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शनिवार, 20 फ़रवरी 2021

भारत के कृषि बाजार पर कब्जे के लिए भ्रम की स्थिति फैलाने की हो रही साजिश

कृषि कानून को लेकर देश में अशांति और भ्रम कौन फैला रहा है...???

किसान आन्दोलन और किसान नेताओं की स्क्रिप्ट किस कैम्प कार्यालय से लिखी जा रही है...???

किसान कानून पर संशय को समाप्त करने की दिशा में पीएम पोदी ने स्थिति स्पष्ट की...

सरकार भी चाह रही है कि कथित किसान नेताओं द्वारा देश में किसान आन्दोलन को और अधिक समय तक खींचकर अन्य मुद्दे को कुंद करते हुए सरकार अपने नीतिगत फैसले लेती रहे और विपक्ष किसान आन्दोलन और किसान कानून में उलझा रहे। यदि विपक्ष इतना ही किसानों के प्रति आस्थावान था तो किसान कानून पारित होते समय हो हल्ला न कर सिर्फ सदन का बहिर्गमन कर अपने दायित्वों की इतिश्री कर ले...


देश में नए कृषि कानून को लेकर लगातार भ्रम और संशय गहराता जा रहा है कि वर्तमान की केंद्र ऐसा कृषि कानून किसानों के लिए लाई है जिससे किसानों की तवाही और उसकी बर्बादी भविष्य में उसे कोई रोक नहीं पायेगा। जबकि यही कृषि कानून पूर्ववर्ती सरकारों ने लाने के लिए अथक प्रयास किया था और वह फेल होकर चुप हो जाने में अपनी भलाई समझी। केंद्र की मोदी सरकार पर किसानों के द्वारा पैदा किये जाने वाले अनाजों की खरीद से लेकर उसकी भूमि और उसके मालिकाना हक तक के लिए अफवाहें फैलाने का कार्य विपक्ष द्वारा किया जाने लगा इस अफवाह से ध्यान हटाने के लिए कुछ आकड़ों को समझना होगा ताकि मन में भ्रम जो पल गया है वह दूर हो सके। आईये समझते हैं कि किसान कानून और उसके लागू होने के बाद की स्थिति कैसे होगी और कृषि क्षेत्र पर किसका कब्जा होगा ?


सुप्रीम कोर्ट ने किसान कानून को टालने के आदेश दिए हैं,फिर किसान नेता सड़कों पर क्यों...???

वर्ष-2021 में भारत की GDP 2.8 ट्रिलियन डॉलर है। इसमें कृषि की हिस्सेदारी है 19.90% अर्थात लगभग 00.557 ट्रिलियन डॉलर। रूपये में यह राशि लगभग 41 लाख करोड़ होती है अब यह भी जानिए कि मुकेश अम्बानी की रिलायंस की कुल बाजार पूंजी लगभग 12 लाख करोड़ है और गौतम अडानी के अडानी समूह की कुल बाजार पूंजी लगभग 6 लाख करोड़ है। दोनों की मिलाकर कुल बाजार पूंजी लगभग 18-19 लाख करोड़ होती है। यह पूरी पूंजी उनकी नहीं है। इसमें लगभग 60% पूंजी के मालिक उनकी कम्पनियों के शेयर धारक हैं। व्यक्तिगत रूप से अम्बानी लगभग 6 लाख करोड़ और गौतम अडानी लगभग 1.7 लाख करोड़ की बाजार पूंजी के मालिक है अर्थात लगभग 7-8 लाख करोड़ रूपये के मालिक हैं।


यदि ये दोनों उद्योगपति अपने सारे काम धंधे बंद कर दें और अपनी सारी बाजार पूंजी समेट कर उस पूंजी को केवल कृषि क्षेत्र में झोंक दें तो भी वो देश के कृषि बाजार के केवल 19.5% हिस्से पर कब्जा कर पाएंगे। यदि उनकी कम्पनियों के सारे शेयर होल्डर्स भी उनके कहने पर अपनी सारी पूंजी कृषि क्षेत्र में झोंक दें तो भी ये दोनों उद्योगपति भारत के कृषि बाजार के केवल 44% हिस्से पर कब्जा कर पाएंगे। पहली बात तो यह कि क्या ये दोनों उद्योगपति भारी लाभ वाले अपने सारे उद्योग धंधे बंद कर के खेती किसानी में कूद जाएंगे ? ऐसा सोचने वाले को अपने दिमाग का इलाज किसी अच्छे और बड़े डॉक्टर से कराना चाहिए। अतः नए कृषि कानूनों के विरोध में भारत की कृषि पर अडानी अम्बानी के कब्जे का राग अलाप रहे कांग्रेस के कथित युवराज राहुल गाँधी और अन्य विपक्षी दल यह बताएं कि भारत के कृषि बाजार पर कब्जे के लिए अडानी अम्बानी को पैसा किसका बाप देगा ? मुझे दुःख और कष्ट केवल इस बात का है कि राहुल गांधी और उसकी कांग्रेसी फौज से उपरोक्त सवाल न देश का मीडिया पूछ रहा है न ही भाजपाई प्रवक्ताओं की फौज।

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