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सोमवार, 11 मई 2020

लॉकडाउन के निर्णय पर सरकार की स्थिति धोबी के कुत्ते जैसे हो गई

कोरोना संक्रमण को सरकार बचाने में बुरी तरह हुई,परास्त...!!!
सरकार का धन भी गया और धर्म भी गया...!!!
मोदी सरकार पहले कोरोना संक्रमण से देश के सभी नागरिकों बचाने के लिए लॉकडाउन की ब्यवस्था की,जब लॉकडाउन की ब्यवस्था फेल होती  दिखी तो केंद्र की मोदी सरकार और राज्यों की सभी सरकारें अपनी-अपनी  अर्थब्यवस्था बचाने के लिए लगोंट कसकर अखाड़े में उतर आईं देखना है कि सरकार अब अर्थब्यवस्था भी बचा पाती है या उसमें भी औंधे मुँह गिरकर अपनी जग हँसाई कराती है...!!!
ट्रकों पर प्रवासी मजदूरों ने अपनी बीबी और बच्चों की जान जोखिम में डालकर रह रहे हैं यात्रा...
केंद्र की मोदी सरकार के दुलरुआ मंत्री पीयूष गोयल भी कोरोना महामारी के जंग में अब कूद चुके हैं। रेलमंत्री पीयूष गोयल मोदी कैबिनेट में कद्दावर मंत्रियों में से एक हैं। कई मंत्रालयों का उन्हें अनुभव है। परन्तु अभी तक वो कुम्भकर्णी नींद में सोये हुए थे। लॉकडाउन के 47वें दिन कोरोना संक्रमण के दौरान लगातार बढ़ते मरीजों की संख्या से सरकार असहाय नजर आ रही है। बिना किसी प्लान के समूचे देश में लॉकडाउन लागू कर ऐसा ढ़िढोरा पीटा गया जैसे भारत विश्व विजेता हो गया हो ! सिर्फ 21 दिनों की बात कहकर देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बिना मंत्रणा एवं विचार किये ही देश भर के नागरिकों से जो जहाँ है, वहीं रुके ! उसे किसी प्रकार की कोई परेशानी सरकार नहीं आने देगी ! सरकार इस बात का भरोसा दिलाती है...!!!
मासूम बच्चों के साथ सड़क पर बैठी अपनी बेबसी लिए एक माँ...
देश की 75फीसदी जनता ने अपने प्रधानमंत्री जी की बातों का समर्थन और सहयोग कर 21 दिन किसी तरह से महामारी के संकट का समय काटा। 25 मार्च से 14 अप्रेल तक पहला लॉकडाउन का पीरियड तय था तय किये गए समय सीमा से पहले ही धमाचौकड़ी करते हुए राज्य सरकारों से ये आवाज़ जानबूझकर उठवाई गई कि लॉकडाउन की समय सीमा बढ़ाई जाए। लॉकडाउन का दूसरा कार्यकाल 19 दिन के लिए बढ़ा भी दिया गया। यानि 3 मई तक लॉकडाउन का समय बढ़ गया। ऐसी दशा में रोज कमाने खाने वाले की जेब खाली हो गई।सरकार ऐसे लोंगो के लिए एक हजार रूपये की ब्यवस्था कर उनके खाते में सीधे भेजने का कार्य किया अनाज का वितरण और पके भोजन की ब्यवस्था सरकार और स्वयं सेवी संस्थाएं कर रही हैं,परन्तु वो सब भी ऊंट के मुंह में जीरा के समान है। क्योंकि सुबह से दोपहर तक कोई ब्यक्ति मुंह बांधकर नहीं रह सकता। पके हुए भोजन को दोपहर में 1 से 3 बजे के बीच बाँटने की ब्यवस्था है।ऐसे में कोई सुबह से दोपहर 2 बजे तक भूखे पेट कैसे रह पायेगा ? इस ब्यवस्था में भी सिस्टम से जुड़े लोग जमकर लूट मचाये हुए हैं। उन्हें कोरोना संक्रमण के भय का भी खतरा नहीं है और न ही वे ईश्वर से डर रहे हैं। सिर्फ और सिर्फ धन की लालच ने उन्हें मानव से दानव बना दिया है ऐसे में जनता की जेब जब खाली हो गई तो उसके अपने मूल घर के लिए पलायन करने के सिवा कोई दूसरा विकल्प नहीं दिख रहा है।  
ट्रेनों से अधिक प्रतिदिन सड़क मार्ग से आ रहे हैं,प्रवासी मजदूर...
सरकार की नाकामियों की बात करें तो केंद्र की मोदी सरकार और राज्य सरकारें शुरू से ही कोरोना संक्रमण के लिए केयर फंड हेतु कटोरा लेकर जनता से सहयोग की गुहार लगाते हुए भीख माँगना शुरू कर दिया। महज 21 दिनों में ही देश की जनता को भी समझ आ गया कि सरकार की स्थिति ठीक नहीं। स्थिति इतनी ख़राब होगी और राज्य सरकारें इतनी अमानवीय हो जायेंगी ये किसी ने कल्पना भी नहीं किया था कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच राज्य सरकारें अपने राज्यों में नागरिकों के साथ भेदभाव जैसा बरताव करने लगी अलग-अलग राज्यों से प्रवासी मजदूरों के साथ सौतेले ब्यवहार की वजह से प्रवासी मजदूरों को मजबूरी में पलायन के लिए बाध्य होना पड़ा। लॉकडाउन की परवाह किये बगैर राज्य सरकारों की ब्यवस्था की सह पर प्रवासी मजदूर अपने-अपने घरों के लिए निकल पड़े। जनता कर्फ्यू की अपार सफलता से प्रधानमंत्री मोदी बिना सोचे समझे देश भर में बिना किसी ठोस ब्यवस्था के लॉकडाउन लगाकर अपनी सरकार पर स्वयं असफ़लता का पलीता लगाने का कार्य किया। मोदी के प्रथम कार्यकाल 2014 से 2019 में भाजपा एवं मोदी कैबिनेट के कई दिग्गज मंत्री, दिवंगत हो गए। उसका भी इस महामारी में असर दिख रहा है। देश के रक्षामंत्री मनोहर पार्रिकर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, वित्तमंत्री अरुण जेटली एवं अनन्त कुमार जैसे मंत्रियों की कमी मोदी जी को भी खल रही है...!!!
मालवाहक ट्रकों ने बालू एवं मोरंग के साथ मजदूरों को भी ढ़ोने से नहीं आये बाज...
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह में भी उत्साह की कमी नजर आ रही है। दिल्ली का चुनाव लूज होने के बाद सिर्फ मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान "मामा" की सरकार बनाने में थोड़ा सी झलक उनकी दिखी थी। मोदी के दूसरे कार्यकाल को एक वर्ष पूरे होने को है। इस एक वर्ष में मोदी जी की वर्तमान कैबिनेट स्वयं बीमार नजर आ रही है। सिर्फ नौकरशाही के भरोसे मोदी सरकार वर्तमान में संचालित है। लिहाजा निरंकुशता का आना लाजिमी है। सरकार से विपक्ष और मीडिया का मैनेजमेंट बिगड़ चुका है। पहले सुषमा स्वराज और अरुण जेटली इस जिम्मेदारी का बखूबी निर्वाहन कर लेते थे। परन्तु मोदी पार्ट-2 में इसकी कमी स्पष्ट दिखलाई पड़ रही है। कोरोना संक्रमण से बचने के लिए ही लॉकडाउन की ब्यवस्था बनाई गई। अब जिस तरह से एक राज्य से दूसरे राज्यों में आवागमन शुरू हुआ वो सरकार की नीतियों और उसके फैसलों को कटघरे में खड़ा कर रहा है। क्योंकि राज्य सरकारें अपनी कमी का ठीकरा अपने पड़ोसी राज्यों एवं केंद्र की मोदी सरकार पर फोड़ना चाहती हैं
दिल्ली से उत्तर प्रदेश बार्डर पर लाखों की संख्या में पहुंचे लोग...
शुरुवात दिल्ली सरकार से हुई। तबलीगी जमातियों के मरकज़ से लेकर लाखों प्रवासी मजदूरों को उत्तर प्रदेश के बार्डर पर ये कह कहकर यानि अफवाह फैलाकर कि वहाँ बसों का इंतजाम है। फिर क्या था ? प्रवासी मजदूरों का रेला उत्तर प्रदेश के बार्डर पर जत्थे के साथ निकल पड़ा। किसी तरह उसे निपटाया गया। अस्थिरता और अफवाह फ़ैलाने में दूसरा राज्य महारष्ट्र का रहा। महारष्ट्र के मुंबई को देश की आर्थिक राजधानी कहा गया है। इस मुंबई में देश के हर कोने से लोग आकर रहते हैं। लाखों लोग बहकावे में आकर बांद्रा रेलवे स्टेशन पर आकर खड़े हो गए। उस भयावह स्थिति से भी उद्धव सरकार किसी तरह से निपट सकी। तीसरे लॉकडाउन का समय 14दिनों का है। यानि 17मई तक देश में लॉकडाउन प्रभावी है। लॉकडाउन के परिपेक्ष्य में देश के पीएम राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ मैराथन बैठक वीडियों कांफ्रेसिंग के जरिये किया गया। कई राज्यों ने लॉकडाउन फिर बढ़ाने का अपना प्रस्ताव भी रख दिया...!!!
सरकारें अफवाहों से हो गई फेल,बांद्रा स्टेशन पर जुट आई थी लाखों की भीड़...
अब यदि लॉकडाउन का चौथा कार्यकाल बढ़ाया गया तो देश में कोरोना संक्रमण से लोग बाद में मरेंगे उससे पहले वह भूख से मर जायेंगे देश की स्थिति बद से बद्तर होने से कोई बचा नहीं सकता। वहीं दूसरी ओर मई माह के अंत में ईद भी है और ईद में मस्जिदों में एकत्र होकर सामूहिक रूप से नमाज पढ़ना और एक दूसरे से गले मिलना फिर एक दूसरे के घर जाकर वेज और नॉनवेज खाने का स्वाद लेने के लिए सरकारें चिंतित हैं कि इस पर कैसे अंकुश लगाया जाए ? देश की मोदी सरकार और राज्य की सरकारें इस पर अभी से मंथन करने लगी हैं। तीसरे लॉकडाउन में ढील दिए जाने पर आम लोंगो में ये प्रतिक्रिया करते हुए देखने व सुनने को मिल रही है। मथुरा में राजस्थान बार्डर पर राजस्थान पुलिस और उत्तर प्रदेश पुलिस में भी दो दिन पहले जमकर विवाद होने से संघीय ढाँचे पर इसका खुलकर प्रभाव पड़ता दिख रहा है। ये सारी समस्याओं पर नजर दौडाएं तो ये सब क्रिया-प्रतिक्रिया गैर भाजपा शासित राज्यों में ही देखने को मिल रही हैं जो राष्ट्रीय आपदा जैसे बिपत्ति काल में चिंतनीय है...!!!

2 टिप्‍पणियां:

  1. अच्छा विस्लेषण लेकिन सकारात्मक सुझाव भी अपेक्षित

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    उत्तर
    1. राघवेन्द्र जी,मैं किसी राजनैतिक दल का सदस्य नहीं हूँ ! मेरे लिए जनता और राष्ट्र का हित ही सर्वोपरि है ! खबर को खबर के रूप में देखें न कि दल के सदस्य के रूप में !
      धन्यवाद !

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