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शनिवार, 8 अगस्त 2020

पाक अधिकृत कश्मीर यानि पीओके स्थित शारदा पीठ की पवित्र मिट्टी कैसे पहुँची प्रभु श्रीराम की नगरी अयोध्या...

राम मंदिर के लिए POK स्थित शारदा पीठ से लाई गई मिट्टी, बनाया गया था,फुलप्रूफ प्लान ! इस शख्स ने दिया काम को अंजाम ! चीन से हांगकांग और मुजफ्फराबाद के रास्ते चला खास ऑपरेशन...

अयोध्या नगरी में प्रभु श्रीराम के मंदिर हेतु POK स्थित शारदा पीठ से लाई गई मिट्टी...

अयोध्या में राम मंदिर के भूमि पूजन के लिए पीओके स्थित प्रसिद्ध शारदा पीठ की भी मिट्टी मंगाई गई थी। इसको लेकर चीन से हांगकांग और मुजफ्फराबाद के रास्ते खास ऑपरेशन चला आखिरकार पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले हिस्से में स्थित इस प्रसिद्ध शक्तिपीठ की मिट्टी को राम मंदिर की नींव में डालने के लिए अयोध्या लाने में सफलता हासिल हुई। एक लंबी कानूनी लड़ाई लड़ने के बाद अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि का विवाद देश की सबसे बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट ने माना कि बाबरी मस्जिद का ढाँचा जो विध्वंस हुआ था वहाँ पहले प्रभु श्रीराम की मंदिर थी। इसलिए उस स्थल पर सिर्फ और सिर्फ हिंदुओं का हक है। 

इस तरह एक लम्बी कवायद के बाद अयोध्या में प्रभु श्रीराम जी का भब्य मंदिर निर्माण के लिए एक ट्रस्ट का गठन हुआ। फिर भूमि पूजन के लिए देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आमंत्रण पत्र भेजा गया। पीएमओ ने 5 अगस्त को पीएम का प्रोग्राम अयोध्या में प्रभु श्रीराम के मंदिर हेतु भूमि पूजन का समय मंदिर निर्माण हेतु बने ट्रस्ट को दे दिया। सारी तैयारी हो गई। एक अतिमहत्वपूर्ण कार्य शेष बचा। वो कार्य था पाक अधिकृत कश्मीर पीओके स्थित शारदा पीठ से पवित्र मिट्टी लाने का। पीओके स्थित शारदा पीठ की मिट्टी लेकर अयोध्या पहुंचने वाले बंगलुरु निवासी अंजना शर्मा ने इस पूरे ऑपरेशन की जानकारी दी उन्होंने कहा कि जब राम मंदिर के लिए शारदा पीठ की मिट्टी की जरूरत महसूस हुई तो चेन्नई के मूल निवासी और वर्तमान में चीन में बस चुके वेंकटेश रमन और उनकी पत्नी की याद आई, क्योंकि वेंकटेश रमन व उनकी पत्नी इससे पहले तमिलनाडु के कांची मठ और कर्नाटक के श्रृंगेरी मठ में शारदा पीठ की मिट्टी दे चुके थे। 

 पाक अधिकृत कश्मीर पीओके स्थित खंडहर में तब्दील हुआ,शारदा पीठ...

चूंकि पीओके में भारतीय नागरिकों को जाने की इजाजत नहीं है। इसलिए भारत से कोई वहां जाकर शारदा पीठ की पवित्र मिट्टी नहीं ला सकता था। श्रीराम मंदिर भूमिपूजन का कार्य पूरे विधि-विधान के साथ संपन्न हो, इसके लिए आवश्यक था कि सम्पूर्ण भारत के महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों से पवित्र मिट्टी और जल लाया जाए और इस कार्य में एक मात्र कमी को पूरा करने के लिए यह अत्यावश्यक था कि पाक अधिकृत कश्मीर में स्थित पवित्र शारदा पीठ की मिट्टी भी लाई जाए। वहां शारदा पीठ का हजारों वर्ष पुराना मंदिर है, बताया जाता है कि जिसे सम्राट अशोक के शासनकाल में स्थापित किया गया था। यह मंदिर कश्मीरी पंडितों के तीन प्रसिद्ध पवित्र स्थलों में से एक है। शारदा पीठ फाउंडेशन से जुड़े अंजना शर्मा ने बताया कि पाकिस्तान के अवैध कब्जे में होने के कारण कोई भारतीय पीओके में नहीं जा सकता, इसलिए मिट्टी लाना बहुत कठिन कार्य था। पीओके में चाइनीज पासपोर्ट धारक जा सकते हैं वजह कि पाकिस्तान ने दोस्ती और कुछ प्रोजेक्ट्स के कारण चाइनीज पासपोर्ट धारकों को वहां जाने की छूट दी है ऐसे में चीन की नागरिकता ले चुके वेंकटेश रमन से संपर्क किया गया तो उन्होंने मिट्टी उपलब्ध कराने की हामी भर दी

हालांकि आज शारदा मंदिर पूरी तरह खंडहर हालत में है। ऐसे में शारदा पीठ की पवित्र मिट्टी भारत लाने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी कर्नाटक के वेंकटेश रमन और उनकी पत्नी सुजाता को सौंपी गई। वेंकटेश अपनी पत्नी के साथ चीन में रहते हैं। सेवा शारदा पीठ ने इस महत्वपूर्ण काम के लिए उनसे संपर्क किया। इस दंपति ने अपने चीन के पासपोर्ट पर पीओके जाकर शारदा पीठ की पवित्र मिट्टी भारत तक पहुंचाने के कार्य को श्रीराम काज के पुण्य शाली आदेश का अहो भाग्य माना और उन्होंने हर तरह के खतरे को स्वीकार करते हुए इसे बड़े जतन से पूरा किया। श्रीराम मंदिर के लिए शारदा पीठ की मिट्टी लाने को उत्साहित हुए वेंकटेश रमन हांगकांग के रास्ते से होते हुए पीओके की राजधानी मुजफ्फराबाद पहुंचे वहां से शारदा पीठ गए और मंदिर के पुजारी से संपर्क किया और मिट्टी लेकर फिर हांगकांग के रास्ते दिल्ली पहुंचे। अंजना शर्मा ने बताया कि दिल्ली में वेंकटेश रमन ने शारदा पीठ की पवित्र मिट्टी और प्रसाद उन्हें सौंपा इसके बाद शर्मा ने अयोध्या पहुंचकर शारदा पीठ की मिट्टी और प्रसाद राममंदिर तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट को सौंप दिया। 

सबसे बड़ी कठिनाई ये थी कि शारदा पीठ कैसे पहुंचा जाए,चूंकि पीओके पर पाक सेना सख्त निगाह रखती है।और वहां से लंबे समय से भारत विरोधी कार्रवाई संचालित की जा रही है। पीओके में भारतीय नागरिकों को जाने की अनुमति भी नहीं है। इसलिए भारत से कोई वहां जाकर शारदा पीठ की पवित्र मिट्टी नहीं ला सकता था। अतः इस कार्य के लिए यह तय किया गया कि किसी ऐसे समर्पित दंपत्ति को चुना जाए जो चीन में निवास कर रहा हो। जब इस हेतु खोज आरंभ हुई तो कर्नाटक निवासी वेंकटेश दंपत्ति आगे आए, फिर शुरू हुआ ये पवित्र अभियान। पीओके में स्थित शारदा पीठ को मुक्त कराने की लंबे समय से मांग उठती रही है करतारपुर की तरह भारतीय श्रद्धालुओं को यहां दर्शन-पूजन की अनुमति देने की मांग भी हो चुकी है। विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने कहा कि शारदा पीठ को मुक्त कराने का संगठन बहुत पहले प्रस्ताव पास कर चुका है, इसके लिए अनुकूल समय जरूर आएगा। पीओके से लेकर पूरी दुनिया में रामभक्त फैले हैं शारदा पीठ की पवित्र मिट्टी लाने वाले वेंकटेश रमन और माध्यम बने अंजना शर्मा का विहिप अभिनंदन करता है।  

शारदा पीठ मंदिर करीब 5 हजार वर्ष पुराना माना जाता है। यह श्री स्थित उरी से 75 किलोमीटर और श्रीनगर से करीब सौ किलोमीटर दूर पीओके में है यह प्रमुख शक्तिपीठों में से एक है, कश्मीरी पंडितों की आस्था का प्रमुख केंद्र है। कहा जाता है कि सम्राट अशोक के शासनकाल के दौरान 237 ईसा पूर्व में शारदा मंदिर की स्थापना हुई थी। विद्या की अधिष्ठात्री देवी को समर्पित यह मंदिर अध्ययन का एक प्राचीन केंद्र था। संघ परिवार शारदा पीठ को मुक्त कराने की लंबे समय से मांग उठाता रहा है। चीन के पासपोर्ट के आधार पर ये दंपत्ति हांगकांग से पीओके की राजधानी मुजफ्फराबाद पहुंचे। वहां से वेंकटेश तथा उनकी पत्नी दर्शन और पूजा अर्चना के लिए शारदा पीठ गए और वहां का प्रसाद व पवित्र मिट्टी इकट्ठा की।72 साल बाद पहली बार पीओके में मां शारदा पीठ शक्ति स्थल पर किसी हिंदू श्रद्धालु ने पहुंचकर पूजा-अर्चना की थी। इसके बाद वेंकटेश और उनकी धर्म पत्नी सुजाता शारदा पीठ की पवित्र मिट्टी व प्रसाद लेकर हांगकांग होते हुए दिल्ली पहुंचे। दिल्ली पहुंचने के बाद वेंकटेश और उनकी पत्नी ने सेवा शारदा पीठ को लाई गई मिट्टी व प्रसाद सौंपा। दिल्ली से शारदा पीठ के प्रतिनिधि मिट्टी व प्रसाद लेकर अयोध्या पहुंचे और इस तरह श्रीराम मन्दिर शिलान्यास का विधिवत आयोजन संपन्न हुआ। परन्तु भारत की बकलोल मीडिया फ़ैज खान की मिट्टी और अंसारी के Invitation कार्ड में उलझी रही। 

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