Breaking

Post Top Ad

Your Ad Spot

शनिवार, 20 जून 2020

अजमेर के सांसद भागीरथ चौधरी और पार्षदों के विरोध के बाद भी नसीराबाद में मांस बिक्री के लाइसेंस देने की तैयारी

छावनी बोर्ड के अधिकारियों का निर्णय जनभावनाओं के अनुकूल नहीं-सांसद चौधरी।
पर भैंस और गौवंश नहीं कट सकेंगे। लाइसेंस की प्रक्रिया नियामानुकूल-सीईओ नेमा।

नसीराबाद उपखंड में छावनी बोर्ड क्षेत्र...
अजमेर के नसीराबाद उपखंड में छावनी बोर्ड क्षेत्र में मांस बिक्री के लाइसेंस देने की तैयारी सैन्य प्रशासन ने कर ली है। बोर्ड की पूणे स्थित मुख्यालय से आदेश जारी हो गए हैं। नसीराबाद में बूचडख़ाने (पशुओं का कत्लगृह) को बंद करवाने के लिए स्थानीय लोगों ने लम्बा संघर्ष किया था। कई दिनों तक नसीराबाद बंद भी रहा। विरोध के चलते ही अभी नसीराबाद में बूचडख़ाने बंद पड़े हैं। बूचडख़ानों को लाइसेंस देने के प्रस्ताव पर विगत दिनों छावनी बोर्ड की बैठक बुलाई गई थी। इस बैठक में अजमेर के सांसद भागीरथ चौधरी ने भी भाग लिया। बैठक में प्रस्तुत प्रस्ताव का सांसद सहित बोर्ड के उपाध्यक्ष अनिरुद्ध खंडेलवाल, पार्षद रोहिताश शर्मा, योगेश सोनी, अनिता मेहरा आदि ने विरोध किया।

अजमेर के सांसद भागीरथ चौधरी...
सांसद और पार्षदों के विरोध को देखते हुए बूचडख़ाने का प्रस्ताव रद्द हो जाना चाहिए, लेकिन सैन्य अधिकारियों ने अपनी रुचि थोपते हुए जनप्रतिनिधियों के विरोध के बाद भी नसीराबाद में बूचडख़ाने के लाइसेंस देने की तैयारी कर ली है। यदि नसीराबाद में बूचडख़ानों के लाइसेंस दिए जाते हैं तो फिर से आंदोलन शुरू हो सकता है। सांसद चौधरी ने भी सैन्य अधिकारियों की कार्यवाही पर सवाल उठाए हैं। चौधरी ने कहा कि इस मुद्दे पर वे केन्द्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से बात करेंगे। सैन्य अधिकारियों को जनप्रतिनिधियों एवं जनभावनाओं का ख्याल रखना चाहिए। वहीं प्राप्त जानकारी के अनुसार छावनी बोर्ड प्रशासन ने बूचडख़ानों के सर्कुलेशन वाले एजेंडे को लाइसेंस देने का आधार माना है। सांसद की उपस्थिति में हुई बैठक से पहले बोर्ड के सीईओ अरविंद नेमा ने बूचडख़ानों के प्रस्ताव पर सरकूलर पद्धति से उपाध्यक्ष अनिरुद्ध खंडेलवाल, पार्षद रोहिताश शर्मा, तरुन्नुम अख्तर, अजय बोहरा, श्रवणलाल सुकारिया आदि के हस्ताक्षर करवा लिए थे। 

बोर्ड ने इन पार्षदों की सहमति मान ली, जबकि उपाध्यक्ष खंडेलवाल का कहना है कि उन्होंने प्रस्तव पर सिर्फ हस्ताक्षर किए हैं, प्रस्ताव पर सहमति नहीं दी है। वैसे भी इस एजेंडे का कोई महत्व नहीं है क्योंकि इसके बाद बोर्ड की बैठक हो चुकी है। हमने इस बैठक में बूचडख़ानों का विरोध किया है। छावनी बोर्ड ने मांस बिक्री के लाइसेंस देने की जो कार्यवाही की है उसमें भैंस, पाडा और गाय के वध करने पर रोक लगाई गई है, लेकिन मुर्गी, बकरा बकरी और मछली जानवरों का वध हो सकेगा। यहां यह उल्लेखनीय है कि छावनी क्षेत्र होने के कारण नसीराबाद में पिछले कई दशकों से बूचडख़ाने चल रहे थे। बूचडख़ानों की वजह से नसीराबाद शहर का पर्यावरण भी खराब हो रहा था। पशुओं का खून और मांस के टुकड़े टुकड़े इधर उधर बिखरे होने से गंदगी भी हो रही थी। नसीराबाद के लोगों का मानना है कि यदि बूचडख़ाने फिर से  शुरू होते हैं तो गंदगी तो होगी ही साथ ही पर्यावरण भी बिगड़ेगा। नसीराबाद के बूचडख़ानों में बड़ी संख्या में पशु कटते रहे हैं।

वहीं छावनी बोर्ड के सीईओ अरविंद नेमा ने कहा कि नसीराबाद में मांस की बिक्री के लाइसेंस देने की प्रक्रिया नियामानुकूल है। उन्होंने माना कि छावनी बोर्ड की बैठक में सांसद भागीरथ चौधरी ने बूचडख़ाने और मांस की बिक्री के प्रस्ताव का विरोध किया था। लेकिन नसीराबाद के विधायक रामस्वरूप लाम्बा ने सुझाव दिया कि इस मुद्दे पर कानूनी राय ली जाए। बोर्ड ने अपने लिगल एडवाइजर से राय ली इस राय के मुताबिक भी लाइसेंस देने का निर्णय लिया गया है। नेमा ने कहा कि पूर्व में सकुलेंशन एजेंडे के जरिए बोर्ड के पार्षदों की सहमति हो गई थी, तब बोर्ड की मीटिंग बुलाना जरूरी नहीं था। लेकिन इसके बाद भी पारदर्शिता बनाए रखने के लिए बोर्ड की बैठक बुलाइ गई। छावनी बोर्ड के नियमों के मुताबिक सांसद और विधायक को वोट देने का अधिकार नहीं है। हम सांसदों और विधायको को विशेष आमंत्रित सदस्य के तौर पर बैठक में बुलाते हैं। जबकि किसी प्रस्ताव पर वोट देने का अधिकार पार्षदों के साथ साथ बोर्ड के सीईओ और छावनी के ब्रिगेडियर को भी होता है। 

बैठक में जनमत के आधार पर ही नसीराबाद में मांस की बिक्री और बूचड़हाउस की सहमति दी गयी है।  नेमा ने बताया कि नसीराबाद में जो 23 मांस विक्रेता सूचीबद्ध है, उन्हें ही नीलामी के जरिए चिकन मटन मार्केट में स्थान उपलब्ध करवाया जाएगा। इसी मार्केट में बूचड़हाउस भी स्थित है, जहां पर चिकन, मटन के जानवर कटेंगे। कोई भी लाइसेंसधारी अपने घर से जानवर को काटकर नहीं ला सकेगा। नेमा यह भी बताया कि अब नसीराबाद में सिर्फ बकरा, मूर्गी और मछली के मांस की ही बिक्री होगी। नए आदेश में भैंसऔर गौवंश से जुड़े जानवरों के वध पर रोक रहेगी। मौजूदा समय में जो विक्रेता छावनी बोर्ड की भूमि पर अतिक्रमण कर बैठे हुए हैं, उन सभी को बेदखल किया जाएगा। नेमा ने कहा कि मांस बिक्री के लाइसेंस देने में नियमों की किसी भी प्रकार से अव्हेलना नहीं की गई है।

प्रस्तुति:-एस.पी.मित्तल

कोई टिप्पणी नहीं:

टिप्पणी पोस्ट करें

Post Top Ad

Your Ad Spot

अधिक जानें