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बुधवार, 3 जून 2020

दुर्दांत डकैत ददुआ की विसात पर बेटा, भाई व भतीते ने चमकाई अपनी राजनीति

बीहड़ में जरायम की दुनिया का बेताज़ बादशाह रहा डकैत ददुआ का पूरा परिवार सपा सुप्रीमों मुलायम सिंह की कृपा से बन गया माननीय...
दुर्दांत डकैत ददुआ का बेटा बीर सिंह और भाई बाल कुमार 
"राजनीति में मौकापरस्ती तो सभी करते हैं,परन्तु समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव जिस आदर और सत्कार के साथ बाल कुमार पटेल को जेल में जाकर मिले और उनके साथ कंधे से कन्धा मिलाकर उनका साथ दिया और उनके मिर्जापुर से सांसद बनाया वही बाल कुमार पटेल समाजवादी पार्टी से टिकट कटते ही सपा को लात मारकर कांग्रेस से हाथ मिला लिया। सत्ता की चाहत चाहे जो करा दे..."
"दुर्दांत डकैत ददुआ के साये में जिस तरह उसका सगा भाई बाल कुमार पटेल राजनीति के अखाड़े में राजनीतिक पार्टियों से सौदेबाजी कर पूरे खानदान को माननीय बना डालने की चाल चली उससे राजनीतिक पार्टियों के दिग्गजों को भी ऐसे खुंखार डकैतों के परिवारीजनों से सावधान रहना चाहिए..."
 उत्तर प्रदेश में बीहड़ इलाके में खुंखार डाकू शिव कुमार पटेल उर्फ ददुआ की आड़ में उसके सगे भाई बाल कुमार पटेल उसके आतंक से अपनी पहचान बनाने के लिए राजनीति का रास्ता अख्तियार किया। मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की राजनीति में पर्दे के पीछे से ददुआ की हनक पंचायत चुनाव से लेकर विधानसभा और लोकसभा के चुनाव तक होती थी। बिना ददुआ के आशीर्वाद लिये बीहड़ में कोई चुनाव लड़ने की सोच भी नहीं सकता था। बड़े नेता भी बीहड़ के दुर्दांत डकैत ददुआ को राजनीतिक संरक्षण देते रहे। सबसे पहले ददुआ की सांठगाँठ बसपा सुप्रीमों मायावती से हुई और बाद में बीहड़ से विशेष लगाव रखने वाले नेता सपा मुखिया मुलायम सिंह से हो गयी। ये संधि बसपा सुप्रीमों मायावती को रास न आई और वर्ष-2007 में सत्ता संभालते ही मायावती अपने चहेते पुलिस अधिकारी बृजलाल को किसी भी दशा में ददुआ के इनकाउंटर की जिम्मेवारी सौंपी।


पूर्व सांसद बाल कुमार पटेल 
22 जुलाई, 2007 का वह दिन जब बीहड़ का बेताज बादशाह खुंखार डकैत ददुआ एसटीएफ के साथ मुठभेड़ में ढेर कर दिया गया। ददुआ के मरने के बाद उनका सगा भाई बाल कुमार पटेल और बेटा बीर सिंह पटेल की हालत पतली हो गई और बसपा सुप्रीमों मायावती के शासन में भीगी बिल्ली बनकर दुपक गए थे। रायबरेली में कोयले आदि का ब्यवसाय करने वाले बाल कुमार पटेल पर मायावती का शिकंजा कसा गया और बाल कुमार को भी कई मुकदमों में वांछित कर उसे सलाखों के पीछे पहुँचा दिया गया। उस समय सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव और शिवपाल यादव के साथ बाल कुमार पटेल से में मिलने जेल तक गए और आश्वस्त किया कि वो उनके साथ है। मुलायम सिंह यादव पटेल नेता के रूप में बाल कुमार पटेल को समाजवादी पार्टी का प्रदेश सचिव बनाया। क्योंकि पट्टी विधानसभा से वर्ष- 2007 में सपा मुखिया मुलायम सिंह ने बाल कुमार पटेल को समाजवादी पार्टी से टिकट दिया। सेटिंग विधायक राजेंद्र प्रताप उर्फ मोती सिंह से कड़ी टक्कर हुई। क्योंकि पट्टी विधानसभा में पटेल/कुर्मी मतदाताओं की अच्छी खासी संख्या है।

सत्ता की खातिर समाजवादी पार्टी को लात मारकर कांग्रेस में पहुँचे बाप-बेटे 
प्रतापगढ़ की पट्टी विधानसभा से बाल कुमार पटेल वर्ष-2007 में विधायक तो नहीं बन सके, परन्तु सपा मुखिया मुलायम सिंह की अति कृपा पर सामन्य लोकसभा चुनाव- 2009 में मिर्जापुर संसदीय सीट से बाल कुमार पटेल को समाजवादी पार्टी का टिकट दिया गया और मिर्जापुर में पटेल/कुर्मी बिरादरी की अधिकता होने की वजह से बाल कुमार पटेल सांसद बन गए। इधर चित्रकूट से ददुआ का बेटा जिला पंचायत अध्यक्ष बन बैठा। वर्ष-2012 में बाल कुमार पटेल अब प्रदेश में पटेलों/कुर्मियों के नेता बन चुके थे और सपा मुखिया मुलायम सिंह से अच्छे तालुकात होने के कारण बाल कुमार पटेल ने पट्टी विधानसभा से अपने बेटे राम सिंह पटेल को वर्ष-2012 में समाजवादी पार्टी से टिकट दिलाकर चुनाव में विधायक राजेंद्र प्रताप उर्फ मोती सिंह को शिकस्त देने में सफल रहे। बाल कुमार पटेल अपने भतीजे बीर सिंह पटेल को चित्रकूट सदर से समाजवादी पार्टी का विधानसभा उम्मीदवार बनाकर उसे भी माननीय बना डाला। अब बीहड़ का दुर्दांत डकैत ददुआ भले ही इनकाउंटर में मार गिराया गया,परन्तु बीहड़ से मोहब्बत रखने वाले सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव की कृपा से डकैत ददुआ का पूरा परिवार माननीय बन गया और सत्ता सुख भोगते हुए राजनीतिक पकड़ वाला हो गया।

मृतक दुर्दांत डकैत ददुआ और उसका सगा भाई पूर्व सांसद बाल कुमार पटेल
शिव कुमार पटेल उर्फ ददुआ के भाई बाल कुमार पटेल अब बुंदेलखण्ड में एक कद्दावर और कुर्मी नेता बनकर उभरा बालकुमार पटेल को इस बात का ज्ञान हो गया कि राजनीति में जिन कन्धों के सहारे सत्ता का सिंघासन हासिल किया जाता है यदि मौका मिले तो उस कंधे को ही सबसे पहले लात मारकर धराशाई कर देना चाहिए  सत्ता पाने के लिए पार्टी और मित्रता को दरकिनार भी करना पड़े तो उसमें नहीं चूकना चाहिए। बाल कुमार पटेल भी वर्ष-2019 के लोकसभा चुनाव में सपा सुप्रीमों अखिलेश यादव के साथ वही किया। चूँकि समाजवादी पार्टी में मुलायम सिंह यादव के हाथ से कमान जा चुकी थी और बाल कुमार पटेल का दोस्ताना सम्बन्ध मुलायम सिंह से था न कि अखिलेश यादव से ! बाल कुमार पटेल चित्रकूट बांदा से समाजवादी पार्टी का लोकसभा टिकट चाहते थे और उनका टिकट काटकर अखिलेश यादव भाजपा से सांसद श्यामा चरण गुप्ता को समाजवादी पार्टी में शामिल कराकर उन्हें अपना उम्मीदवार बना लिया। फिर क्या था ? बाल कुमार पटेल और उनका पुत्र राम सिंह पटेल जो समाजवादी पार्टी का प्रतापगढ़ जनपद का जिलाध्यक्ष था का साथ छोड़कर कांग्रेस का दामन थाम लिया है बाल कुमार पटेल बांदा-चित्रकूट इलाके में डकैत रहे ददुआ के भाई हैं   
समाजवादी पार्टी का जिलाध्यक्ष बनने पर राम सिंह का प्रतापगढ़ में ऐसे हुआ था स्वागत 
बुंदेलखड में सपा के कद्दावर और कुर्मी नेता बाल कुमार पटेल ने लोकसभा में टिकट न मिलने से नाराज होकर सपा मुखिया अखिलेश यादव का साथ छोड़कर कांग्रेस का दामन थाम लिया था बाल कुमार पटेल बांदा-चित्रकूट इलाके में खुंखार डकैत रहे ददुआ का भाई है बाल कुमार पटेल यूपी के बांदा से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ने की शर्त पर ही कांग्रेस में शामिल हुए थे। बांदा लोकसभा सीट से बाल कुमार पहले ही चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे थे, लेकिन अखिलेश यादव ने ऐन वक्त पर बीजेपी से आए श्यामा चरण गुप्ता को उम्मीदवार घोषित कर दिया इससे नाराज होकर उन्होंने पहले ही सपा को अलविदा कहने का मन बना लिया था। परन्तु मजेदार बात ये रही कि जिस दुर्दांत डकैत ददुआ के बल पर बाल कुमार पटेल स्वयं मिर्जापुर से सांसद बने और बेटे को पट्टी विधानसभा से विधायक बनाने में सफलता अर्जित किये, उसी ददुआ का बेटा बीर सिंह पटेल आज भी समाजवादी पार्टी में बना हुआ है उसे समाजवादी पार्टी ने लोकसभा चुनाव 2019 में दुर्दांत डकैत ददुआ के बेटे वीर सिंह पटेल को सपा-बसपा गठबंधन ने बांदा जिले की सीमा से सटे खजुराहो (मप्र) से लोकसभा का प्रत्याशी बनाया था 
सपा मुखिया अखिलेश यादव के साथ दुर्दांत डकैत ददुआ पुत्र बीर सिंह पटेल 
वर्ष-2003 में बीर सिंह पटेल सपा की सदस्यता ग्रहण करने के बाद किसी अन्य पार्टी में शामिल नहीं हुए। बांदा लोकसभा सीट से टिकट काटने पर जब चाचा बाल कुमार पटेल पूर्व सांसद व बाल कुमार पटेल के पुत्र  पूर्व विधायक राम सिंह पटेल के सपा छोड़ने के दौरान यह चर्चा रही कि अब बीर सिंह पटेल भी पार्टी छोड़ेंगे, लेकिन उन्होंने फिलहाल यह कदम नहीं उठाया। चर्चा थी कि समाजवादी पार्टी ने लोकसभा चुनाव वर्ष-2019 में दुर्दांत डकैत ददुआ के बेटे वीर सिंह पटेल को सपा-बसपा गठबंधन ने बांदा जिले की सीमा से सटे खजुराहो (मप्र) से लोकसभा का प्रत्याशी महज इसलिए बनाया था कि पूर्व विधायक बीर सिंह पटेल के चाचा व ददुआ के भाई बाल कुमार के सपा छोड़ने से पार्टी को होने वाली संभावित क्षति को रोका जा सके। वर्ष-2004 में बीर सिंह पटेल चित्रकूट जिले से जिला पंचायत सदस्य चुने गए और बाद में जिला पंचायत के अध्यक्ष पद के चुनाव में वो निर्विरोध जिला पंचायत अध्यक्ष चुने गए। वर्ष-2009 तक बीर सिंह पटेल चित्रकूट से जिला पंचायत अध्यक्ष रहे। इसके बाद के जिला पंचायत सदस्य चुनाव में उनकी पत्नी ममता सिंह जीतीं। वर्ष-2012 में सदर विधानसभा से सपा से टिकट मिला। जिस पर बीर सिंह को जीत मिली। वर्ष-2017 के विधानसभा चुनाव में इसी सीट के लिए टिकट को लेकर बीर सिंह पटेल और आर के पटेल व उनके पुत्र सुनील पटेल के बीच तगड़ी प्रतिस्पर्धा चली, लेकिन समाजवादी पार्टी के सुप्रीमों अखिलेश यादव ने टिकट बीर सिंह पटेल को ही दिया। परन्तु बीर सिंह पटेल इस बार चुनाव हार गए।  
"बाल कुमार पटेल को सपा मुखिया मुलायम सिंह ने दस्यु सुंदरी फूलन देवी की तरह वर्ष-2009 में पटेल/कुर्मी बाहुल्य मिर्जापुर लोकसभा सीट से सांसद उम्मीदवार बनाया और बाल कुमार पटेल देश की सबसे बड़े लोकतंत्र के मंदिर में जा पहुँचे और गले में माननीय का तमगा लटका लिए वर्ष-2014 के लोकसभा चुनाव में सपा ने बाल कुमार पटेल को बाँदा लोकसभा सीट से अपना प्रत्याशी बनाया था, लेकिन मोदी लहर में वो चुनाव जीत नहीं सके। वर्ष-2019 के लोकसभा चुनाव के लिए बाल कुमार पटेल समाजवादी पार्टी में टिकट की दावेदारी कर रहे थे, लेकिन अखिलेश यादव ने उन पर भरोसा नहीं जताया है। जिससे नाराज होकर बाल कुमार पटेल दिल्ली में तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, महासचिव प्रियंका गांधी से मुलाकात की। इसके बाद बालकुमार पटेल और पट्टी से उनके विधायक रहे पुत्र राम सिंह पटेल के साथ दोनों लोग कांग्रेस में शामिल होने की पठकथा लिखी गई। बाल कुमार पटेल उत्तर प्रदेश में कुर्मियों के बड़े नेता बनकर उभर रहे थे, इसी गुणागणित के बल पर कांग्रेस के रणनीतिकार बाल कुमार पटेल और उनके बेटे राम सिंह पटेल को कांग्रेस में शामिल ही नहीं किया,बल्कि उनकी मनपसंदीदा लोकसभा सीट बांदा से बाल कुमार पटेल को अपना उम्मीदवार बनाया। खासकर बुंदेलखंड में कुर्मी समुदाय के बीच बाल कुमार पटेल का पटेल/कुर्मी विरादरी में बड़ा प्रभाव है "
कांग्रेस में शामिल होने के बाद हार्दिक पटेल के स्वागत समारोह में बाल कुमार व राम सिंह 
समाजवादी पार्टी से टिकट न पाने पर नाराज बाल कुमार पटेल अपने बेटे राम सिंह पटेल के साथ जब कांग्रेस में शामिल हुए तो राम सिंह पटेल उस वक्त प्रतापगढ़ जिला के सपा जिला अध्यक्ष रहे भईया राम पटेल को जब जिलाध्यक्ष पद से समाजवादी पार्टी ने विवादोंपरांत हटाया तो प्रतापगढ़ में पट्टी विधान सभा, विश्वनाथगंज विधानसभा सहित रामपुरखास विधानसभा में पटेलों/कुर्मियों की बाहुल्यता के आधार पर पटेल वोटबैंक समाजवादी पार्टी में बरकरार रहे इसी उद्देश्य से राम सिंह पटेल को प्रतापगढ़ की जिलाध्यक्ष की कमान सौंपी गई थी। राम सिंह पटेल प्रतापगढ़ सपा के टिकट से पट्टी विधानसभा सीट से वर्ष-2012 में विधायक चुने गए। राम सिंह पटेल वर्ष-2017 के चुनाव में बीजेपी के राजेन्द्र प्रताप उर्फ मोती सिंह के हाथों बहुत कम मतों से हार गए थे बाल कुमार पटेल ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत बसपा से की थीउन्होंने बसपा की टिकट से इलाहाबाद की मेजा सीट से चुनाव लड़ा था, लेकिन जीत नहीं सके हालांकि बाद में वह सपा में शामिल हो गए ददुआ के इनकाउंटर के बाद बाल कुमार मिर्जापुर से समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह के विशेष आशीर्वाद से सपा के उम्मीदवार हुए और चुनाव जीतकर दस्यु सुंदरी फूलन देवी की तरह सांसद बन गए


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