकान को अपना एग्रीमेंट का हिस्सा मानते हुए बृजेश और उसके पिता को पहले दुकान पर पहुँच कर अपने आधा दर्जन साथियों के साथ धमकी दिए तो बृजेश द्वारा कोतवाली नगर में मान्यवर जावेद अहमद के खिलाफ शिकायत की गई तो कोतवाली नगर में उसका NCR-0035/2020 दिनांक-16/02/2020 में दर्ज हुआ है। आज भी जावेद अहमद जो कुछ कर रहा है वह स्वयं के नाम से न करके अपनी टीम के सदस्यों के नाम से कर रहा है।इससे यह तय हो गया कि जावेद अहमद के पास एक गिरोह/गैंग है।

अकबर अली से जावेद अहमद ने लिया है,एग्रीमेंट...

एनसीआर दर्ज होने के बाद भी मान्यवर जावेद अहमद द्वारा लगातार बृजेश व उसके पिता को तरह-तरह की धमकी दी जाती रही कि दुकान खाली कर दो वरना तुम लोगों पर इतना फेंक मुकदमा लिखवा दूंगा कि पूरा जीवन जेल में कटेगा। मान्यवर जावेद अहमद की सभी धमकियां सच होती दिख रही हैं। उक्त दर्ज मुकदमा उसी धमकी वाले फेंक मुकदमा का एक पार्ट है। बृजेश व उसके पिता से मान्यवर जावेद अहमद जब बैनामा ली गई दुकान की कानूनी लड़ाई में फेल हो गए तो वह तरह-तरह का मिथ्या आरोप और कूटरचित दस्तावेज के आधार पर माननीय न्यायालय को गुमराह करके अब 156(3) CRPC के तहत फेंक घटना दिखाकर माननीय न्यायालय के जरिये मुकदमा पंजीकृत करने का आदेश कराकर प्रार्थी को हैरान व परेशान कर रहे हैं। अभी तक बृजेश कुमार गुप्ता की माने तो जनाब जावेद अहमद उसके विरुद्ध कुल तीन फेंक मुकदमा लिखा चुके हैं l ये मुकदमें जनाब जावेद अहमद का आदमी लिखवाता न कि जावेद अहमद। यानि वादी मुकदमा जनाब जावेद अहमद नहीं बनते। ताकि आरोपी यह न कह सके कि जनाब जावेद अहमद का उक्त दर्ज मुकदमें से कोई वास्ता व सरोकार है। हर शातिर अपराधी अपराध करते समय पर्याप्त सावधानी बरतता है,परन्तु कोई न कोई गलती कर देता है, जिससे पुलिस उसकी गर्दन दबोचने में पीछे नहीं रहती। जनाब जावेद अहमद का भी वही हाल है

बिला कब्ज़ा का एग्रीमेंट कराकर कब्जा करने पहुँच जाते हैं,जावेद अहमद...

कोतवाली नगर में दर्ज उक्त मुकदमें का बृजेश कुमार गुप्ता से कोई वास्ता व सरोकार ही नहीं है। बृजेश बहलफ़ इस बात को दावे से कह रहा है कि वह न तो शबनम को जानता है और न ही उनके पति प्रवीण कुमार उर्फ बबलू को ही जानता है और न ही कथित वादिनी मुकदमा शबनम के ममिया ससुर मृतक राम आसरे को ही जानता है। बृजेश सिर्फ इतना ही जानता है कि उक्त मुकदमा मान्यवर जावेद अहमद द्वारा कराया गया है। ताकि बृजेश थक हारकर मान्यवर जावेद अहमद से अपने पिता द्वारा क्रय की गई दुकान के विवाद का समझौता करने के लिए बाध्य हो। अब यह स्पष्ट करना आवश्यक हो गया है कि मान्यवर जावेद अहमद का इतिहास क्या है ? मान्यवर जावेद अहमद हरफन मौला किस्म का ब्यक्ति है और दिनभर सदर तहसील से लेकर कचेहरी के बीच घूमता टहलता रहता है। मान्यवर जावेद अहमद जमीन जायदाद को हड़पने के लिए तहसील के पीछे बने एक कमरें में अपना अड्डा बना रखा है, जिसमें राजस्व विभाग के कई लोग भी बैठते हैं।

शबनम ब्युटी पार्लर संचालिका द्वारा दाखिल वाद...

राजस्व विभाग के कर्मचारियों एवं अधिकारियों की सह पर मान्यवर जावेद अहमद शहर में एक रैकेट संचालित कर रहे हैं और वह स्वयं उसका मुखिया हैं।इस तरह मान्यवर जावेद अहमद एक भूमाफिया है और शहर की वेशकीमती भूमि और भवन को को विवादित कराकर उसका एग्रीमेंट अपने नाम कराकर उसे अच्छे दामों में बेंचना ही मुख्य ब्यवसाय है। इस कार्य में शबनम जो शहर में ब्युटी पार्लर संचालिका हैं और मान्यवर जावेद अहमद की मुख्य सहयोगी है। ऐसे ही एक वाद माननीय न्यायालय श्रीमान् विशेष सत्र न्यायाधीश एस सी/एस टी एक्ट प्रतापगढ़ के यहाँ मान्यवर जावेद अहमद द्वारा अपने एक खास आदमी दीपक सरोज निवासी परमनाथपुर थाना-अंतु जिला-प्रतापगढ़ द्वारा 156(3) CRPC के तहत दायर किया गया था, जिसमें वादी मुकदमा अपने दावे में स्वयं लिखा है कि मान्यवर जावेद अहमद जमीन का धंधा करता है और वह उससे काम के सिलसिले में जुड़ा रहता है।

दीपक सरोज का स्वीकार नामा कि शबनम और वह जावेद अहमद के लिए करते हैं,काम...

मुकदमें के दावे में ही यह भी कहा गया है कि शबनम ब्युटी पार्लर में वह कार्य करता है। बड़े आश्चर्यचकित करने वाले बात है कि एक लेडीज ब्युटी पार्लर में एक लड़का क्या काम करता होगा ? ये भी जाँच का विषय है कि लेडीज ब्युटी पार्लर में कोई भी जेंट्स किस तरह जुड़कर कार्य करता है ? मजेदार बात यह है कि दीपक द्वारा दायर वाद में इमरान उर्फ सोनू, बृजेश गुप्ता और रोहित पाल आरोपी हैं और शबनम द्वारा दायर वाद में भी यही इमरान उर्फ सोनू, बृजेश गुप्ता और रोहित पाल आरोपी हैं। ये महज इत्तेफ़ाक नहीं बल्कि एक षड़यंत्र के तहत मान्यवर जावेद अहमद की चाल है कि फेंक मुकदमों में फंसाकर जमीन और दुकान के विवाद में समझौता करने का यह एक कुचक्र है। बृजेश यह आरोप मान्यवर जावेद अहमद पर यूँ ही नहीं लगा रहा है, बल्कि उसके पास ठोस और प्रमाणिक अभिलेखीय साक्ष्य मौजूद है। सभी अभिलेखीय साक्ष्य शिकायती प्रार्थना पत्र के साथ संलग्न करके प्रधानमंत्री भारत सरकार, मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश सहित सिस्टम में बैठे सभी जिम्मेदारों को रजिस्टर्ड डाक से प्रेषित कर मामले की निष्पक्ष जाँच की माँग की है
न्यायालय ने खारिज किया दीपक के असत्य कथनों पर आधारित मुकदमा...

जब किसी मामले में अभिलेखीय साक्ष्य मौजूद हो तो शासन एवं प्रशासन को उसे प्राथमिकता के आधार पर देखने के बाद ही आरोपी पक्ष पर कार्यवाही करने के लिए आगे बढ़ना चाहिए। पीड़ित बृजेश का पहला प्रमाणिक साक्ष्य दीपक सरोज और शबनम द्वारा दायर वाद में तीन आरोपी का सेम होना। अब दूसरा सक्ष्य की बात पर आते हैं। तीनों आरोपित ब्यक्तियों इमरान उर्फ सोनू, बृजेश गुप्ता और रोहित पाल से मान्यवर जावेद अहमद का जमीन का विवाद होना है। तीनों आरोपियों से मान्यवर जावेद अहमद का जमीन का विवाद चल रहा है और दोनों मुकदमों में वादी मुकदमा मान्यवर जावेद अहमद के टीम के सदस्य है। जिसे वादी मुकदमा दीपक सरोज अपने दायर वाद में स्वयं लिखकर माना है। तीसरा अभिलेखीय साक्ष्य यह है कि मान्यवर जावेद अहमद से जुड़े लोग ही उक्त तीनों आरोपियों के विरुद्ध रची जा रही साजिश में कोई वादी मुकदमा है तो कोई लिए गए विवादित मकान के एग्रीमेंट में गवाह हैं।

इसी अभिलेखीय साक्ष्य को आधार बनाकर बृजेश कुमार गुप्ता सिस्टम में बैठे सभी जिम्मेदारों से शिकायती पत्र रजिस्टर्ड डाक द्वारा प्रेषित कर अपने साथ वर्ष-2019 से यानि क्रय की गई दुकान के बैनामा के बाद से ही ये सारे मिथ्या आरोप कूट रचित दस्तावेज के आधार पर एक षड़यंत्र के तहत किया जा रहा है,जिसके कर्ताधर्ता मान्यवर जावेद अहमद ही हैं। बृजेश व उसका पूरा परिवार शांति प्रिय ब्यक्तियों में से है। झगड़ा और लड़ाई में उसका विश्वास नहीं है। इस तरह एक शरीफ ब्यक्ति को एक भूमाफिया अपने निजी लाभ हेतु आपराधिक फेंक मुकदमों में फंसाकर हैरान व परेशान करे, यह कदापि उचित नहीं है। लिहाजा पीड़ित बृजेश ने अपने प्रकरण में मिथ्या आरोपित कथन के आधार दर्ज मुकदमें की विवेचना निष्पक्ष ढंग से करने हेतु विवेचनाधिकारी को निर्देशित करने की माँग की है। साथ ही मान्यवर जावेद अहमद के रैकेट में शामिल लोगों की भी जाँच करके इनके विरुद्ध विधिक कार्यवाही कराने की महती कृपा करें।

अपनी कही गई बात को साबित करने के लिए पीड़ित बृजेश कुमार गुप्ता ने शिकायती पत्र के साथ अभिलेखीय साक्ष्य के तौर पर वादी मुकदमा दीपक सरोज द्वारा दायर वाद की छायाप्रति संलग्नक किया है। जावेद द्वारा लिए गए तीनों एग्रीमेंट की छायाप्रति भी संलग्नक है। सबनम द्वारा दायर वाद की छायाप्रति और बृजेश गुप्ता और इमरान उर्फ सोनू के परिजनों द्वारा क्रय किये गए बैनामें एवं रोहित के नाम क्रय किया गये बैनामें की छायाप्रति पेश कर पीड़ित बृजेश ने जावेद अहमद के चेहरे से नकाब उतार कर असलियत सबके सामने लाने के लिए सोशल मीडिया का प्लेटफार्म चुना है। आशा ही नहीं बृजेश को पूर्ण विश्वास है कि इस असलियत को जानने को बाद जावेद अहमद का फरेबी चेहरा लोगों में पच नहीं सकेगा। साथ ही षड्यंत्रकारी और फरेबी जावेद अहमद के षड्यंत्र में आने से लोग बच सकेंगे। सरकार एंटी भूमाफिया का गठन उत्तर प्रदेश के प्रत्येक जनपदों में किया है,परन्तु जावेद अहमद जैसे लोगों पर कार्यवाही क्यों नहीं हो पाती ? यह समूचे सिस्टम के लिए बड़ा सवाल है।

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