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शनिवार, 20 फ़रवरी 2021

खाते में करोड़ों रूपये डंप होने के बावजूद क्षेत्र पंचायत की बैठक न होने से नहीं खर्च किये जा सके विकास कार्य के आवंटित धन

प्रतापगढ़ के सांसद संगम लाल गुप्ता ने लिखा था,मंडलायुक्त को पत्र...

संडवा चंद्रिका विकास खंड में दो साल से नहीं हुई क्षेत्र पंचायत की बैठक, 1.15 करोड़ रुपये डंप...

ब्लॉक प्रमुख और बीडियो में तालमेल के आभाव में नहीं हो पाता क्षेत्र का विकास...

क्षेत्र पंचायत की बैठक न होने से नहीं खर्च किये जा सके विकास कार्य के आवंटित धन...    

सांसद प्रतापगढ़ के द्वारा लिखा जाता है पत्र, परन्तु बाद में उसकी नहीं ली जाती खोज खबर,जनता में जा रहा इसका गलत सन्देश ! आखिर जब दो दिन चले अढ़ाई कोष की कहावत को ही सांसद महोदय चरितार्थ करना चाहते हैं तो उनको नहीं लिखना चाहिए जनहित के हवाले से किसी विभाग के लिए कोई पत्र ! आखिर शिकायत करके बाद में उसको ठंडे बस्ते में डालने से मन में उठने लगते हैं ! सवाल कि सांसद जनहित में यदि किसी विभाग के मामले की कमियों को उजागर करते हुए उच्चाधिकारियों को शिकायती पत्र भेजकर जाँच की मांग करते हैं तो बीच में आखिर सांसद संगम लाल गुप्ता के यहाँ उस जाँच के नाम पर उस शिकायत की आड़ में उस विभाग के अधिकारियों से मेलजोल करके मामले को कौन दबाने का कार्य कर रहा है...???


शिकायती पत्र लिखने में माहिर हैं,प्रतापगढ़ के सांसद संगम लाल गुप्ता...

पंचायत प्रतिनिधियों की बात करें तो 50 फीसदी ब्लॉक में ऐसे जनप्रतिनिधि बैठे होते हैं जिन्हें अपने अधिकार और कर्तब्य का ज्ञान नहीं होता। अक्सर महिला सीट चाहे वह पिछड़ी जाति की महिला सीट हो या अनुसूचित जाति की महिला सीट अथवा सामान्य सीट की महिला सीट पर यदि क्षेत्र प्रमुख की कुर्सी पर वह निर्वाचित हुई है और उसे अपने अधिकार एवं कर्तब्य का ज्ञान नहीं है तो वहाँ तैनात खंड विकास अधिकारी अपनी मनमानी पर उतर कर कार्य करना चाहता है। कभी-कभी तो कम पढ़े लिखे पुरुष जो क्षेत्र प्रमुख के पद पर निर्वाचित होकर आसीन होते हैं उन्हें भी ये खंड विकास अधिकारी पहाड़ा पढ़ाने का कार्य करते हैं

यदि ऐसे क्षेत्र प्रमुख किसी से सहयोग लेकर अपना कार्य करना चाहते हैं तो खंड विकास अधिकारी को ये बातें नागवार भी लग जाती है फिर इसी मतभेद में वहाँ का विकास कार्य भी बाधित होता है। इसके अलावा शासन सत्ता दल से क्षेत्र प्रमुख का तालमेल होना भी बहुत जरुरी होता है,अन्यथा की दशा में वहाँ अविश्वास लाकर क्षेत्र प्रमुख को पैदल कर दिया जाता है। जनपद प्रतापगढ़ के बेलखरनाथ धाम, गौरा और लालगंज विकास खंड इसके जीते जागते उदहारण हैंबाबागंज और कुंडा को छोड़ दिया जाए तो शिवगढ़, मंगरौरा, आसपुर देवसरा एवं सड़वा चन्द्रिका में क्षेत्र प्रमुख बदलने का प्रयास हुआ, परन्तु सफलता न मिल सकी

पंचायती राज अधिनियम की धज्जियां उड़ाते खंड विकास के अधिकरीगण...

उत्तर प्रदेश पंचायती राज अधिनियम के तहत प्रत्येक छः माह के अंतराल पर क्षेत्र पंचायत की बैठक होने का प्रावधान है, मगर संडवा चंद्रिका विकास खंड में दो साल से बैठक नहीं होने से 1.15 करोड़ रुपये डंप हैं। मामला संज्ञान में आने पर सांसद संगमलाल गुप्ता ने बैठक नहीं कराने वाले बीडीओ और लेखाकार के खिलाफ कार्रवाई के लिए मंडलायुक्त को पत्र लिखा था, परन्तु पत्र लिखने के बाद सांसद संगम लाल गुप्ता के यहाँ से मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। आखिर सांसद जी के यहाँ ऐसी ब्यवस्था का जनक कौन है जो ये सब कार्य के दायित्व का निर्वहन कर रहा है ? क्या सांसद प्रतापगढ़ संगम लाल गुप्ता को इस बात की जानकारी हो पाती है कि वो किस विभाग के खिलाफ किन-किन उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा है अथवा नहीं ? कई ऐसे प्रकरण भी आये जिनके संदर्भ में सांसद जी से पक्ष जानने का प्रयास किया गया तो उनको प्रकरण की जानकारी ही नहीं थी और एक अनजान ब्यक्ति की तरह बात कर मामले से अनिभिज्ञता जताकर अपने दायित्वों की इतिश्री कर ली

जिले के संडवा चंद्रिका विकास खंड में दो वर्ष से क्षेत्र पंचायत की बैठक नहीं हुई है। क्षेत्र प्रमुख रामकली ने बैठक बुलाने के लिए कई बार आग्रह किया, मगर बीडीओ ने बैठक नहीं बुलाई। इससे दो वर्ष में विकास कार्य कराने के लिए आई 1.15 करोड़ रुपये की धनराशि डंप है। पंचायतीराज व्यवस्था के मुताबिक, प्रत्येक तीन माह के अंतराल पर क्षेत्र पंचायत की बैठक की जा सकती है, मगर परिस्थितियां अनुकूल नहीं होने पर वर्ष में दो बार बैठकें करना अनिवार्य है। बीडीओ की मनमानी का आलम यह है कि दो साल बाद भी क्षेत्र पंचायत की बैठक नहीं बुलाई गई। सांसद संगम लाल गुप्ता ने बैठक नहीं बुलाने वाले बीडीओ और लेखाकार के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के लिए मंडलायुक्त को पत्र लिखा है। परन्तु पत्र लिखकर सांसद संगम लाल गुप्ता या तो भूल गए अथवा उनके यहाँ शिकायती पत्र डील करने प्रभारी खंड विकास अधिकारी से डील कर लिए हैं क्योंकि ऐसे और भी प्रकरण सामने आये जिनमें सांसद संगम लाल गुप्ता के लेटरपैड पर शिकायत की गई और बाद में वह ठंडे बस्ते में चली गई जनता में इस बात की चर्चा है कि शिकायत करके कहीं कोई सेटिंग-गेटिंग का तो खेल नहीं चल रहा

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