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बुधवार, 10 फ़रवरी 2021

मुख्यमंत्री के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट में मची है लूट, प्रोजेक्ट मैनेजर पर सीमेंट बेंच लेने का लगा है,आरोप

मेडिकल कालेज से ट्रैक्टर पर निकली 150बोरी सीमेंट पुलिस कस्टडी में सिविल लाइन चौकी से मेडिकल कालेज पुनः हुई वापस...

सोशल मीडिया पर वायरल किया गया 150बोरी सीमेंट लदे ट्रैक्टर का गेटपास और कंस्ट्रक्शन कंपनी शिवांश इंफ्रास्ट्रक्चर के प्रोजेक्ट मैनेजर सहित कार्यदायी संस्था राजकीय निर्माण निगम के जेई का पत्र...


बिना गेट पास लिए निर्माणाधीन मेडिकल कालेज से 150बोरी सीमेंट लादकर निकलता ट्रैक्टर... 

प्रतापगढ़। मुख्यमंत्री के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट में लूट मची है
 पाँच वर्ष पहले प्रतापगढ़ जनपद के लिए मेडिकल कालेज पास हुआ था एक जगह पर पूरी जमीन न मिलने की दशा में जिला अस्पताल पुरुष और महिला को एक करके प्रयागराज में स्वरूप रानी हॉस्पिटल और मोती लाल नेहरु मेडिकल कालेज की तरह प्रतापगढ़ में भी संचालित होगा मेडिकल कालेज गायघाट रोड़ पर स्थित पूरे केशवराय में पढ़ाई और आवास की ब्यवस्था होगी और जिला अस्पताल में इलाज संचालित होगा जिला अस्पताल में बहुत दबाव के बाद CMO डॉ अरविन्द कुमार श्रीवास्तव का चहेता ठेकेदार बिल्डिंग्स को ध्वस्त करने की दिशा में कार्य करना शुरू किया। जिला अस्पताल में बिल्डिंग से निकलने वाले ईंट और सरिया सहित फर्नीचर एवं मलवे को बेंचने ले साथ ही साथ मिट्टी को भी बेंचने लगा था। अभी उसका प्रकरण खत्म नहीं हुआ कि पूरे केशवराय में मेडिकल कालेज की बन रही बिल्डिंग से सीमेंट बेंचने का मामला प्रकाश में आया है

पूरे केशवराय में निर्मणाधीन मेडिकल कालेज... 
सूबे के मुखिया योगी आदित्य नाथ जी कहते हैं भ्रष्टाचार को उनकी सरकार ने उखाड़ फेंका है और प्रतापगढ़ में उनके ड्रीम प्रोजेक्ट निर्माणाधीन मेडिकल कालेज में खुलेआम सीमेंट की कालाबाजारी की जा रही है। निर्माण की सामग्रियां बेंची जा रही हैं। यदि सीमेंट जो निर्माण कार्य को मजबूती प्रदान करता है और उसी सीमेंट को बेंच खाया जाए तो कैसे बनेगा मानक के अनुरूप मेडिकल कालेज। दो दिन पहले मेडिकल कालेज से सीमेंट लादकर निकले ट्रैक्टर को जिस पुलिस ने कब्जे में लिया था, वही पुलिस 24 घंटे की महापंचायत के बाद उसे छोड़ दिया और वह वापस निर्माणाधीन मेडिकल कालेज पूरे केशवराय के कैम्पस में सुरक्षित पहुँच गई। पुलिस भी सोची होगी कि जब जिला प्रशासन की तरफ से कोई आगे नहीं आ रहा है तो वह अनायास मुशीबत का बोझ अपने सिर पर क्यों उठाये...??? 

 

गायघाट रोड़ स्थित पूरे केशवराय में निर्माणाधीन मेडिकल कालेज के सम्बन्ध में सदर विधायक राज कुमार पाल पहले ही मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ जी से मिलकर मेडिकल कालेज के निर्माण में इस्तेमाल हो रहे मटेरियल पर सवाल उठाये थे और उसकी गुणवत्ता और उसके मानक पर सवाल उठाते हुए शिकायत भी की थी। अभी उसकी जाँच चल ही रही थी कि निर्माणाधीन मेडिकल कालेज में इस्तेमाल की जानेवाली सीमेंट की कालाबाजारी करने की बात सामने आई इतने बड़े प्रोजेक्ट में इस कदर लूट खसोट और भ्रष्टाचार की बात सामने आने से समूचे सिस्टम पर सवाल खड़े होते हैं जबकि अभी कुछ ही दिन पहले श्मशान घाट पर बनी छत गिर जाने से कई लोगों की जान चली गई थी और योगी सरकार की भी बहुत फजीहत हुई थी। हालांकि सरकार ने कार्यवाही करके मामले को किसी तरह मैनेज किया इतने के बावजूद यदि मेडिकल कालेज में खुलेआम सीमेंट की कालाबाजारी का मामला प्रकाश में आता है तो योगी सरकार और समूचे तंत्र पर आँच आने से कोई रोक नहीं सकता


LICदफ्तर के पास पुलिस ने रोका था,150बोरी लदे ट्रैक्टर और उसके चालक को... 

सोशल मीडिया में खबर चलते ही मेडिकल कालेज के निर्माण कार्य करा रही कार्यदायी संस्था राजकीय निर्माण निगम के जेई का पत्र सामने आया और बचाव में तर्क दिया गया कि जो 150बोरी सीमेंट ट्रैक्टर पर लोड़ होकर पूरे केशवराय से निकला उसका बकायदे गेट पास जारी किया गया था। वह जिला अस्पताल के लिए भेजा गया था जो चालक की नासमझी से जिला अस्पताल की तरफ न जाकर कम्पनी बाग से मीरा भवन के तरफ मुड़ गया और पुलिस द्वारा उसे रोक लिया गया। ऐसा ही पत्र  कंस्ट्रक्शन कंपनी शिवांश इंफ्रास्ट्रक्चर के प्रोजेक्ट मैनेजर की तरफ से जारी किया गया और सोशल मीडिया पर प्रभारी जिला सूचना अधिकारी विजय कुमार शुक्ल द्वारा पोस्ट कर डैमेज कंट्रोल करने का प्रयास किया गया। सवाल यह नहीं कि सीमेंट पूरे केशवराय से जिला अस्पताल भेजा गया कि जानबूझकर ट्रैक्टर चालक के मुताविक महकनी भेजा गया सवाल तो यह बनता है कि झूठ कौन बोल रहा है, ट्रैक्टर चालक या सिस्टम से जुड़े वो लोग जो सीमेंट की कालाबाजारी कराने का कुचक्र रचे थे ? जाँच का विषय यह है न कि सम्पूर्ण मामले में लीपापोती करके सीमेंट की कालाबाजारी करने वालों की मदद कर उनके कुकृत्यों को आगे जारी रखने में मदद करना है

पुलिस द्वारा पकड़े जाने के बाद जिला अस्पताल प्रतापगढ़ के लिए बाद में काटा गया गेट पास...

पूरी घटनाक्रम का सबसे रोचक और मजेदार पहलू यह रहा कि जो सीमेंट पूरे केशवराय निर्माणाधीन मेडिकल कालेज से कालाबाजारी के लिए बिना गेट पास काटे ट्रैक्टर से लोड़कर महकनी के लिए भेजी गई और LIC दफ्तर के पास पुलिस द्वारा पकड़ी गई जिसके बाद कंस्ट्रक्शन कंपनी शिवांश इंफ्रास्ट्रक्चर के प्रोजेक्ट मैनेजर और कार्यदायी संस्था राजकीय निर्माण निगम के जेई का पैरों तले जमीन खिसक गई। आनन्-फानन में गेट पास इश्यु किया गया और प्रभारी जिला सूचना अधिकारी विजय कुमार शुक्ल जी का सहारा लेकर सीमेंट की कालाबाजारी का खंडन करके डैमेज कंट्रोल का प्रयास किया गया। हालांकि व्हाट्सऐप ग्रुपों पर लोग सवाल खड़ा कर रहे थे कि जब ट्रैक्टर चालक को पुलिस ने पकड़ा था तो उसके पास गेट पास नहीं था और वह पुलिस को गेट पास दिखा न सका था। गेट पास तो बाद में बचाव में काटा गया। रात भर पुलिस और कंस्ट्रक्शन कंपनी शिवांश इंफ्रास्ट्रक्चर के बीच घनचक्कर मचा रहा और कल यानि घटना के दूसरे दिन 150बोरी सीमेंट पुनः वापस पूरे केशवराय ट्रैक्टर सहित वापस भेजा गया

डैमेज कंट्रोल के लिए सोशल मीडिया में पोस्ट कराया गया पत्र...

अब असल मुद्दे पर आते हैं। चलिए एक बार यदि कंस्ट्रक्शन कंपनी शिवांश इंफ्रास्ट्रक्चर और कार्यदायी संस्था राजकीय निर्माण निगम के पदाधिकारियों की मान लेते हैं कि 150बोरी सीमेंट जो ट्रैक्टर से लोड़ होकर पूरे केशवराय से निकला वह जिला अस्पताल प्रतापगढ़ के लिए था और उसका गेट पास भी इश्यु था जो ट्रैक्टर चालक भूल वश वहीं छोड़ दिया, जिससे ये समस्या उत्पन्न हुई। थोड़ी देर के लिए ये भी बात सही मान ली जाए तो जो 150बोरी सीमेंट जिला अस्पताल के लिए भेजा गया वह अचानक फिर पूरे केशवराय जहाँ से चला था, वहाँ वापस क्यों चला गया ? इस घटनाक्रम ने सिद्ध कर दिया कि 150सीमेंट की कालाबाजारी की पोल जब खुल गई तो मेडिकल कालेज निर्माण कार्य से जुड़े लोग किसी तरह से मामले को मैनेज किये और अपने कुकर्मों पर पर्दा डालने का प्रयास किये परन्तु वह पर्दा भी उनके कुकृत्यों को ढ़ाक न सका यदि वह सीमेंट पूरे केशवराय वापस न जाती और जिला अस्पताल में ही जाकर उतरती तो लोगों को भरोसा दिलाया जाता कि ट्रैक्टर चालक की गलती से ये सब हुआ। परन्तु सौ झूठ बोलकर सत्य का गला दबाया नहीं जा सकता और उसे मारा नहीं जा सकता। वह आखिरी दम तक मुंह फाड़कर खड़ा रहेगा कि हकीकत यह है वो तो झूठ था 


                               ट्रैक्टर चालक का बयान से स्पष्ट हो रहा है कि दाल में कुछ काला जरुर है...


बड़ा और अहम सवाल है कि जब जिला अस्पताल परिसर में निर्माण कार्य चल कराया नहीं जा रहा है तो आखिर जिला अस्पताल क्यों भेजी गई सीमेंट ? निर्माण सामग्री में सीमेंट को डम्प भी नहीं किया जा सकता क्योंकि सीमेंट रखने पर ख़राब हो जाती है वह रखे-रखे बोरी में पत्थर बन जाती है जिला अस्पताल में तो अभी नींव की खुदाई भी नहीं हुई बल्कि अभी भी बिल्डिंग्स के ध्वस्तीकरण का ही कार्य चल रहा है ट्रैक्टर ड्राइवर साफ-साफ बता रहा था कि प्रोजेक्ट मैनेजर के ड्राइवर रामआसरे के महकनी में बन रहे घर पर सीमेंट उतारा जाएगा। ये सीमेंट पूरे केशवराय मेडिकल कालेज निर्माण स्थल के गोदाम से लोड़ हुई है और राम आसरे के घर महकनी के लिए भेजी गई है। सवाल उठता है कि क्या ऐसे ही मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट मेडिकल कालेज प्रतापगढ़ की बिल्डिंग को कार्यदायी संस्था राजकीय निर्माण निगम और कंस्ट्रक्शन कंपनी शिवांश इंफ्रास्ट्रक्चर सीमेंट की कालाबाजारी करके मुनाफा कमायेंगे और भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ाकर अन्य बिल्डिंग की तरह मेडिकल कालेज की बिल्डिंग की सामग्री को बेंचकर इस बिल्डिंग के निर्धारित मानक को दरकिनार कर इसे भी भविष्य में गिराने का कुचक्र रच रहे हैं ?  


                             सीमेंट की कालाबाजारी का प्रकरण दो दूना चार की तरफ साफ हो गया...

प्रतापगढ़ में एक से बढ़कर एक जनप्रतिनिधि हैं। कोई जननायक है तो कोई भगवान समान ! फिर भी मुख्यमंत्री की ड्रीम प्रोजेक्ट मेडिकल कालेज के प्रति सदर विधायक राजकुमार पाल को छोड़कर अन्य जनप्रतिनिधि अपना मुंह मोड़ लिए हैं। क्या निर्माणाधीन मेडिकल कालेज में पट्टी, रानीगंज, विश्वनाथगंज, रामपुरखास, बाबागंज (बिहार) एवं कुंडा क्षेत्र की जनता अपना इलाज नहीं करायेगी ? जबकि प्रतापगढ़ के पूर्व सांसद कुंवर हरिवंश सिंह मेडिकल कालेज निर्माण के प्रति काफी सजग रहते थे,परन्तु वर्तमान सांसद संगम लाल गुप्ता वहीं मेडिकल कालेज के निर्माण के प्रति उदासीन रहते हैं जनपद प्रतापगढ़ के दो पैरासूट कैबिनेट मंत्रियों से प्रतापगढ़ के मेडिकल कालेज से कोई वास्ता व सरोकार ही नहीं है सिर्फ सदर विधायक राजकुमार पाल सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से ब्यक्तिगत मिलकर निर्माणाधीन मेडिकल कालेज के निर्माण में घटिया सामग्री (मटेरियल) के इस्तेमाल की शिकायत किये हैं जिले के मेडिकल कालेज के निर्माण कार्य के प्रति आखिर कब जागेंगे जिम्मेदार और कब होगी कार्यवाई जिससे गुडवत्ता न हो प्रभावित ?

गुणवत्ता और मानक के विरुद्ध विधायक सदर राजकुमार ने CMयोगी से कर रखी है,शिकायत... 

स्थानीय पुलिस भी 150 बोरी सीमेंट छोड़ देने में अपनी भलाई समझी। जबकि पुलिस की पूंछतांछ पर ट्रैक्टर चालक ने बताया था कि ट्रैक्टर पर लदी 150 बोरी सीमेंट निर्माणाधीन मेडिकल कालेज पूरे केशवराय से राम आसरे का घर बनाने को महकनी जा रही है। नगर कोतवाली के एलआईसी दफ्तर के पास से पुलिस ने ट्रैक्टर को लिया कब्जे में लिया था। सिविललाइन पुलिस चौकी पर हुई महापंचायत के बाद पुलिस ने सीमेंट को छोड़ दिया। अब पूरे घटनाक्रम में पुलिस ने कंस्ट्रक्शन कंपनी शिवांश इंफ्रास्ट्रक्चर से फीलगुड किया या नहीं, कह पाना मुश्किल होगा ! परन्तु पूरे घटनाक्रम को समझने के बाद इस बात का एहसास जरुर हुआ कि महकनी निवासी राम आसरे के निर्माणाधीन मकान में कहीं इसके पहले भी तो पूरे केशवराय में निर्माणाधीन मेडिकल कालेज से सीमेंट सहित अन्य सामग्री की खेप तो नहीं गई थी ! क्योंकि पुलिस किसी ट्रैक्टर पर लदी सीमेंट को क्यों रोकेगा ? पूरे केशवराय निर्माणाधीन मेडिकल कालेज स्थल से जब ट्रैक्टर सीमेंट लोड़ करके चला तभी से उसका कोई वीडियो बनाता गया जो बाद में सोशल मीडिया में वायरल किया गया। इससे साबित होता है कि राम आसरे का कोई विरोधी निर्माणाधीन मेडिकल कालेज से ही उसका पीछा कर लिया था और वही ब्यक्ति पुलिस और मीडिया को भी इसकी सटीक मुखबिरी की है साथ ही उस विरोधी और उसकी टीम द्वारा पुलिस और मीडिया को मैनेज करने की बात भी से इंकार नहीं किया सकता

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