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शुक्रवार, 24 जुलाई 2020

पुलिस का दावा कि मुठभेड़ में मारा गया गैंगेस्टर अपराधी विकास दुबे का साथी प्रभात मिश्र नहीं था,नाबालिग

स्कूल की टीसी से हुआ प्रभात मिश्र की उम्र का खुलासा...
मीडिया सेल कानपुर नगर पुलिस का दावा कि प्रभात मिश्र नहीं था,नाबालिग... 
कानपुर। उत्तर प्रदेश के कानपुर के बिकरु कांड के आरोपी गैंगेस्टर विकास दुबे मामले में पुलिस एनकाउंटर में मारे गए उसके साथी प्रभात मिश्र की उम्र को लेकर उठ रहे सवालों का पटाक्षेप पुलिस ने कर दिया है। स्कूल से मिले दस्तावेजों के मुताबिक प्रभात मिश्र नाबालिग नहीं था, बल्कि उसकी उम्र 20 वर्ष थी। 

पुलिस के अनुसार प्रभात मिश्र को फरीदाबाद से पकड़ा गया था। जिसके बाद कानपुर लाए जाने के दौरान उसने भागने की कोशिश की और मुठभेड़ में मार गिराया गया था। इस एनकाउंटर के बाद उसके नाबालिग होने का मामला तूल पकड़ रहा था। मामले में अब खुलासा हुआ है। पता चला है कि प्रभात मिश्र नाबालिग नहीं था, बल्कि वह 20 वर्ष का था। फिलहाल पुलिस के लिए अभी बालिग और नाबालिग का पटाक्षेप हुआ है न कि प्रभात मिश्र की पुलिस मुठभेड़ की क्लीन चिट ! प्रभात मिश्र भले ही गैंगेस्टर अपराधी विकास दुबे का साथी रहा हो ! परन्तु प्रभात मिश्र के विरुद्ध कोई आपराधिक मामले पुलिस थाने में दर्ज नहीं थे। इस तरह प्रभात मिश्र को पुलिस एक शातिर सिद्ध करने में अभी कई कहानी गढ़ेगी और उसे सिद्ध करने का प्रयास करेगी। परन्तु खेल इतना भी आसान नहीं है

दस्तावेजों में मिले तीन अलग-अलग नाम...
प्राथमिक विद्यालय बिकरु में प्रभात मिश्र की जन्म तिथि अगस्त, वर्ष-2000 दिखाई गई है। स्कूल की टीसी में उसकी उम्र यही लिखी हुई है। उसमें नाम प्रभात मिश्र की जगह शानू लिखा हुआ है, जबकि पिता और मां का नाम वही है। इसके बाद हाईस्कूल के जो प्रमाण पत्र मिले हैं, उसमें प्रभात का नाम कार्तिकेय लिखा हुआ है। यानी प्रभात के 3 नाम शानू, प्रभात और कार्तिकेय था। एक ब्यक्ति के तीन नाम क्यों थे ? इसका जवाब किसी के पास नहीं है। दो नाम तो एक ब्यक्ति के अक्सर सुनने को मिला है परन्तु तीन नाम तो बहुत कम ही सुनने को मिला है। शैक्षिक प्रमाण पत्रों में तो दो नाम का होना खुद में संदेह पैदा करता है

परिजनों ने साधी चुप्पी...
परिजन इस पूरे मामले पर कुछ भी नहीं बोल रहे हैं। हालांकि उम्र को लेकर जो सवाल खड़े हो रहे थे ? उसमें स्थिति साफ हो गई है कि प्रभात बालिग था और कक्षा-8 की उम्र से ही विकास दुबे का साथी बन गया था। विकास दुबे के साथ गाड़ी में घूमना, उसके साथ राइफल लेकर प्रभात अक्सर देखा जाता था। सीओ बिल्हौर संतोष कुमार सिंह ने बताया कि सभी तथ्यों को इकट्ठा किया जा रहा है। जैसे-जैसे मामले में जाँच आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए-नए सनसनीखेज खुलासे हो रहे हैं। एक से बढ़कर एक मामले विकास दुबे के प्रकरण में देखने को मिल रहा है। देखना है कि ये पुलिस और आयोग की जाँच कितनी ईमानदारी से विकास दुबे के प्रकरण की जाँच करती है ?

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