जानिये गंगा दशहरा के महत्व को और इससे जुड़े सुंदर संदेश को...

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 गंगा दशहरा हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योहार है, किसी भी नदी पर जाकर माँ भगवती गंगा को याद करे तब भी आपको वही फल प्राप्त होगा...!!!

गंगा दशहरा की हार्दिक शुभकामनाएं...!!!
ज्येष्ठ मास के दस योगों में मनुष्य स्नान करके सब पापों से छूट जाता है। इसका मतलब ये नहीं कि एक हाथ से पाप भी करते रहे और फिर गंगा स्नान कर लेंगे तो माँ गंगा हमारे पापो का नाश कर देगी। खुद को धोखे में  मत रखिये। न गंगा में स्नान करने से आप आने सभी पापो से मुक्त हो पायेंगे  और न ही माँ गंगा से कहने पर कि माँ आज तक जो पाप मुझसे हुए हैं, उन्हें माफ कर दो ! जब तक आप पश्चताप की अग्नि में झुलस न जाए तब तक आप स्वयं को निर्दोष मानना और पाप मुक्त मानना गलत है। पुराण में लिखा हुआ है कि जो मनुष्य इस दशहरा के दिन गंगा के पानी में खड़ा होकर दस बार इस स्तोत्र को पढ़ता है चाहे वो दरिद्र हो, चाहे असमर्थ हो वह भी प्रयत्नपूर्वक गंगा की पूजा कर उस फल को पात है। यह दशहरा के दिन स्नान करने की विधि पूरी हुई। स्कंद पुराण में कहा गया है कि दशहरा नाम का गंगा स्तोत्र और उसके पढ़ने की विधि सब अवयवों से सुंदर तीन नेत्रों वाली चतुर्भुजी जिसके चारों भुज, रत्न कुंभ, श्वेत कमल, वरद और अभय से सुशोभित हैं, सफेद वस्त्र पहने हुई है।

किसी भी नदी की पवित्र धारा में ध्यान करके भक्तिपूर्व मंत्र से अर्चना करें और माता गंगा को मन से करे याद !

ॐ नमो भगवति हिलि हिलि मिलि मिलि गंगे माँ पावय पावय स्वाहा' यह गंगाजी का मंत्र है...
अथवा
ॐ नमो गंगाये विश्व रूपिडो नारायणी नमो नमः। किसी 1 मन्त्र का 108 बार जाप करे...

" इसका अर्थ है कि, हे भगवति गंगे ! मुझे बार-बार मिल, पवित्र कर, पवित्र कर, इससे गंगाजी के लिए पंचोपचार और पुष्पांजलि समर्पण करें। ऐसा करनेवाला महापातकों के बराबर के दस पापों से छूट जाता है।ऐसा इसलिए कहा गया है ताकि आप अपने आस पास की नदियों का ध्यान रखे और मां गंगा की तरह उनको भी स्वच्छ रख सके,समाज के लिए ऐसा काम करने वाला स्वयं पापो से मुक्त हो जाता है। "

गंगा दशहरा से जुड़ा हुआ सुन्दर सन्देश ...!!!
हमारे हिन्दू धर्मं के त्योहारों में कुछ न कुछ सन्देश जरूर होता है, ऐसे ही गंगा दशहरा का सन्देश भी बहुत ही सुन्दर है, जो हमें बताता है कि यदि हम अपने पास-पड़ोस, अपने राज्य की नदियों को स्वच्छ रखे तो हमारी नदियां, माँ गंगा जैसी पवित्र रहेंगी और इससे हमारा जल प्रदूषण पर भी नियंत्रण रहेगा और सभी जानते हैं कि जल ही जीवन है, फिर चाहे वो मनुष्य का हो या पशु का ! जल ही हमारे जीवन का आधार है। इस सन्देश का आप स्वयं पालन करें और दूसरो को भी इसके बारे में बताएं।

rameshrajdar

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