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गुरुवार, 23 जुलाई 2020

अखिलेश सरकार में भू-माफिया बन बैठा कुख्यात अपराधी विकास दुबे का खजांची जय वाजपेयी

➤सड़े हुए सिस्टम से आँख मिचौली करके दुर्दांत अपराधी का खजांची जय वाजपेयी ने भाई रजय और पत्नी श्वेता के नाम खरीद रखी है,करोड़ों की प्रापर्टी...
➤गैंगेस्टर अपराधी का ब्यवसायिक पार्टनर जय वाजपेयी बनाता गया प्रापर्टी और उत्तर प्रदेश पुलिस की तरह सोता रहा आयकर विभाग...
 मोस्ट वांटेड विकास दुबे का खजांची जय वाजपेयी के साम्राज्य में कितने लोग होंगे बेनकाब...
लखनऊ। एनकाउंटर में मारे गये यूपी के मोस्ट वांटेड विकास दुबे के खजांची जय वाजपेयी का काला चिट्ठा सामने आने लगा है। प्रकरण की जांच कर रहे कानपुर प्रशासन के हाथ एक फाइल लगी है जिसमें जय वाजपेयी के काले कारनामों का जिक्र है। वर्ष- 2012 से वर्ष-2017 तक उत्तर प्रदेश में रही समाजवादी पार्टी की सरकार के दौर में जय वाजपेयी समाजवादी पार्टी का सदस्य बन गया था। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि जय 3 साल पहले से भू-माफिया की सूची में दर्ज है। उसके घर में नोट गिनने की मशीन है। फौरी तौर पर मान लिया जाये कि विकास दुबे जो दुर्दांत अपराधी होने के बावजूद उसके पुलिस के अधिकारियों और सभी दलों के नेताओं से सम्बन्ध रहे, इसके लिए विकास ने अपने ब्यवसायिक साथी जय वाजपेयी को भी लगा रखा था परन्तु आयकर विभाग के अफसर भी क्या भाग खाकर और गांजा की कस लेकर कुम्भकर्णी में सो गए थे जो विकास दुबे और जय वायपेयी के द्वारा अर्जित की जाने वाली संपत्तियों पर नजर नहीं दौड़ा सके

जय बाजपेई और उसके भाई रजय की ब्रह्म नगर और आर्य नगर के बीच ही 14 करोड़ कि कई संपत्तियां हैं। यह खुलासा 2017 की उस फाइल से हुआ है, जिसमें तत्कालीन जिलाधिकारी सुरेंद्र सिंह के कार्यालय में जय और रजय के खिलाफ की गई जांच की रिपोर्ट लगी है। यह फाइल कई दिनों की खोजबीन के बाद अब जिला प्रशासन के हाथ लगी है। उस समय पुलिस की जांच में यह बात भी आई थी कि जय और रजय दोनों उस समय समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता थे और सपा के एक विधायक के साथ मिलकर प्रॉपर्टी डीलिंग और ठेकेदारी का काम करते थे। फाइल में लगी पुलिस रिपोर्ट में वकील सौरभ भदौरिया के हवाले से पुलिस को कई जानकारियां दी गई हैं। अब जब बिकरू में 8 पुलिस वालों की विकास दुबे गैंग द्वारा हत्या करने के बाद पुलिस प्रशासन और सड़ा हुआ सिस्टम के जिम्मेदारों ने रोज नित नई-नई कहानियां गढ़कर जनता को बताना चाहते हैं कि वो जाग चुके हैं और अब विकास और जय के बनाये गए साम्राज्य को उखाड़ फेंकेंगे। अब जनता है कि ब्यवस्था में बैठे ऐसे झूठे और फरेबी लोंगो की बातों पर यकीन ही नहीं कर रही है। आम जनता जान रही है कि सिस्टम तभी तक सक्रिय रहेगा जब तक उसमें चाभी भरी जाती रहेगी। 

सपा विधायक ने वापस कराये थे,मुकदमे...
जय और रजय के खिलाफ नजीराबाद, बजरिया और चौबेपुर सीसामऊ थाने में कई मुकदमे दर्ज कराए गए थे, लेकिन सपा के एक विधायक ने अपने प्रभाव का प्रयोग करते हुए जय के खिलाफ लगे मुकदमों को वापस करा दिया था। इतना ही नहीं उसके अपराधों पर पर्दा डालते हुए उस दौरान उसे शस्त्र लाइसेंस पासपोर्ट भी जारी कर दिया गया था। यह फाइल अब फिर से पुलिस के पास भेजी गई है। जिस पर नए सिरे से जांच शुरू होगी। तत्कालीन जांच में जो रिपोर्ट तैयार की गई है, उसमें जय और रजय के नाम से नवाबगंज, पनकी, ईदगाह, बारह सिरोही कल्याणपुर, इंदिरा नगर, गुजैनी जैसे कई स्थानों पर कुल 60 करोड की प्रॉपर्टी बताई गई है। इसमें यह भी बताया गया है कि कुछ हजार की नौकरी करने वाले जय के पास इतनी बड़ी मात्रा में प्रॉपर्टी कैसे आई ? इस फाइल में बताया गया है कि जय ने अपने परिवार के सदस्यों और कई दूसरे करीबियों के नाम से बड़ी मात्रा में बेनामी संपत्ति बनाई हैं। लग्जरी वाहन भी खरीदे हैं। इसकी जांच उस समय खुफिया एजेंसियों से कराए जाने की भी मांग की गई थी।

जय वाजपेयी की इन प्रापर्टी का रिपोर्ट में हैं,जिक्र...
➧जय वाजपेयी ने हर्ष नगर में राजकुमार पुत्र राजाराम से 16 लाख की रजिस्ट्री कराई। 
➧ब्रह्म नगर में जय ने शकुन नंदनी सोनकर से 2012 में 15 लाख रुपए में एक प्रॉपर्टी खरीदी।
➧जय की पत्नी श्वेता के नाम से ब्रह्म नगर में 35 लाख की एक प्रॉपर्टी 2015 में खरीदी गई।
➧जवाहर नगर वार्ड में गणेश शंकर बाजपेई से जय ने 2012 में एक जमीन की रजिस्ट्री कराई।
➧ब्रह्म नगर में ही जय ने एक प्रॉपर्टी 95 लाख में खरीदी थी। 
➧इसके अलावा केडीए की तहरीर पर जय के खिलाफ मकान की सील तोड़ कर अवैध निर्माण कराए जाने के संबंध में मुकदमा दर्ज कराया गया था। यह मामला वर्ष-2017 का है।

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