कंगाल हुई केजरीवाल सरकार की केंद्र से गुहार, सैलरी देने को पैसे नहीं, 5 हजार करोड़ की तुरंत करें मदद

8:15:00 pm 0 Comments Views

➧केंद्रीय वित्त मंत्री (निर्मला सीतारमण) को चिट्ठी लिखकर दिल्ली के लिए 5 हज़ार करोड़ रुपए की राशि की मांग की है- उप मुख्यमंत्री/वित्तमंत्री, दिल्ली सरकार
➧दिल्ली सरकार ने कोरोना वायरस लॉकडाउन के बीच केंद्र की मोदी सरकार से मदद की गुहार लगाई। 
➧कोरोना संक्रमण के संकट से लड़खड़ाई दिल्ली सरकार की अर्थव्यवस्था, 
➧दिल्ली सरकार ने मई महीने में कोरोना सेस से कमाए 161 करोड़ रुपये

मनीष सिसौदिया, उप मुख्यमंत्री/वित्तमंत्री, दिल्ली सरकार
राजनीति में कुछ दिनों तक तो नटवरलाल बना जा सकता है, परन्तु हकीकत बहुत जल्द सामने होती है। दिल्ली सरकार और उसके मुखिया केजरीवाल की भी हकीकत अब जनता के सामने है। दिल्ली की जनता को चुनाव में लालच का लॉलीपॉप दिखाकर सबकुछ फ्री करने का सब्ज़बाग सजाकर तीसरी बार केजरीवाल और उसकी टीम चुनाव में तो सफल हो गए, परन्तु कोरोना संक्रमण काल में दिल्ली सरकार की चड्ढी उतर गई। कटोरा हाथ में आ गया। भिखारियों की तरह केंद्र सरकार से भीख माँगने का दृश्य देखकर दिल्ली की जनता खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही है। दिल्ली की जनता जान चुकी है कि वह आपियों के हाथों ठगी जा चुकी है। उसे मुफ्त में केजरीवाल की सरकार कुछ भी देने वाली नहीं है। क्योंकि दिल्ली की सरकार केजरीवाल खुद ही कंगाल हो चुकी है।

अभी ज्यादा समय नहीं हुआ। लगभग 6 महीने पहले दिल्ली की विधानसभा में राजनीति का नटवरलाल केजरीवाल खुद अपनी पीठ ठोंकते हुए अपनी ईमानदारी और वित्तीय प्रबंधन का ढोल पीट रहा था। गरजते हुए दावा कर रहा था कि उसकी सरकार देश के इतिहास की पहली ऐसी सरकार है जो लगातार 5 साल लाभ में रही है। लेकिन वही केजरीवाल कल केन्द्र सरकार से यह गुहार लगाते हुए 5 हजार करोड़ रुपये मांग रहा था कि मुझे पैसा दो क्योंकि मेरी सरकार इतनी कंगाल हो गई है कि उसके पास कर्मचारियों का वेतन देने के लिए भी पैसे नहीं बचे हैं। दिल्ली सरकार का मुखिया और उसका अभिन्न सहयोगी उप मुख्यमंत्री/वित्तमंत्री/शिक्षामंत्री मनीष सिसौदिया जिस अंकगणित के साथ 5 हजार करोड़ की माँग केंद्र सरकार से किया है, उससे उसकी स्वयं की नाक कट गई है।

उल्लेखनीय है कि दिल्ली से उत्तर प्रदेश की जनसंख्या 7 गुना ज्यादा है, बिहार की जनसंख्या 4 गुना ज्यादा है और उड़ीसा की जनसंख्या डेढ़ गुना ज्यादा है। इन तीनों राज्यों को अपने पुलिस बल का खर्च भी स्वयं उठाना पड़ता है। जबकि दिल्ली को यह नहीं उठाना पड़ता है। उत्तर प्रदेश, बिहार व उड़ीसा की आर्थिक स्थिति भी अच्छी नहीं है। लेकिन इसके बावजूद इन तीनों राज्यों में से किसी ने भी यह रोना नहीं रोया कि हमारी सरकार इतनी कंगाल हो गई है कि कर्मचारियों को वेतन नहीं दे सकती। इसके बजाय कोरोना संकट के दौर में यह तीनों राज्य लाखों मजदूरों का किराया देकर उन्हें अपने राज्य में वापस लेकर आए और करोड़ों गरीबों को सीधी आर्थिक सहायता भी दी। 

ईमानदारी की बात तो ये है कि केजरीवाल की सरकार एक षणयंत्रकारियों की तरह उत्तर प्रदेश और विहार सहित अन्य राज्यों के प्रवासियों को दिल्ली से भगाने की साजिश भी कर चुकी है। लाखों लोगों को दिल्ली बॉर्डर पर भेजकर कोरोना संक्रमण के दौरान भी जमकर राजनीति की और अपना घिनौना चेहरा जनता को दिखाया था। दिल्ली के निजामुद्दीन में मरकज़ का आयोजन कराने में ढुलमुल रवैया अख्तियार किया और तबलीगी जमातियों से सम्बंध में कड़ुवाहट न आये इसलिये उन्हें देश के सभी राज्यों में कोरोना संक्रमण फैलाने के लिए बिना रोकटोक जाने दिया। जब देश में कोरोना संक्रमित तबलीगी जमाती पाए गए तो केजरीवाल सरकार उसका भी ठीकरा केंद्र सरकार पर फोड़ दिया। यानि सबसे सचरित्रवान यदि कोई सरकार है तो वह केजरीवाल की सरकार है। 

➤इतनी जल्दी कंगाल कैसे हो गई सरकार केजरीवाल...???



"लॉकडाउन के चलते आर्थिक तंगी से जूझ रही दिल्ली सरकार ने केंद्र से तुरंत 5 हजार करोड़ रुपये की राशि उपलब्ध कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि आपदा राहत कोष से अन्य राज्यों को केंद्र सरकार से मदद मिली है, लेकिन दिल्ली सरकार को कोई मदद नहीं मिली। टैक्स में आई कमी से जूझ रही दिल्ली सरकार ने पैसे जुटाने के लिए जो कदम उठाए हैं, उनमें राजधानी में शराब पर 70%तक प्रिंट रेट से अधिक दामों पर उसकी बिक्री कराने का निर्णय लिया और बाद में जग हँसाई शुरू होने पर उसे कम किया। वहीं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी ने केजरीवाल सरकार से अब तक दिल्ली में कोरोना के खिलाफ लड़ाई में अस्पतालों पर कितना खर्च किया गया, उसका भी हिसाब मांगा। साथ ही दिल्ली की सरकार पर सवाल भी उठाये हैं कि क्या विज्ञापन बांटने के लिए दिल्ली सरकार केंद्र से मांग रही है, मदद : मनोज तिवारी।"

 भाजपा दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी 
केजरीवाल पर ऐसा कोई बोझ भी नहीं था। लेकिन आज वही केजरीवाल अपने कंगाल होने का नगाड़ा जोरशोर से पीट रहा है जो केवल 6 महीने पहले दिल्ली को देश की सबसे मालामाल सरकार घोषित करने डंका बजा रहा था। इस वीडियो में आप भी देखिये सुनिए उसका 6 महीने पहले का वह दावा जिसने सीना ठोक कर दहाड़ मारकर बड़ी ही गर्जना के साथ देश की जनता को बता रहा था। वह हकीकत महज छः माह में भी धराशाई हो गई। सारी अकड़ ढ़ीली हो गई। केंद्र सरकार से दिल्ली सरकार का मुखिया अरविंद केजरीवाल और उप मुख्यमंत्री/वित्तमंत्री मनीष सिसौदिया ऐसे मदद माँग रहे हैं, जैसे केंद्र सरकार से अपनी मदद नहीं बल्कि अपना दिया हुआ धन वापस माँग रहा हो !

rameshrajdar

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