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रविवार, 14 अगस्त 2016

शिवपाल सिंह ने दिया मंत्री पद छोड़ने की धमकी

प्रापर्टी का धंधा कर रहे हैं,पार्टी के कई नेता- मुलायम सिंह
चाचा शिवपाल और भतीजे अखिलेश में चल रही थी,टसन....!!!
अति महत्वाकांक्षा के लिए चल रहा है मुलायम के परिवार में संग्राम...!!!

सूबे के मुखिया अखिलेश और सपा मुखिया मुलायम... 
सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह के अनुज शिवपाल सिंह के रिश्ते सूबे के मुखिया अखिलेश यादव जो उनके भतीजे भी हैं,से इन दिनों सामान्य नहीं हैं। मुलायम के कहने से शिवपाल ने पूर्वांचल के माफिया मुख्तार की पार्टी का विलय सपा में कराया तो प्रदेश अध्यक्ष व सूबे के मुखिया अखिलेश की नाराजगी इस कदर बढ़ी कि वो मुख्यमन्त्री पद से इस्तीफ़ा तक देने की बात कह डाली।पार्टी में डैमेज कंट्रोल शुरू हुआ और कमान खुद राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह ने संभाली। मुलायम के परिवार की रार में सबसे पहले अखिलेश का शिकार उनके मंत्रिमण्डल का मंत्री बलराम यादव हुआ, जो मुलायम सिंह के अति करीबी रहे। इसके बाद भी बलराम यादव को मन्त्रिमण्डल से हाथ धोना पड़ा। वो मुलायम के पास जाकर करफूट-फूट कर रोए भी थे।

छिपाए नहीं छिप रहा कैबिनेट मंत्री शिवपाल का दर्द...
मुलायम ने अखिलेश की नाराजगी दूर करने के लिए अपने अनुज शिवपाल और बर्खास्त मंत्री बलराम यादव को 5-कालिदास मार्ग, मुख्यमन्त्री आवास रवाना किया। नाराज अखिलेश को मनाया गया। मुख़्तार की पार्टी कौमी एकता का विलय कैंसिल हुआ। मुख्तार को विना मुख्यमन्त्री की इजाजत से लखनऊ जेल सिफ्ट किया गया था, उस आदेश को वापस लिया गया। तब कहीं जाकर अखिलेश का रौद्र रूप शांत हुआ। अखिलेश तो मान गए, परन्तु अनुज शिवपाल सिंह नाराज होकर सैफई चले गए। मंत्रिमंडल विस्तार में शिवपाल सिंह सरीक नहीं हुए। मंत्रिमण्डल विस्तार में बर्खास्त हुए मंत्री बलराम यादव की वापसी तो हो गई, परन्तु परिवार में फूट का बीजारोपण हो गया। ये कोई पहला मौका नहीं था कि अखिलेश और चाचा शिवपाल में अनबन हुआ था। इसके पहले भी कई बार सत्ता का टकराव जगजाहिर हुआ। मथुरा के जवाहर बाग़ में राम बृक्ष यादव द्वारा जिस तरह से कानून ब्यवस्था की धज्जियाँ उड़ाकर अखिलेश सरकार को मुश्किल में डाला गया और राम बृक्ष यादव के सम्बन्ध चाचा शिवपाल सिंह से होने का मामला मीडिया में उछला था, उससे भी अखिलेश सरकार पानी-पानी हुई थी।

मुश्किल में मुलायम...
देश के 70 वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर शिवपाल सिंह ने मंत्री पद तक छोड़ देने की धमकी देकर सपा में मुलायम सिंह की धड़कने बढ़ा दिया। कलह परिवार में बढ़ रही है और पार्टी मुखिया पार्टी के नेताओं को बदनाम करके डैमेज कंट्रोल में जुटे हैं। प्रापर्टी का धंधा मुलायम सिंह का परिवार करता है और नसीहत मुलायम सिंह पार्टी कार्यकर्ताओं को देते हैं। गजब का तमाशा समाजवादी कुनबे में मचा हुआ है। इसके पहले भी मुलायम सिंह यादव ने मंत्रियों/विधायकों/संगठन के पदाधिकारियों सहित सपा से जुड़े सभी कार्यकर्ताओं को नसीहत की घुट्टी पिलाते हुए आगामी चुनाव में जुट जाने की बात कही थी। पार्टी में चापलूसों और चाटुकारों की संख्या अधिक हो गई है। पार्टी से जुड़े लोग पार्टी के नाम पर अपनी दुकान चला रहे हैं। ये सारे बयान एक मझे नेता के नहीं हो सकते। जबकि मुलायम सिंह के मझे नेता के रूप में जाने जाते हैं। आखिर बार - बार ऐसा बयान देकर मुलायम सिंह पार्टी की ही तो भद्द पिटवा रहे हैं। क्यों नहीं कार्यवाही करते...? ये तो विरोधी पार्टी के नेताओं का बयान होता है जो मुलायम सिंह अपनी पार्टी के विरुद्ध स्वयं दे रहे हैं।

मुलायम की चिंता ये बता रही है कि सैफई की स्थिति नेपाल के राजा की तरह न हो जाए। मुलायम ने इसीलिये कहा कि शिवपाल मंत्रिमण्डल से हटे तो असहज हो जायेगी सरकार। परिवार में फूट न पड़े, इसलिए इटावा में शिवपाल के बयान के बाद फ़ौरन मुलायम सिंह ने पार्टी के नेताओं और सरकार के मंत्रियों को खूब खरी खोटी सुनाई। निशाना अखिलेश मंत्रिमण्डल पर था। शिवपाल हटे तो सबकुछ बिखर जाएगा। आधा मेरे साथ जायेंगें तो आधे शिवपाल के साथ। शिवपाल के साथ साजिश हो रही है। शिवपाल की बात अधिकारी नहीं सुन रहे l आखिर ये सब कौन कर रहा है....? पूरे प्रकरण को समझने के बाद सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह की बातों का अर्थ निकला जाए तो वो सीधी बात न कर दूर से अखिलेश को नसीहत देने का प्रयास करते नजर आ रहे हैं l सूत्रों के हवाले से खबर आ रही है कि शिवपाल सिंह को मनाने के लिए मुलायम सिंह इस बार स्वयं माफिया मुख्तार अंसारी की पार्टी कौमी एकता के विलय की घोषणा कर सकते हैं l इसके लिए मुख्तार अंसारी के भाई अफजाल अंसारी से मुलायम सिंह की बात भी हो चुकी है l

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