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बुधवार, 3 फ़रवरी 2021

डॉ नितिन बंसल जिलाधिकारी प्रतापगढ़ को जनपद सुधारने में लगेगा अभी और समय

प्रत्येक जिले में एक जिलाधिकारी की तैनाती शासन द्वारा की जाती है और जिले की पूरी कमान उसके हाथों में सौंप डी जाती है उत्तर प्रदेश में कुल 75 जनपद हैं और प्रत्येक जनपद में एक जिलाधिकारी की तैनैती है । जिला चाहे छोटा हो या बड़ा पुलिस विभाग की तरह एसपी और एसएसपी की तैनाती जैसी ब्यवस्था नहीं है । छोटे से छोटे जिलों में भी एक आई ए एस ही जिलाधिकारी के लिए तैनात किया जाता है शासन ने प्रत्येक जिले में कलेक्ट्रेट की स्थापना के साथ जिलाधिकारी आवास और उसी आवास में कैम्प कार्यालय की स्थापना कर जिलाधिकारी से जिले की सारी ब्यवस्था की जानकारी और उस जानकारी की मॉनिटरिंग शासन करता है मॉनिटरिंग के लिए प्रत्येक जिले में एक NIC की स्थापना कराई गई है, ताकि वहाँ से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये बेहतर से बेहतर निगरानी की जा सके...

डॉ नितिन बंसल जिलाधिकारी प्रतापगढ़...

प्रतापगढ़ में जिलाधिकारी के रूप में तैनात डॉ नितिन बंसल जी को प्रतापगढ़ जनपद को सुधारने में अभी और वक्त लगेगा। क्योंकि कैम्प कार्यालय से लेकर कलेक्ट्रेट में तैनात सब-ऑर्डिनेट दिन भर पिचाल करते हैं। एक दूसरे की नस काटने में ब्यस्त रहते हैं। कामचोरी उनके ब्लड के साथ संचार होता रहता है। जिलाधिकारी के अधीनस्थ कर्मचारीगण हाकिम का कान भरने में माहिर हैं। सबसे अधिक खुरापात स्टेनो पद पाने के लिए जिलाधिकारी कैम्प कार्यालय से लेकर कलेक्ट्रेट परिसर तक कसरत होती रहती है कलेक्ट्रेट परिसर एवं कैम्प कार्यालय पर बने दर्जनों पटल पर पटल प्रभारियों का अकाल पड़ चुका है। प्रत्येक माह और साल में कई पटल प्रभारी अर्थात बाबू यानि लिपिक रिटायर्ड हो जाते हैं। तहसील मुख्यालयों पर भी अधीनस्थ कर्मचारियों की तादात में भारी कमी है। एक पटल प्रभारी के पास 3 से 4 पटल का ओवरडोज वर्क रहता है। निजी स्रोतों से कर्मचारी रखकर कार्य कराया जा रहा है। सवाल उठता है कि एक अधीनस्थ कर्मचारी 3 से 4 पटल का प्रभार कैसे संभालेगा ? साथ ही प्राईवेट कर्मचारी जिनसे अधीनस्थों द्वारा कार्य लिया जा रहा है, उनके कार्य में गड़बड़ी होने पर उनकी जिम्मेदारी कौन लेगा...???

तत्कालीन जिलाधिकारी मार्कण्डेय शाही के जाने के बाद प्रतापगढ़ में डॉ रुपेश कुमार को जिलाधिकारी बनाकर भेजा गया। परन्तु डॉ रूपेश कुमार से प्रतापगढ़ चल न सका और उनके स्थान पर वर्ष-2009बैच के युवा आईएएस डॉ. नितिन बंसल को प्रतापगढ़ का डीएम बनाया गया, इससे पहले वह गोंडा के जिलाधिकारी रहे। गोंडा में जिलाधिकारी रहते गोंडा को सुधारने में डॉ नितिन बंसल की महती भूमिका रहीभटिंडा पंजाब के मूल निवासी डॉ. बंसल एमबीबीएस की पढ़ाई करने के बाद सिविल सर्विस में आए। मुख्यमंत्री के गृह जनपद गोरखपुर में करीब दो वर्ष के प्रशिक्षण के बाद कानपुर नगर के संयुक्त मजिस्ट्रेट बने। इसके बाद प्रयागराज के मुख्य विकास अधिकारी का कार्यभार संभाला। सपा सरकार में कानपुर देहात फिर का इटावा और मथुरा के डीएम भी रहे। इसी बीच उन्हें विशेष सचिव सिंचाई एवं मिशन निदेशक, राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन में भी काम करने का अवसर मिला। 29 जून, 2017 से वह प्रधानमंत्री के निर्वाचन क्षेत्र वाराणसी में नगर आयुक्त के पद की जिम्मेदारी सम्भालते हुए काशी को स्मार्ट सिटी बनाने के मिशन में लगे थे। 
नवागन्तुक जिलाधिकारी प्रतापगढ़ डॉ नितिन बंसल की कार्य प्रणाली से जनता में आत्म संतोष देखने को मिल रहा है। अन्य जिलाधिकारियों की तरह वर्तमान जिलाधिकारी डॉ नितिन बंसल जी कैम्प कार्यालय को तवज्जों न देते कलेक्ट्रेट कार्यालय को अधिक तवज्जों देने से कलेक्ट्रेट की गरिमा बढ़ गई है। प्रतापगढ़ में ऐसे जिलाधिकारी आये जो कलेक्ट्रेट में बैठने से भागते रहे। बैठे भी तो अपने साथ ADM और CRO सहित मुख्य प्रशानिक अफसर सहित अतिरिक्त एसडीएम को अगल बगल बैठाकर ही कलक्ट्रेट स्थित जिलाधिकारी कार्यालय में जनता सुनवाई में DM साहेब बैठते थे। परन्तु वर्तमान जिलाधिकारी प्रतापगढ़ डॉ नितिन बंसल जी कलक्ट्रेट में आते ही जनता दर्शन और कोर्ट की सुनवाई एवं मीटिंग आदि का कार्यक्रम रखकर पुरानी ब्यवस्था बहाल करके नेक कार्य किया। पूरे कलेक्ट्रेट परिसर की गरिमा बढ़ा दी है। आते ही कलेक्ट्रेट परिसर का भ्रमण किया और साफ सफाई की ब्यवस्था को चाक चौबंद रखने का कड़ा निर्देश नाजिर को दिया था। उसी समय लग गया था कि हाकिम का ब्यवहार अन्य हाकिम से भिन्न होगा

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