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मंगलवार, 16 फ़रवरी 2021

प्रतापगढ़ पुलिस द्वारा एक पक्षीय कार्यवाही की दास्तान सुन कैबिनेट मंत्री मोती सिंह की चढ़ी भृकुटी,पुलिस अधीक्षक को फोन से दिया निष्पक्ष कार्यवाही का आदेश

मदाफरपुर प्रकरण की सच्चाई जान पुलिस की कार्यप्रणाली से नाराज हुए कैबिनेट मंत्री मोती सिंह...

पुलिस जब पिटती है तो उसे अपनी चोट तो याद आती है,परन्तु वही पुलिस जब अनायास आमजनता को जानवरों जैसे पीटती है तो लेशमात्र पछतावा भी नहीं होता...

कैबिनेट मंत्री मोती सिंह से मिलकर अपनी फरियाद बताती मदाफरपुर की पीड़ित महिलाएं...

प्रतापगढ़। कोहड़ौर थाने में तैनात सिपाहियों द्वारा जिस तरह से देर शाम मदाफरपुर बाजार में एक ब्यवसायी के घर में घुसकर पहले महिला से छेड़छाड़ करने का प्रयास किया गया और पति द्वारा विरोध करने पर उसकी पिटाई की गई और हल्ला गुहार पर पहुँची भीड़ ने दोनों सिपाहियों की मेहमाननवाजी की गई तो उसमें एक सिपाही मौका पाकर भाग निकला था और दूसरा सिपाही भीड़ के समक्ष स्वयं कबूल कर रहा था कि वह "शराब पीता है तो अपने पैसे की पीता है !" जिसका वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हुआ,परन्तु पुलिस के आलाधिकारियों ने उसे नजरंदाज कर दिया और एकतरफा कार्यवाही कर पुलिस विभाग की इज्जत बचाने का भरपूर प्रयास किया।  


उक्त घटना की सूचना पुलिस के आलाधिकारियों को हुई तो आनन-फानन में भारी फ़ोर्स के साथ मदाफरपुर बाजार में पुलिस ने जमकर तांडव मचाया। अपने सिपाहियों का जिला अस्पताल लाकर मेडिकल भी कराया था।अपर पुलिस अधीक्षक पूर्वी द्वारा अपने पुलिस के जवानों का भरपूर बचाव भी किया गया। वो तो दोपहर होते -होते भीड़ के बीच सिपाही का एक वीडियों सोशल मीडिया पर वायरल होने लगा कि सिपाही स्वयं कबूल कर रहा है कि वह शराब पीता है और अपने पैसे की पीता है। भीड़ में किसी ने सिपाही के कबूलनामे का वीडियो बनाया और इसे सोशल मीडिया में वायरल कर दिया इस वीडियों ने पुलिस की बची खुची इज्जत भी मिट्टी में मिला दिया। 


मामला मीडिया में उछला तो पुलिस ने बड़ी चालाकी से अपने पालतू कुछ पत्रकारों को अपने बचाव में मोर्चा सँभालने के लिए लगा दिया। कुछ पत्रकार इलाकाई रहे तो कुछ पुलिस के आगे पीछे दिन भर उनकी चाटुकारिता में अपनी पत्रकारिता का दंभ भरने वाले थे पत्रकारों में भी खबर को लेकर मतभेद हुआ और कुछ पुलिस की भीड़ द्वारा पिटाई को गलत बताने का प्रयास किया तो कुछ पुलिस द्वारा किसी के घर में घुसकर छेड़खानी और मारपीट को गलत बताया। घटना दोनों ही गलत थी। चाहे वह भीड़ द्वारा पुलिस की पिटाई का रहा हो अथवा शराब के नशे में धुत होकर किसी के घर में घुसकर महिला के साथ छेड़छाड़ करना और पति के विरोध करने पर उसकी पिटाई का रहा हो। नैसर्गिक न्याय की ब्यवस्था सभी को समान रूप से है। 

अपने गृह जनपद प्रतापगढ़ में निजी आयोजन में शामिल हुए कैबिनेट मंत्री मोती सिंह... 

सबसे मजेदार बात यह रही कि पुलिस अधीक्षक शिव हरी मीणा द्वारा पहले जाँच अपर पुलिस अधीक्षक सुरेन्द्र प्रसाद द्विवेदी से कराई गई। क्योंकि उनके क्षेत्र का मामला था। बाद में पुलिस के सिपाही का आडियो आने के बाद और कई वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हुए तो शाम तक पुलिस अपनी फजीहत करने से बचने के लिए अपर पुलिस अधीक्षक पश्चिमी दिनेश द्विवेदी और सीओ सदर से जाँच करने के लिए संयुक्त टीम गठित कर दी और तीन दिन के अंदर समय निर्धारित करते हुए जाँच रिपोर्ट सौंपने की जिम्मेदारी दी। डैमेज कंट्रोल की माहिर पुलिस इस बीच भीड़ से पिटे सिपाहियों की तहरीर पर मदाफरपुर बाजार के दर्जनों लोगों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा लिखकर उसमें कई लोगों की गिरफ्तारी कर जेल भी भेज दिया और बाकी लोगों की तलाश भी जारी रहीभीड़ में पुलिस की पिटाई करने वाले पुरुष घर छोड़कर फरार हो गए। निर्धारित तीन दिवस भीतर पुलिस ने पूरा मामला अपने पक्ष में कर लिया। 


जाँच रिपोर्ट में पुलिस ने मीडिया को बताया कि सिपाहियों का मेडिकल CHC कोहड़ौर में कराया गया था, जहाँ से मेडिकल रिपोर्ट में बताया गया कि पुलिस के सिपाहियों के शरीर में एल्कोहल की मात्रा नहीं थी। अब ये रिपोर्ट पुलिस के दबाव में CHC कोहड़ौर के चिकित्सकों द्वारा दिया गया कि वास्तव में सिपाहियों के शरीर में एल्कोहल की मात्रा नहीं थी। परन्तु मदाफरपुर बाजार में एकत्र हुए लोगों द्वारा दावा किया गया था कि सिपाही शराब के नशे में थे। सब बात जाने दीजिये जब पुलिस का सिपाही स्वयं कबूल रहा है कि वह शराब पीता है और अपने पैसे की पीता है तो मेडिकल रिपोर्ट की बात हजम नहीं होती। जैसे आम आदमी को यदि तर्जनी अंगुली में गोली लग जाए तो उसका इलाज जिला अस्पताल प्रतापगढ़ में संभव नहीं होता और उसे बिना देर किये प्रयागराज SRN में रेफर कर दिया जाता है,परन्तु पुलिस द्वारा की जाने वाली मुठभेड़ में अपराधियों को जो गोली घुटने के नीचे नहीं लगती है और पुलिस के हाथों की कलाइयों में लगती है उसका सफल इलाज जिला अस्पताल में हो जाता है। उसे प्रयागराज SRN रेफर नहीं किया जाता। 


यह एक बड़ा यक्ष प्रश्न है जो आज तक न पुलिस दे सकी और न तो प्रतापगढ़ के जिला चिकित्सालय के चिकित्सक ही दे सके। बात यहीं खत्म नहीं होती। मदाफरपुर बाजार में घटित घटना के बाद सिपाहियों का इलाज CHC कोहड़ौर में हुआ था और चोट भी मामूली ही थी। सिर्फ घुटने के नीचे चोट के निशान थे। परन्तु मुकदमा जानलेवा हमले के तहत IPC की धारा-308 में दर्ज किया गया। यही चोट यदि आम आदमी को लगती तो उसका मुकदमा नहीं, बल्कि एनसीआर दर्ज कर मामले को यही पुलिस खत्म कर देती। परन्तु मामला जब पुलिस का हो तो मामूली चोट के आधार पर गम्भीर धारा में मुकदमा लिख लेना और ताबड़तोड़ गिरफ्तारी कर आरोपियों को जेल में ठूस देना ही पुलिस की कार्यप्रणाली पर संदेह उत्पन्न करता है। वैसे CHC कोहड़ौर में पुलिस के सिपाहियों की मेडिकल जाँच रिपोर्ट पर आम जनता को भरोसा नहीं हो रहा है। क्योंकि सिपाही वीडियो में स्वयं कबूल रहा है कि वह शराब पीता है और अपने पैसे की पीता है। इसलिए संदेह होना लाजिमी है। 


पीड़िता द्वारा ये प्रकरण जब कैबिनेट मंत्री मोती सिंह के सामने लाया गया तो पुलिस द्वारा की गई बर्बरता की दास्तां सुनने पर काबीना मंत्री मोती सिंह की भृगुटी तन गई और उन्होंने फोन पर एसपी शिव हरी मीणा को दोषी पुलिस कर्मियों के विरुद्ध कार्यवाही के निर्देश दिए। मंत्री मोती सिंह मंगलवार को भाजपा नेता शिवशंकर सिंह के बेटे हर्षित सिंह के वर-इच्छा कार्यक्रम में आये थे। इस बीच मदाफरपुर बाजार निवासी रमेश तिवारी के घर की महिलाएं वहा आयी और फूट-फूट कर रोते हुए पुलिस की बर्बरता की दास्तां उन्हें बताने लगी। महिलाओ ने मंत्री को कई वीडियो और फोटोज दिखाई, जिस पर उनकी भृगुटी तन गयी। मंत्री ने फोन पर एसपी से दोषियो के विरुद्ध तत्काल कार्यवाही के निर्देश दिए। इस दौरान सदर विधायक राजकुमार पाल, रानीगंज विधायक धीरज ओझा के अलावा पूर्व विधायक हरिप्रताप सिंह, भाजपा नेता शिव प्रकाश मिश्र सेनानी, कुंवर भुवन्यू सिंह, भाजपा जिलाध्यक्ष हरिओम मिश्र, धर्माचार्य ओम प्रकाश पांडेय, पूर्व सभासद संतोष दुबे, जलशक्ति मंत्री डॉ महेंद्र सिंह के प्रतिनिधि दिनेश शर्मा सहित तमाम गणमान्य लोग मौजूद रहे।

1 टिप्पणी:

  1. रमेश जी यहां दोहरी व्यवस्था चल रही है। अभी निकट भविष्य में सुधार होने की कोई उम्मीद नहीं दिख रही है।

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