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सोमवार, 8 जून 2020

प्रतापगढ़ में कोरोना संक्रमण से जिला अस्पताल में इलाज के दौरान मृत हुई बुजुर्ग महिला के घर एक मासूम बच्ची को भी हुआ कोरोना का संक्रमण

"स्वास्थ्य महकमें की घोर लापरवाही का परिणाम है कि जिस महिला की मौत जिला अस्पताल में इलाज के दौरान हुई और उसकी कोरोना संक्रमण की जाँच रिपोर्ट बिना प्राप्त किये गैर जिम्मेदारी का निर्वहन कर शव को परिजनों को सौंप दिया गया और परिजन भी उसके जनाजे में सैकड़ों लोगों की भीड़ करके सोने पे सुहागा वाली कहावत को चरितार्थ कर दिखाया जिसका परिणाम है कि उसी कोरोना संक्रमित मृत हुई बुजुर्ग महिला के घर से एक मासूम बच्ची आज कोरोना संक्रमित पाई गई..."
जिला अस्पताल प्रतापगढ़ 
प्रतापगढ़ में  89केस, 72डिस्चार्ज, 13एक्टिव मरीज, 4मौत का है,आकड़ा...

प्रतापगढ़ में जिसका डर था, वही बात हो गई ! पिछले सप्ताह कोरोना संक्रमण से जिला अस्पताल में 80 वर्षीय बृद्धा की मौत होने के बाद स्वास्थ्य महकमें की घोर लापरवाही से मृत हुई महिला का शव उनके परिजनों को सौंप दिया गया और जब उस मृत महिला का कोरोना वायरस संक्रमण के टेस्ट की रिपोर्ट स्वास्थ्य महकमें में आई तो स्वास्थ्य महकमें के मुखिया डॉ ए के श्रीवास्तव की बोलती बंद हो गई। परन्तु निघर्घट और निर्लज्ज एवं वेशर्म प्रतापगढ़ सीएमओ डॉ ए के श्रीवास्तव के सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ा। प्रतापगढ़ के पल्टन बाजार में दो साल की मासूम बच्ची कोरोना से संक्रमित पाई गई। प्रतापगढ़ में जिस मासूम बच्ची की कोरोना जाँच रिपोर्ट पॉजिटिव आई वह कोई और नहीं बल्कि पिछले सप्ताह कोरोना संक्रमण से पल्टन बाजार चम्पा सुर्ती के पास मृत हुई 80 वर्षीय बृद्ध महिला के घर की है। अकेले मासूम बच्ची को कोविड-19 अस्पताल में भर्ती कराने को लेकर स्वास्थ्य महकमें के अफसरों में मंथन चल रहा है 

बड़ा सवाल है कि बिना परिजन कोविड-19 संक्रमण से निपटने हेतु बने अस्पताल में मासूम बच्ची कैसे रहेगी ? इसी उधेड़बुन में मासूम बच्ची के परिजन और निकम्में स्वास्थ्य महकमें के गैर जिम्मेवार अफसर फंसे हुए हैं।अब परिजनों के भी होश ठिकाने आ गए हैं, जब उनके घर में कोरोना संक्रमण से एक मासूम बच्ची संक्रमित हो गई।चूँकि कोरोना संक्रमण से 80 वर्षीय बृद्ध महिला की मौत के बाद शासन से रोक के बावजूद उसके जनाजे में सैकड़ों लोगों की भीड़ जुटाने की गलती के लिए अपने आपको कोस रहे हैं साथ ही डर रहे हैं कि घर में और किसी को कोरोना का संक्रमण न हो जाए ! यदि मृत हुई 80 वर्षीय बृद्ध महिला के संक्रमण का कोरोना बम दगना शुरू हुआ तो इसका जिम्मेवार कौन होगा ? क्या उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ऐसे निकम्मे स्वास्थ्य विभाग के मुखिया डॉ ए के श्रीवास्तव पर कार्यवाई करेगी ? क्या जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं बनती कि उसकी नाक के नीचे सैकड़ों लोगों की भीड़ उस महिला के जनाजे में हुई, जिसकी कोरोना जाँच रिपोर्ट बिना आये ही उसे सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जा रहा था। 

"योगी सरकार ऐसे गैर जिम्मेदार अफसरों के विरुद्ध कठोर से कठोर कार्यवाई क्यों नहीं करती ? जिस महिला के जनाजे में सैकड़ों लोगों की भीड़ जुटी उस भीड़ पर प्रतापगढ़ की पुलिस क्यों मेहरबान है ? अभी तक उनके विरुद्ध मुकदमा क्यों नहीं लिखा गया ? इन सारे सवालों के जवाब देने के लिए सिस्टम में बैठा जिम्मेदार कोई भी ब्यक्ति आगे नहीं आ रहा है और पूरे मामले पर चुप्पी साधे हुए है । यदि मृत बुजुर्ग महिला का संक्रमण बढ़ा और उसके संक्रमण की जद में सैकड़ों लोग संक्रमित हुए तो कौन लेगा इस भयानक भूल की जिम्मेदारी ? कोरोना संक्रमण काल में भी सब कुछ भगवान भरोसे चल रहा है । नौकरशाही तो कोरोना संक्रमण का बजट खा जाने की जुगत में हैरान व परेशान है..."
आज जिस मासूम बच्ची को कोरोना संक्रमण टेस्ट की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है, उसी मासूम बच्ची के दादी को भी कोरोना हुआ था और वह जिला अस्पताल में इलाज के दौरान मृत हुई थी।जिला अस्पताल और स्वास्थ्य महकमें के मुखिया डॉ ए के श्रीवास्तव की उदासीनता और घोर लापरवाही का नतीजा रहा कि बिना कोरोना संक्रमण की टेस्ट रिपोर्ट आए ही मृत महिला का शव परिजनों को सौंप दिया। भला हो उस मृत महिला के परिजनों का जिन्होंने कोरोना संक्रमण के लिए बनाये गए नियमों की धज्जियाँ उड़ाते हुए उसके जनाजे में सैकड़ों की भीड़ बटोर ली। अब जब घर में दूसरा कोरोना संक्रमण का मरीज पाया गया तो कलेजा मुंह को आ रहा है करोना के संक्रमण के चलते 80 वर्षीय बृद्ध महिला की मौत हुई थी। कोरोना पॉजिटिव बुजुर्ग महिला की जिला अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हुई थी, जबकि सदर मोड़ स्थित रूमा हॉस्पिटल में भर्ती करके कोरोना संक्रमित महिला का इलाज हुआ था। 

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