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सोमवार, 13 जुलाई 2020

कभी भी न करें तुलसी के पौधे के साथ ये काम

तुलसी में प्रतिदिन जल चढ़ाने से आयु लंबी होती है...


 तुलसी के पौधे का महात्म...
तुलसी धर्मिक कार्यों से लेकर एक औषधि के रुप में भी जानी जाती है। तुलसी के पौधे को पवित्र माना जाता है। आदिकाल से ही तुलसी का प्रयोग बहुत सी आयुर्वेदिक दवाईयों में किया जाता है। हिंदु परिवार में तुलसी के पैधे का बहुत महत्व है। इसलिए उसे घर में रखा जाता है. और उसकी पूजा की जाती है। इसके पीछे एक कहावत भी है कि जिस घर में तुलसी का पौधा होता है वह पूजनीय स्थान होता है और वहां कोई बीमारी या मृत्यु के देवता नहीं आ सकते हैं।

" तुलसी के पौधे को घर के अंदर नहीं लगाया जाता ! ऐसा कहा जाता है कि तुलसी के पति के मृत्यु के बाद भगवान विष्णु ने तुलसी को अपनी प्रिये सखी राधा की तरह माना था। इसलिए तुलसी ने उनसे कहा कि वे उनके घर जाना चाहती हैं। लेकिन भगवान विष्णु ने उन्हें मना कर दिया और कहा कि मेरा घर लक्ष्मी के लिए है लेकिन मेरा दिल तम्हारे लिए है। तुलसी ने कहा कि घर के अंदर ना सही बाहर तो उन्हें स्थान मिल सकता है, जिसे भगवान विष्णु ने मान लिया। तब से आज तक तुलसी का पौधा घर और मंदिरों के बाहर लगाया जाता है..."
तुलसी का पौधा घरों में और मंदिरों में लगाया जाता है, साथ इसकी पत्तियां भगवान विष्णु को अर्पित की जाती हैं। इसके औषधिय गुणों के अलावा यह कभी-कभी हमारे शरीर को नुक्सान भी पंहुचा सकती है। तुलसी का अपमान नहीं करना चाहिए जिस घर में तुलसी लगी हो वहां उसकी रोज पूजा करनी चाहिए। क्योंकि यह मन जाता है कि इसे पूजने वाला व्यक्ति स्वर्ग में जाता है। तुलसी के पत्ते नहीं चबाने चाहिये तुलसी के पत्तों का सेवन करते समय ध्यान रखना चाहिए कि इन पत्तों को चबाए नहीं बल्कि निगल लेना चाहिए। इस प्रकार तुलसी का सेवन करने से कई रोगों में लाभ प्राप्त होता है। तुलसी के पत्तों में पारा धातु के तत्व होते हैं जो कि पत्तों को चबाने से दांतों पर लग जाते हैं। जिससे आपके दांत खराब हो सकते हैं।

" शास्त्रों के अनुसार तुलसी के पत्ते कुछ खास दिनों में नहीं तोडऩे चाहिए। ये दिन हैं एकादशी, रविवार और सूर्य या चंद्र ग्रहण काल। इन दिनों में और रात के समय तुलसी के पत्ते नहीं तोडऩे चाहिए। बिना उपयोग तुलसी के पत्ते कभी नहीं तोडऩे चाहिए। ऐसा करने पर व्यक्ति को दोष लगता है। अनावश्यक रूप से तुलसी के पत्ते तोडऩा, तुलसी को नष्ट करने के समान माना गया है। बेवजह तुलसी के पत्ते तोडऩे से मृत्यु का शाप लगता है..."
गणेश पूजन में वर्जित है तुलसी के पत्ते एक कथा के अनुसार एक बार तुलसी जंगल में अकेली घूम रही थी जब उन्होंने गणेश जी को देखा जो की ध्यान में बैठे थे। तब तुलसी ने गणेश जी सामने विवाह का प्रस्ताव रखा और उन्होंने यह कह कर अस्वीकार कर दिया की वो ब्रह्मचारी है जिससे रुष्ट होकर तुलसी ने उन्हें दो विवाह का श्राप दे दिया, प्रतिक्रिया स्वरुप गणेश जी ने तुलसी को एक राक्षस से विवाह का श्राप दे दिया। इसलिए गणेश पूजन में भी तुलसी का प्रयोग वर्जित है। श्राप मिलने के बाद तुलसी को अपनी गलती का एहसास होता है और वह गणेश जी से माफी मांगती है। इससे खुश होकर गणेश जी अपना दिया हुआ शाप कम कर देते हैं और कहते हैं कि सिर्फ भगवान ही उसे एक पवित्र पौधे का दर्जा दे सकते हैं तब वह इस शाप से मुक्त हो जायेगी। लेकिन गणेश जी पर उसकी पत्ती नहीं चढ़ाई जायेगी।

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