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शनिवार, 25 जुलाई 2020

जानिये कैसे एक नाग देवता एक महिला की प्रार्थना पर बन गया उसका भाई,पढ़िए नाग पंचमी की पौराणिक कथा

सनातन धर्म ऐसा सहज और सरल धर्म है,जहाँ आज भी नाग को देवता मानकर हर हिन्दू धर्मावलम्बी करते हैं,पूजा...
 भगवान भोलेनाथ और माँ पार्वती के अति प्रिय हैं,नागदेवता...
नाग पंचमी की पौराणिक कथा के अनुसार, बहुत समय पहले की बात है जब प्राचीन नगर में एक सेठ जी के सात पुत्र थे सातों के विवाह हो चुके थे सबसे छोटे पुत्र की पत्नी श्रेष्ठ चरित्र की विदूषी और सुशील थी, परंतु उसके भाई नहीं था। एक दिन बड़ी बहू ने घर लीपने को पीली मिट्टी लाने के लिए सभी बहुओं को साथ चलने को कहा तो सभी धलिया और खुरपी लेकर मिट्टी खोदने लगी तभी वहां एक सर्प निकला, जिसे बड़ी बहू खुरपी से मारने लगी यह देखकर छोटी बहू ने उसे रोकते हुए कहा- 'मत मारो इसे ? यह बेचारा निरपराध है'

यह सुनकर बड़ी बहू ने उसे नहीं मारा तब सर्प एक ओर जा बैठा तब छोटी बहू ने उससे कहा-'हम अभी लौट कर आती हूँ, तुम यहां से जाना मत। यह कहकर वह सबके साथ मिट्टी लेकर घर चली गई और वहां कामकाज में फंसकर सर्प से जो वादा किया था, उसे भूल गई। उसे दूसरे दिन वह बात याद आई तो सब को साथ लेकर वहां पहुंची और सर्प को उस स्थान पर बैठा देखकर बोली- सर्प भैया नमस्कार ! सर्प ने कहा- 'तू भैया कह चुकी है, इसलिए तुझे छोड़ देता हूं, नहीं तो झूठी बात कहने के कारण तुझे अभी डस लेता वह बोली- भैया मुझसे भूल हो गई, उसकी क्षमा मांगती हूँ, तब सर्प बोला- अच्छा, तू आज से मेरी बहन हुई और मैं तेरा भाई हुआ तुझे जो मांगना हो, मांग ले वह बोली- भैया ! मेरा इस दुनिया में कोई नहीं है, अच्छा हुआ जो तू मेरा भाई बन गया

 महादेव भगवन के शिवलिंग पर भी विराजमान होते है,नागदेवता...
कुछ दिन व्यतीत होने पर वह सर्प मनुष्य का रूप रखकर उसके घर आया और बोला कि 'मेरी बहन को भेज दो !' सबने कहा कि 'इसके तो कोई भाई नहीं था, तो वह बोला- मैं दूर के रिश्ते में इसका भाई हूं, बचपन में ही बाहर चला गया था। उसके विश्वास दिलाने पर घर के लोगों ने छोटी को उसके साथ भेज दिया उसने मार्ग में बताया कि 'मैं वहीं सर्प हूं, इसलिए तू डरना नहीं और जहां चलने में कठिनाई हो वहां मेरी पूंछ पकड़ लेना शर्प के कहे अनुसार ही उसने किया और इस प्रकार वह उसके घर पहुंच गई वहां के धन-ऐश्वर्य को देखकर वह चकित हो गई

एक दिन सर्प की माता ने उससे कहा- 'देश परंतु सर्प के समझाने पर शांत हो गई तब सर्प ने कहा कि बहिन को अब उसके घर भेज देना चाहिए तब सर्प और उसके पिता ने उसे बहुत सा सोना, चांदी, जवाहरात, वस्त्र-भूषण आदि देकर उसके घर पहुंचा दिया। इतना ढेर सारा धन देखकर बड़ी बहू ने ईर्ष्या से कहा- भाई तो बड़ा धनवान है, तुझे तो उससे और भी धन लाना चाहिए सर्प ने यह वचन सुना तो सब वस्तुएं सोने की लाकर दे दीं यह देखकर बड़ी बहू ने कहा- 'इन्हें झाड़ने की झाड़ू भी सोने की होनी चाहिए' तब सर्प ने झाडू भी सोने की लाकर रख दी
 नागपंचमी पर नाग की कहानी...
सर्प ने छोटी बहू को हीरा-मणियों का एक अद्भुत हार दिया था उसकी प्रशंसा उस देश की रानी ने भी सुनी और वह राजा से बोली कि- सेठ की छोटी बहू का हार यहां आना चाहिए' राजा ने मंत्री को हुक्म दिया कि उससे वह हार लेकर शीघ्र उपस्थित हो ! मंत्री ने सेठ जी से जाकर कहा कि 'महारानी जी छोटी बहू का हार पहनेंगी, वह उससे लेकर मुझे दे दो ' सेठ जी ने डर के कारण छोटी बहू से हार मंगाकर दे दिया

छोटी बहू को यह बात बहुत बुरी लगी, उसने अपने सर्प भाई को याद किया और आने पर प्रार्थना की- भैया ! रानी ने हार छीन लिया है, तुम कुछ ऐसा करो कि जब वह हार उसके गले में रहे, तब तक के लिए सर्प बन जाए और जब वह मुझे लौटा दे तब हीरों और मणियों का हो जाए सर्प ने ठीक वैसा ही किया जैसे ही रानी ने हार पहना, वैसे ही वह सर्प बन गया यह देखकर रानी चीख पड़ी और रोने लगी

यह देख कर राजा ने सेठ के पास खबर भेजी कि छोटी बहू को तुरंत भेजो सेठ जी डर गए कि राजा न जाने क्या करेगा ? वे स्वयं छोटी बहू को साथ लेकर उपस्थित हुए राजा ने छोटी बहू से पूछा- तुने क्या जादू किया है, मैं तुझे दंड दूंगा छोटी बहू बोली- राजन ! धृष्टता क्षमा कीजिए, यह हार ही ऐसा है कि मेरे गले में हीरों और मणियों का रहता है और दूसरे के गले में सर्प बन जाता है यह सुनकर राजा ने वह सर्प बना हार उसे देकर कहा- अभी पहनकर दिखाओ छोटी बहू ने जैसे ही उसे पहना वैसे ही हीरों-मणियों का हो गया

यह देखकर राजा को उसकी बात का विश्वास हो गया और उसने प्रसन्न होकर उसे बहुत सी मुद्राएं भी पुरस्कार में दी। छोटी वह अपने हार और इन सहित घर लौट आई उसके धन को देखकर बड़ी बहू ने ईर्ष्या के कारण उसके पति को सिखाया कि छोटी बहू के पास कहीं से धन आया है यह सुनकर उसके पति ने अपनी पत्नी को बुलाकर कहा- ठीक-ठीक बता कि यह धन तुझे कौन देता है ? तब वह सर्प को याद करने लगी। तब उसी समय सर्प ने प्रकट होकर कहा- यदि मेरी धर्म बहन के आचरण पर संदेह प्रकट करेगा तो मैं उसे खा लूं यह सुनकर छोटी बहू का पति बहुत प्रसन्न हुआ और उसने सर्प देवता का बड़ा सत्कार किया उसी दिन से नागपंचमी का त्योहार मनाया जाता है और स्त्रियां सर्प को भाई मानकर उसकी पूजा करती हैं

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