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शनिवार, 6 जून 2020

कोरोना संक्रमण काल में दिल्ली सरकार के मुखिया अरविन्द केजरीवाल के निर्णय और जानिये कैसे रही उनके सरकार की स्थिति ?

संवैधानिक पदों पर बैठा ब्यक्ति कैसा दे देता है गैर जिम्मेदार बयान और बेहयाई और वेशर्मी की इन्तहा पार कर देश की जनता के आँखों में झोंकता है धूल...

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल
संवैधानिक और जिम्मेदार पदों पर आरूढ़ ब्यक्ति जब अपनी जिम्मेदारियों से भागने लगे तो समझ लीजिये कि स्थिति ठीक नहीं है दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का एक का इंटरव्यू एक TV न्यूज चैनल पर देख रहा था। जिसे देखकर दिल्ली की जनता के मन ग्लानि जरुर हुई होगी चूंकि राज्य के मुख्यमंत्री से राज्य की जनता को बहुत अपेक्षाएं होती हैं और वो मुख्यमंत्री एक नेता की तरह कुछ भी बोल जाए ये उचित नहीं। सीएम केजरीवाल ने कहा कि कोरोना वायरस "माता का निकास" जिसे चिकित्सकीय भाषा में चेचक कहते हैं। कोविड-19 कोरोना वायरस भी चेचक के समान ही है। उन्होंने समझाया कि जैसे हम लोग छोटे थे। माता का निकास होता था और उस प्रकोप से बचने के लिए पूजा-पाठ कर उनसे अनुनय विनय और क्षमा याचना कर अपने प्रकोप को शांत होने की प्रार्थना की जाती थी। माली बुलाकर माता रानी के गीत सुनाकर उन्हें प्रसन्न किया जाता था। माता का निकास पूजा-पाठ और उनकी श्रद्धा के साथ-साथ उनकी आस्था, विश्वास एवं साफ-सफाई से ठीक हो जाता था। उन्होंने ने यह भी कहा कि दिल्ली में कुछ लोग ही हॉस्पिटल में क्वारन्टीन हैं। बाकी हजारों लोंगो को सरकार ने घर पर ही क्वारन्टीन किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि आवश्यतानुसार डॉक्टर घर पर जाकर सावधानियों के बारे में बताते हैं। शायद इनके कहनें का आशय यह है कि जैसे माता के निकास पर माली आता था। वैसे डॉक्टर भी आते हैं अर्थात जैसे माली माता की पूजा अर्चना करता था, ठीक उसी प्रकार डॉक्टर भी "कोरोना वायरस" को निकास वाली माता की भाँति पूजा पाठ करता है।

दिल्ली के गैर जिम्मेदार मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल 
दिल्ली के सीएम केजरीवाल ने बड़े आत्मविश्वास से कहा कि कोरोना से डरने की जरूरत नहीं है। किसी अस्पलात में जाने की जरूरत नहीं है। घर में ही क्वारन्टीन रहें। ऐसा करने से कोरोना संक्रमण खुद हार कर अपनी आत्महत्या कर लेगा। लोंगो को दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल की बातों पर यकीन भी हुआ। वो उनके बताये नुस्खे पर अमल भी किये।परन्तु दूसरी तरफ स्वयं केजरीवाल सरकार ने कोरोना के डर से दिल्ली का बार्डर सील कर दिये। अब दिल्ली की जनता हैरान व परेशान हो उठी। उसे नहीं पता था कि जिसे वो अपना भाग्य विधाता मानकर कुछ लालच में दिल्ली की बागडोर केजरीवाल के हाथ में दी है वह राष्ट्रीय आपदा के काल में भी दोगली बात करके जनता का मजाक उड़ाएगा। उसे मरने के लिए यूँ ही छोड़ देगा। ऐसे ही नेता राजनीति का बाजा बजाते हैं और जनता उस पर भांगड़ा डांस कर जमकर नाचती है।जिस नेता के कथनी एवं करनी में विल्कुल सामंजस न हो और वह जनता की आंख में धूल झोंकने वाला हो ! उस राज्य की जनता का भला कभी हो ही नहीं सकता। चूँकि जनता भी लालच में आकर ऐसे नेता का चुनाव कर सत्ता की चाभी उस वादे को पूरा करने के लिए देती है जो पूरा हो ही नहीं सकता।

भारत में कोरोना की भयावह स्थिति...
अभी तक कोरोना वायरस इतना भयावह था कि लिफ्ट की बटन छूने से हो जाता। सीढ़ी की रेलिंग छूने से हो जाता था। दीवाल छूने से हो जाता था। बर्तन छूने से हो जाता था। टैक्सी/कार/आटो में बैठने से हो जाता था। घर के बाहर झांकने से हो जाता था। अरे ! हम नेता हैं झूठ को सच एवं सच को झूठ बनाना हमारे बाएं हाथ का खेल है। क्योंकि अफवाह फैलाने की हमारे पास मशीन है एवं विभिन्न माध्यम हैं। सीधे-साधे भाईयों हम नेता लोग ऐसे ही कुर्सी पर नहीं पहुँच पाते। इस विद्या को सीखने में सालों साल लग जातें हैं। इसीलिये इस विद्या को बहुत कम लोग ही पूर्णतः सीख पाते हैं। क्योंकि बहुत से बेचारे सीधे लोग भी इस विद्या को सीखने आ जाते हैं, लेकिन पूरी जिंदगी जिंदाबाद एवं मुर्दाबाद में निकल जाती है। लेकिन ये विद्या सीख नहीं पाते। अरे भाइयों ! हम कामयाब नेता एवं पार्टी के पास बड़े-बड़े दिमाग वालो की पूरी टीम रहती है जो प्रतिदिन हम लोंगो को विभिन्न प्रकार की मक्कारी भरी जानकारियां एवं बारीकियां समझाते रहतें हैं और हम नेता लोग देखें नहीं 
कोरोना संक्रमण से निपटने के लिए ईलाज की ब्यवस्था 
देश की मोदी सरकार और राज्यों की सरकारों ने आम जनता (मजदूर) को कोविड-19 "कोरोना वायरस" नामक बीमारी से इतना डरा और घबड़वा दिया कि चारों ओर हाहाकार फैल गया। भोली-भाली जनता पैदल ही बिना किसी संसाधन के अपने घरों से निकल पड़ी। जरा सा बार्डर और चेकपोस्ट पर पुलिस की सख्ती क्या की वो बेचारे निरीह मजदूर और आम लोग तप अपनी जान की परवाह किये बगैर रेल की पटरी पर पैदल ही चलकर अपनी मंजिल की ओर बढ़ने लगे कईयों की तो रेल से कटकर मौत भी हो गई घर से निकलने के बाद प्रवासी लोग अपने परिवार में पहुँचने के लिए बेचैन हो रहे थे और सड़को पर कभी पैदल तो कभी जो भी मालवाहक वाहन दिखता और जितने भाड़े में वो तैयार होता तो वो प्रवासी मजदूर उस पर भूंसे की तरह लोग भरकर जाने लगे। उन मजदूरों और असहायों को भोजन और नाश्ते के लिए भी कोई ब्यवस्था न हुई। 

जब देश में राष्ट्रीय आपदा के आपत्तिकाल में सरकार को जनता के प्रति अपना कर्तब्य दिखाने और बजट को खर्च करने की बारी आई तो वह कंगाल हो गई जबकि हकीकत पर गौर फरमाएं तो इन्हीं मजदूरों के नाम पर लंच पैकेट, इनके रहने खाने और अन्य ब्य्वस्थाओं के नाम पर करोड़ों रुपये का बजट सिर्फ एक जिले से खारिज होकर अधिकारीयों नेताओं और उसकी ब्यवस्था से जुड़े लोगों में ईमानदारीपूर्वक बंट जाएगा और उसका कभी आडिट भी नहीं होगा और न ही खिन शिकायत की ब्यवस्था होगी भूख और प्यास से तड़पते किसी तरह अपने अपने घरों को पहुँच गए और कईयों की जिन्दगी सड़क पर ही दुर्घटना में भेंट चढ़ गयी। चारों तरफ कोहराम मच गया इन सभी घटनाओं को देश की मीडिया ने प्रकाशित भी किया और न्यूज़ चैनलों ने प्रमुखता से अपने-अपने चैनलों पर दिखाया भी, परन्तु सत्ता सुख में मदांध होकर बैठे धृतराष्ट्रों को ये सब दिखा ही नहीं या कह सकते हैं कि देखने के बाद वो इस तरफ ध्यान ही नहीं दिए

  मनीष सिसौदिया उप मुख्यमंत्री,दिल्ली सरकार...
"लॉकडाउन के चलते आर्थिक तंगी से जूझ रही दिल्ली सरकार ने केंद्र से तुरंत 5 हजार करोड़ रुपये की राशि उपलब्ध कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि आपदा राहत कोष से अन्य राज्यों को केंद्र सरकार से मदद मिली है, लेकिन दिल्ली सरकार को कोई मदद नहीं मिली। टैक्स में आई कमी से जूझ रही दिल्ली सरकार ने पैसे जुटाने के लिए जो कदम उठाए हैं, उनमें राजधानी में शराब पर 70%तक प्रिंट रेट से अधिक दामों पर उसकी बिक्री कराने का निर्णय लिया और बाद में जग हँसाई शुरू होने पर उसे कम किया कोरोना संक्रमण के संकट से लड़खड़ाई दिल्ली सरकार की अर्थव्यवस्था, दिल्ली सरकार ने कोरोना वायरस लॉकडाउन के बीच केंद्र की मोदी सरकार से मदद की गुहार लगाई। जबकि दिल्ली सरकार ने मई महीने में कोरोना सेस से कमाए 161 करोड़ रुपये। फिर भी केंद्रीय वित्त मंत्री (निर्मला सीतारमण) को मनीष सिसौदिया उप मुख्यमंत्री / वित्तमंत्री, दिल्ली सरकार चिट्ठी लिखकर दिल्ली के लिए 5 हज़ार करोड़ रुपए की राशि की मांग की है..."
इसे विडंबना नहीं तो और क्या कहें ? कोरोना संक्रमण से डर कर दूसरे राज्यों में फंसे असहाय और गरीब लोग जैसे ही येन-केन-प्रकारेण अपने-अपने घर-गांव अपार पीड़ा एवं दुःख के साथ पहुँचे और उनके पैरों  के जख्म  अभी ठीक भी नहीं हुये थे अभी घर के बाहर पेड़ के नीचे क्वारन्टीन होनें के कारण, अपने घर-परिवार, गांव-पड़ोस से भी नहीं मिल पाये थे इसी बीच नेतागीरी में सफल नेताओं ने मजदूरों के पैर के छालों एवं इनके हृदय विदारक दुःख का मजाक उड़ाते हुये, लॉकडाउन-5 लगभग-लगभग ओपेन कर दिया और कुटिल मुस्कान के साथ मन ही मन बोले लो असहाय मजदूरों गांव-घर में बैठकर पश्चाताप करो ! इसीलिये कहता हूं कि कामयाब नेता एवं सत्ताधारी दल कभी भी कुछ भी कर सकता है और कह सकता है। उस पर किसी तरह का कोई नियंत्रण नहीं है क्योंकि वो सर्व शक्तिमान है। सत्ता पर काबिज रहते उसका जनता कुछ बिगाड़ नहीं सकती और सत्ता में बने रहते वो अपनी सात पीढ़ी का गुजर बसर शाही अंदाज वाला कर लेता है और फिर उसको चुनने वाली जनता सिर्फ और सिर्फ हाथ मालती है। 
   
दो माह से अधिक समय हो गया और आज भी कोरोना वायरस कमजोर नहीं हुआ, बल्कि सरकारें कमजोर हुई हैं। कोरोना संक्रमण की स्थिति आज भयावह होती दिख रही है जब देश में कोरोना संक्रमण के गिने चुने मरीज थे तो देश में कड़ाई के साथ लॉकडाउन लागू किया गया और जब देश में कोरोना संक्रमण की स्थिति ढ़ाई लाख पहुँचने को है तो देश भर में सबकुछ खोल दिया गया। कितना गैर जिम्मेदाराना वाला कार्य केंद्र की मोदी और राज्य की सरकारें कर रही हैं सरकार को देश की जनता की नहीं पड़ी है, बल्कि सरकार को अपनी कुर्सी की पड़ी है जल्दी-जल्दी आप सब सिर्फ एक काम करो अपना टैक्स भर दो ! क्योंकि सरकार का खजाना खाली हो चुका है जिससे सरकार महीने का लाखों रुपया वेतन, भत्ता, गाड़ी, बंगला का मजा लेने वाले खाली बैठे अधिकारियों और नेताओं को वेतन, पेंशन एवम अन्य सुविधाएं दे सके हाँ, हाँ  इनको कोरोना काल में भी वेतन, भत्ता गाड़ी, बंगला एवं अन्य ठाट बाट में कोई कमी न आने पाए। इस लिए बिना किसी पूँछताँछ बिना कोई सवाल दागे देश की जनता को यही निर्देश सरकार की तरफ से दिया जाता है कि कोरोना वायरस से निडर होकर काम करो और टैक्स भरो ! ताकि सरकार को राजकोषीय संकट से न जूझना पड़े। 

आज मैं देश की भोली भाली और लालची जनता से एक सीधा साधा सवाल करना चाहता हूँ कि पूरे देश में कोरोना वायरस के संक्रमण से बहुत से डॉक्टर ईलाज करते हुए मर गये, बहुत से पुलिस वाले अपने कर्तब्य निर्वहन करते मर गये, बहुत सी आम जनता दवा के अभाव में मर गई ! परन्तु भारत देश में क्या कोई नेता भी कोरोना वायरस के संक्रमण से अभी तक मरा ? शायद ! नहीं मरा, विल्कुल मर ही नहीं सकता ! क्योंकि नेता हिम्मती होते हैं, निडर हैं और उनमें राष्ट्रीय आपदा जैसे बजट को खाकर पचा जाने की हिम्मत और कूबत होती है इसलिए भारत के नेता कोरोना संक्रमण क्या किसी भी संक्रमण से मर नहीं सकते ! आम जनता से सरकार की तरफ से अपील है कि वो मास्क पहनें, एक दूसरे से दूरी बनाकर रहें, बार-बार अपने हाथ को साबुन से धोये अथवा सेनेटाईजर का प्रयोग करें ! साथ ही सरकार जो आदेश निर्देश जारी करे, उसका शत प्रतिशत अनुपालन करें ! देश की जनता का यही दायित्व है इससे विमुख कदापि न हो !

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