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सोमवार, 13 जुलाई 2020

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी की काबिल टीम-11 ले रही है, सम्राट तुगलक जैसे फैसले

वातानुकूलित वातावरण की बनी रणनीति धरातल पर हो जाती है,फेल...
"जनता कर्फ्यू की सफलता से गदगद होकर पीएम मोदी 21दिनों का पहला लॉकडाउन 24मार्च शाम 8 बजे लगाने की थी,घोषणा...

सीएम योगी भी जनता कर्फ्यू की सफलता की तरह शनिवार व रविवार के प्रथम मिनी लॉक डाउन की सफलता के बाद मुख्यमंत्री टीम-11ने लिया,मिनी लॉकडाउन का फैसला...
मिनी लॉकडाउन पर रणनीति बनाते हुए सूबे के मुख्या योगी आदित्यनाथ जी की टीम-11
"उत्तर प्रदेश की जनता का सीएम योगी से सवाल कि सोमवार 5 बजे सुबह से शुक्रवार रात 10बजे शाम तक कोरोना कुम्भकर्ण की तरह क्या सोता रहेगा और शुक्रवार शाम को 10बजे कोरोना वायरस जग जायेगा ? शासन की मंशा के मुताविक कोरोना वायरस इस अवधि में क्षेत्र भ्रमण पर निकलेगा और सोमवार सुबह 5बजे तक गस्त पर रहेगा ! इसी वजह से शनिवार और रविवार सम्पूर्ण लॉकडाउन रहेगा ! योगी टीम-11 ने इसीलिए इसे मिनी लॉक डाउन का नाम दिया है ! प्रदेश की जनता के सामने शनिवार और रविवार को लॉक डाउन करके योगी सरकार की नौकरशाही अपनी नाकामियों को छिपाना चाहती है..." 

सीएम योगी की टीम-11से लगता है कोरोना वायरस संक्रमण का नया अनुबंध हुआ है। उत्तर प्रदेश की जनता इस नए अनुबंध को समझने में अभी तक विफल रही है। वो नहीं समझ पा रही है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी की काबिल टीम-11 जिस तरह तुगलक जैसे फैसले ले रही है। उससे आम जनता के साथ-साथ फील्ड में काम करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों में भी इस फैसले से बड़ा कन्फ्यूजन है। पर फील्ड के अधिकारियों और कर्मचारियों की दशा तेली के बैल सरीखी हो चुकी है। उनकी मजाल नहीं कि वो कुछ बोल सके। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में भी ये अधिकारीगण मुख्यमंत्री की टीम-11के समक्ष अपनी बात रख पाते होंगे। 

प्रदेश की नौकरशाही में दो तरह के कार्य करने वाले लोग होते हैं। एक ऐसा वर्ग है जो फील्ड में कार्य करता है और दूसरा ऐसा वर्ग है जो वातानुकूलित वातावरण में रह कर रणनीति तय करता है। इन दोनों वर्ग के अलावा एक तीसरा वर्ग होता है जो कार्य करते तो देखा नहीं जाता। हाँ एक जगह वो दिखता है वो जगह होती है बड़े हाकिमों के कान के पास कनफुसकी करने वालों की ! यही वर्ग पूरी ब्यवस्था को जकड़ कर बैठा हुआ है। जिला हो या मंडल अथवा पंचम तल ! हर जगह ये बिना देखे जाने वाला वर्ग प्रभावशाली स्थिति में दिखता है। 

जिस तरह संगम नगरी में गंगा जी और यमुना जी का मिलन तो दिख जाता है, परन्तु सरस्वती जी विलुप्त दशा में होती हैं ठीक उसी तरह नौकरशाही में तीसरा वर्ग ब्यवस्था में कहीं नजर नहीं आता। परन्तु फैसले ऊल जलूल ब्यवस्था में बिना दिखे वही कराता है और गलत फैसले से जग हंसाई भी कराता है। चूँकि उसकी तो अपनी कोई निजी छवि होती नहीं ! इसलिए सरकार और सरकार के उस दो वर्ग की नाक कटती है तो कट जाए ! उसका क्या...???

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