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रविवार, 20 सितंबर 2020

स्वास्थ्य सेवाओं के रूप में नर्सिंग होम के नाम पर चल रहे हैं,प्रतापगढ़ शहर में मानव के कत्लगाह

चारू नर्सिंग होम में भर्ती महिला का इलाज के दौरान हुई मौत के बाद परिजनों ने जमकर किया हंगामा। शव को नर्सिंग होम के गेट पर रखकर कर रहे थे,नर्सिंग होम संचालक और मालिक की गिरफ्तारी की माँग...

काश ! अपनी ही तरह दूसरे पति पत्नी की भावना और प्यार को ये दोनों चिकित्सक समझते तो चारू नर्सिंग होम कत्लगाह के रूप में प्रसिद्धि न पाता...

चारू नर्सिंग होम के संचालक डॉ अतुल कुमार श्रीवास्तव व पत्नी डॉ ममता श्रीवास्तव 

नाम दो, ब्यक्ति एक और विशेज्ञता अनेक है, डॉ अतुल कुमार श्रीवास्तव में। चारू नर्सिंग होम में अपने चैंबर के आगे अपने नेमप्लेट में अपना दो नाम लिखाकर एक में डॉ अतुल कुमार तो दूसरे में डॉ ए के श्रीवास्तव लिखाकर एक नाम के आगे हृदय रोग विशेषज्ञ तो दूसरे नाम के आगे बाल रोग विशेषज्ञ लिखाकर मरीजों को डॉ अतुल कुमार श्रीवास्तव करते हैं, गुमराह

धन की चाहत ने डॉ अतुल कुमार श्रीवास्तव को बना दिया धन पिपासु। चारू नर्सिंग होम के मालिक हैं, डॉ अतुल कुमार श्रीवास्तव। उनकी पत्नी ममता श्रीवास्तव हैं, महिलाओं की चिकित्सक। शहर के केपी कॉलेज के प्राचार्य रहे ओम प्रकाश श्रीवास्तव के बेटे हैं, डॉ अतुल श्रीवास्तव। नर्सिंग होम के मानकों को ताक पर रखकर चारू नर्सिंग होम संचालित करने के लिए डॉ अतुल कुमार श्रीवास्तव सत्ताधारी दल भाजपा की करते हैं, राजनीति। विनियमित क्षेत्र में SDMसदर के नाक के नीचे बिना पार्किंग के चारू नर्सिंग होम की बिल्डिंग में चल रहा है, नर्सिंग होम। अनट्रेंड स्टाफ से लिया जाता है,कार्य

 बिना पार्किंग के संचालित बलीपुर स्थित चारू नर्सिंग होम...

धन पिपासु होने की वजह से अतुल श्रीवास्तव न तो नामी डॉक्टर बने रह सके और न ही सियासबाज बन सके। दो नावों की सवारी कहीं अतुल कुमार श्रीवास्तव को भारी न पड़ जाए। राजनीति के माध्यम से समाज सेवा करने की बात करते हैं, डॉ अतुल कुमार श्रीवास्तव। टैक्स चोर भी हैं, डॉ अतुल कुमार श्रीवास्तव। भुपियामऊ से कटरा के बीच में NHI पर करोड़ों रुपये की जमीन खरीद में स्टॉम्प चोरी का AIG स्टॉम्प के यहाँ केस दर्ज है । आयकर की चोरी करने में भी डॉ अतुल कुमार श्रीवास्तव को महारथ हासिल है

सवाल उठता है कि चिकित्सा क्षेत्र से क्या समाजसेवा नहीं की जा सकती जो डॉ अतुल कुमार श्रीवास्तव राजनीतिक क्षेत्र से समाजसेवा करना चाहते हैं ? तभी तो डॉ होते हुए भी अतुल कुमार श्रीवास्तव बहुपरुपिये की तरह समाजसेवा के लिए राजनीति का सहारा लिए हैं। वर्ष-2012 में नगरपालिका के अध्यक्ष पद के लिए भाजपा से टिकट के लिए पेश की थी, अपनी उम्मीदवारी। भाजपा से टिकट न मिलने पर निर्दलीय लड़ गए थे,चुनाव। निकाय चुनाव में अपनी जमानत तक नहीं बचा सके थे, डॉ अतुल कुमार श्रीवास्तव। भाजपा में विंध्यवासिनी श्रीवास्तव की तरह लाला विरादरी के नेता के रूप में स्वयं को स्थापित करने के लिए लालायित रहते हैं, अतुल कुमार श्रीवास्तव

नर्सिंग होम कहे या मानव का कत्लगाह...

तीन दशक पहले डॉ अतुल कुमार श्रीवास्तव अपनी पत्नी ममता श्रीवास्तव को शहर के मेडिकल स्टोरों पर दो-दो घण्टे बैठाकर स्वयं अतुल कुमार श्रीवास्तव ग्रामीण अंचल के चिकित्सकों को अपनी पत्नी के पास मरीजों को रेफर करने के लिए अपनी वैन और स्कूटर से उनको अधिक से अधिक कमीशन देने की लालच देने के लिए ठंडी, गर्मी और बरसात में भी करते थे, जी तोड़ मेहनत। अपनी पत्नी की प्रैक्टिस चमकाने के लिए जनता से किये थे, धोखा। ममता श्रीवास्तव के नाम के आगे भूतपूर्व वरिष्ठ चिकित्सक, कमला नेहरू चिकित्सालय, इलाहाबाद लिखवाकर चिलबिला तिराहा, ठेठरी बाजार और राजापाल चौराहे पर प्रैक्टिस करने वाले स्थान पर लगवाया था,बोर्ड। मरीजों को दवा लिखने वाले पर्चे में भी मरीजों को प्रभाव में लेने के लिए कमला नेहरू चिकित्सालय में ममता श्रीवास्तव के वरिष्ठ चिकित्सक होने का रहता था,उल्लेख


कोतवाली नगर पल्टन बाजार में गली वाले पैतृक मकान पर पहले शुरू की थी, चार बेड डालकर नर्सिंग होम की प्रैक्टिस। बाद में ममता श्रीवास्तव की प्रैक्टिस चल जाने के बाद जब धन संचय हो गया, तब भगवा चुंगी रोड़ पर चारू नर्सिंग होम की स्थापना करके डॉक्टर अतुल कुमार श्रीवास्तव मानव सेवा के नाम पर चिकित्सा सुविधा के रूप में खोल लिया मानव कत्लखाना। जहाँ होने लगी चिकित्सकीय अभाव और घोर लापरवाही में मरीजों की मौत। मरीजों के मृत होने के बाद भी डॉ अतुल कुमार श्रीवास्तव और उनके पालतू गुंडे मृत मरीजों के परिजनों से वसूलते हैं,चारु नर्सिंग होम के बने अनाप सनाप बिल। बिल के भुगतान न देने पर होते हैं,अक्सर बवाल...

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डॉक्टर अतुल कुमार श्रीवास्तव चिकित्सक के रूप में एक कसाई से भी अधिक खूंखार हैं जो पैसे के अभाव में अपने नर्सिंग होम में भर्ती मरीजों के साथ उनकी जान का करते हैं, सौदा। सौदा में गड़बड़ी होने पर भर्ती मरीजों को घोर लापवाही दिखाते हुए डॉ अतुल कुमार श्रीवास्तव उसकी दशा पर उसे अपने नर्सिंग होम रूपी कत्लखाने में मरने के लिए छोड़ देता है। मरीज के मरने के बाद मरीज के परिजनों और नर्सिंग होम के स्टाफ के बीच बवाल होने पर सत्ताधारी नेता होने का डॉ अतुल कुमार श्रीवास्तव दिखाता है, भवकाल। सत्ताधारी नेताओं को बुलाकर करता है, घिनौनी राजनीति। ऐसे में कथित सत्ताधारी नेताओं से होती है, सरकार की फजीहत। जनता के बीच बदनाम होती है, सरकार

कल जिले की बहुचर्चित चर्चित नर्सिंग होम चारू की लापरवाही फिर एक बार हुई उजागर। सुबह पेट में दर्द की शिकायत पर अस्पताल में परिजनों ने महिला को कराया था, भर्ती। परिजनों का आरोप है कि भर्ती मरीज के इलाज में घोर लापरवाही बरती गई, जिसके चलते चारू नर्सिंग होम में भर्ती महिला वर्षा मिश्रा की मौत हो गयी। हंगामे की सूचना पर पहुँची कोतवाली नगर की पुलिस। डॉक्टर अतुल कुमार श्रीवास्तव को हिरासत में लेकर चली गयी कोतवाली नगर । कोतवाली नगर से लेकर बलीपुर स्थित चारू नर्सिंग होम तक सत्ताधारी नेताओं और पुलिस का लगा रहा जमावड़ा। चारू नर्सिंग होम के संचालक डॉ अतुल कुमार श्रीवास्तव जो नर्सिंग होम संचालित करने के लिए सत्तापक्ष के नेता बने हुए हैं, जिनकी पैरवी में कोतवाली नगर पहुँचे थे, जिले के दिग्गज भाजपाई नेता

अभी लॉकडाउन के दौरान माह मई में भी प्रसव पीड़ित महिला को देर रात चारू नर्सिंग होम के संचालक के इशारे पर नर्सिंग होम के स्टाफ द्वारा नर्सिंग होम में भर्ती महिला को नर्सिंग होम के बाहर निकाल दिया गया था। जिससे सड़क पर ही घण्टों तड़पती रही प्रसव पीड़ित महिला। सड़क पर प्रसव पीड़ित महिला दर्द से कराह रही थी और नर्सिंग होम के संचालक डॉ अतुल कुमार श्रीवास्तव का फिर भी नहीं पसीझा, दिल। जबकि डॉ अतुल कुमार श्रीवास्तव समाज सेवा करने के लिए राजनीति की मंडी में पहुँच चुके हैं। यही नहीं महिला चिकित्सक ममता श्रीवास्तव एक डॉ होने से पहले एक माँ भी हैं और एक पत्नी भी हैं। फिर भी उनका दिल उस प्रसव पीड़ित महिला की करुण वेदना को अनसुना कर दिया

नर्सिंग होम के संचालक डॉ अतुल कुमार श्रीवास्तव के अमानवीय कुकृत्यों की वजह से प्रसव पीड़ित महिला सड़क पर ही तड़पती रही और उसके बच्चे का आधा अंग बाहर आ गया। सड़क पर काफी भीड़ एकत्र हो गई थी। सभी मौजूद लोग डॉ अतुल और डॉ ममता के अमानवीयता पर थूक रहे थे। फिर भी पैसे की हबस के आगे दोनों पति व पत्नी के सेहत पर उसका कोई प्रभाव नहीं पड़ा। न ही भविष्य में उसमें कुछ सुधार ही हुआ। उस वक्त मौके पर सीओ सिटी अभय पांडेय जी, नगर कोतवाल सुरेंद्र नाथ जी और वर्तमान नगर कोतवाल प्रवीण कुशवाहा जी मौके पर पहुँचे थे और उस तड़पती महिला के प्रति मानवीय संवेदना को दिखाते हुए उसकी जान बचाई थी। परन्तु घोर लापरवाही की वजह से उस महिला के बच्चे की मौत हो गयी थी। उस घटना का भी कोतवाली नगर में मुकदमा दर्ज हुआ था

वर्तमान कोतवाल प्रवीण कुशवाहा उस वक्त कोहड़ौर के थानाध्यक्ष रहे। फिर भी उन्होंने उस समय मानवीय मूल्यों को अपना आदर्श मानकर बेहतर कार्य किया था। मौजूद साथी मीडिया से वर्तमान कोतवाल उस वक्त कह रहे थे कि मुकदमें की विवेचना यदि उन्हें मिलती तो वो डॉ को जरूर सबक सिखाते। परन्तु पुलिस और स्वास्थ्य विभाग हर बार की तरह उस बार भी समय के साथ खेल कर दिया। जिले में स्वास्थ्य महकमें का मुखिया डॉ अरविंद कुमार श्रीवास्तव तो इतना भ्रष्ट और रिश्वतखोर है कि वो कोई भी मामला हो और उसे धन मिल जाये तो सम्पूर्ण मामले को रफा दफा करने का माद्दा रखता है। संयोग से यदि सामने वाला उसकी विरादरी का हो तो उसका सारा गुनाह एक झटके में ही खत्म कर देता है। इस तरह योगी सरकार में हर सरकार की तरह यदि सत्ता दल से जुड़े लोग हैं तो उनके सारे अपराध माफ हैं। यही हकीकत है जो कहने व सुनने में बहुत कड़वा लगता है

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