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शुक्रवार, 22 मई 2020

लॉकडाउन में दोहरा मापदंड अपनाने से उठ रहे हैं,सिस्टम पर सवाल

राजधानी दिल्ली के सभी जिले रेड जोन और हॉट स्पॉट में हैं और वहाँ से दर्जनों ट्रेनों का यदि सफलता पूर्वक संचालन कराया जा सकता है तो प्रतापगढ़ में जिला अस्पताल के सामने मेडिकल स्टोर्स का संचालन क्यों नहीं संचालित हो सकता...???
समझ में नहीं आता कि नीति निर्धारण करने वाले लोग ऐसी मनमानी किस नियम कानून के तहत करते हैं...???
राजापाल चौराहे से यदि SBI शाखा तक का क्षेत्र खोला जा सकता है तो श्रीराम तिराहे से चौक और पंजाबी मार्किट का क्षेत्र क्यों नहीं खोला जा सकता...???
देश का सिस्टम भी अजीब है, ये कभी भी दुरुस्त नहीं हो सकता क्योंकि सिस्टम को संचालित करने वाले लोगों में अज्ञानता और अकर्मण्यता कूट कूट कर भरी होती है। देश में चाहे राष्ट्रीय आपदा आई हो अथवा महामारी आई हो ! परन्तु सिस्टम में बैठे चापलूसों के आगे किसी की एक नहीं चल पाती। वो चापलूस सिर्फ सत्ता के इर्द गिर्द घूमते रहते हैं। अपनी चापलूसी के बल पर वो सबको अपने अधिनस्थों को अपनी परिक्रमा करने पर बाध्य कर लेते हैं। अपनी सम्मोहन शक्ति के बल पर हर सरकार में वो ही ख़ास हुआ करते हैं। हम बात कर रहे हैं सरकार और सरकार के तंत्र पर...!!!
लोकतंत्र में कहने के लिए जनता ही मालिक होती है,परन्तु जनता की कहीं कोई सुनवाई नहीं होती ! सिर्फ चुनाव के वक्त जनता अपना मताधिकार तक ही मालिक होती है उसके बाद तो उस जनता पर सिर्फ और सिर्फ सत्ता की चाबुक से उसे रौंदा जाता है। जनता जिस सरकार के गठन के लिए अपने मताधिकार का प्रयोग कर उसे सत्तासीन करती है वही सरकार उस जनता का शोषण करने पर उतारू हो जाती है। अब सरकार अपनी नौकरशाही के बल पर जनता पर शासन करती है। लोकतंत्र के अभी तक के इतिहास में किसी भी सरकार ने जनता की भलाई के लिए एक जैसा नियम और क़ानून नहीं बनाया। कहने और सुनने के लिए तो सारे नियम कानून जनता के लिए एक सामान होते हैं,परन्तु सरकार में शामिल उसकी भ्रष्ट नौकरशाही उसे लागू होते वक्त उसमें इतनी विसंगतियां पैदा कर देती हैं कि उसमें असमानता ही दिखती है। समानता का लोप हो जाता है। समानता की बात करने वाले को चुप करा दिया जाता है...!!!
वर्तमान समय में देश गंभीर महामारी के संकट से जूझ रहा है। कोरोना वायरस के संक्रमण ने मानव जाति पर ऐसा कहर बरपाया है कि सारा संसार त्राहि-त्राहि कर रहा है। महाशक्तिमान अमेरिका जैसा देश इस महामारी के आगे नतमस्तक हो चुका है। भारत में भी दो माह से लॉकडाउन लगाकर उस पर नियंत्रण करने की कोशिश केंद्र की मोदी सरकार और राज्यों की अलग-अलग सरकारें कार्य कर रही हैं। फिर भी नतीजे संतोषजनक नहीं हैं।कोरोना संकट से लड़ने के लिए केंद्र व राज्य की सरकारें अपने राज्यों को तीन जों में विभक्त किया है। पहला जोन रेड जोन के नाम से है जिसमें सबसे अधिक कोरोना संक्रमित मरीज के पाए जाने पर उस क्षेत्र को रेड जोन में किया जाता है। उससे कम कोरोना संक्रमित मरीज के क्षेत्र को ऑरेंज जोन में रखा गया है और जहाँ कोरोना का संक्रमण नहीं हुआ उसे क्षेत्र को ग्रीन जोन में रखा गया 
कोरोना संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए देश भर में लागू लॉकडाउन को दो माह हो गए और इस संकट से निपटने के लिए जो नियम कानून बनाए गए वो दोषपूर्ण और भेदभाव वाले हैं। देश के हर हिस्से में जहाँ भी कोरोना के संक्रमित मरीज पाए गए उस क्षेत्र को हॉट स्पॉट जोन में कर दिया जाता है। उस मरीज के इतिहास भूगोल की जाँच की जाती है और उसके सम्पर्क में आये सभी ब्यक्तियों को आइसोलेट कर दिया जाता है और पूरी एरिया को सील कर पुलिस का पहरा बैठा दिया जाता है। रेड जोन और हॉट स्पॉट क्षेत्र को सबसे संवेदनशील माना गया है, परन्तु ऐसे मामलों में भी दो तरह की ब्यवस्था देखने को मिल रही है। वो चाहे देश की राजधानी दिल्ली हो अथवा उत्तर प्रदेश का एक सी ग्रेट का जिला हो...!!!  
राजधानी दिल्ली में सभी 11 जिले हॉट स्पॉट और रेड जोन में हैं। फिर भी वहां से स्पेशल रेलगाड़ी संचालित हैं। बसों का आवागमन खूब हुए। पूरे देश में संक्रमण को यदि कहीं से फैलाने की शुरुवात हुई तो वह देश की राजधानी दिल्ली ही है। रोक के बावजूद तबलीगी जमात मरकज़ का आयोजन बड़े पैमाने पर निजामुद्दीन में किया गया और देश भर में कोरोना संक्रमण का बीजारोपण किया गया। अब बात करते हैं उत्तर प्रदेश के थर्ड क्लास के जनपद प्रतापगढ़ की जहाँ अभी तक 56 कोरोना संक्रमित मरीज पाए गए। प्रतापगढ़ को ऑरेंज जोन में रखा गया है,परन्तु जिस तरह थोक के भाव में कोरोना संक्रमित मरीज मिल रहे हैं,उससे जल्द ही प्रतापगढ़ भी रेड जोन में शामिल हो जाएगा। प्रतापगढ़ जनपद का शहरी क्षेत्र मुश्किल से मुश्किल पूरब से पश्चिम 3किमी और उत्तर से दक्षिण 5 किमी में फैला है। प्रमुख शहरी क्षेत्र तो महज 2 किमी में ही बसा है 
प्रतापगढ़ का जिला अस्पताल एरिया हॉटस्पॉट घोंषित हैं। उसी क्षेत्र में देश की प्रमुख बैंक SBI और BOB की मुख्य शाखा है। चौक से पहले राजापाल चौराहे तक सड़क को सील किया गया, बाद में राजापाल चौराहे से जीआईसी तक खोल दिया गया। मजेदार बात यह है कि जिला अस्पताल प्रतापगढ़ के पास से लेकर चौक तक ही प्रमुख मेडिकल यानि दवाओं की दुकानें हैं। इसी क्षेत्र में अधिकतर पैथालाजी सेंटर हैं,जो हॉट स्पॉट होने के बाद से बंद हैं। दवाओं की सभी दुकानो को जिला प्रशासन ने बन्द करा दिया है। इसी क्षेत्र में प्रयागराज, लखनऊ और दिल्ली से ईलाज करा रहे मरीजों को दवा नहीं मिल सकती और उनका जीवन बिना दवा के खतरे में है। जिला प्रशासन को ऐसे मरीजों के लिए लेशमात्र चिंता नहीं है। जबकि जिला अस्पताल के अगल-बगल नर्सिंग होम और प्राइवेट अस्पताल खुली हैं...!!!
लॉकडाउन में भी जिला प्रशासन की दोहरी नीति समझ के परे है। बैंकों में चेक क्लियरेंस के लिए भी कोई ब्यवस्था न होने से बैंक का कारोबार पूरी तरह बाधित है। SBI की चेस्ट खोलने के लिए 2घण्टे की छूट जिला प्रशासन दे रखा है। ताकि एटीएम में कैश की समस्या न हो ! अब जिला प्रशासन से कौन पूँछे कि जब दो घण्टे बैंक की चेस्ट खोलने की छूट यदि जिला प्रशासन ने दे रखी है तो उस दौरान कोरोना वायरस कुम्भकर्णी नींद में सो जाता है,क्या ? इसीबीच जिला प्रशासन ने राजापाल से SBI बैंक के पास तक की एरिया को खोल देने से चौक से श्रीराम तिराहे तक के लोग दबे मन से सिस्टम से सवाल कर रहे हैं कि हॉट स्पॉट एरिया में भी दोहरा मापदंड कैसे संचालित है ? यही दशा चिलबिला में है। चिलबिला NH पर स्थित है। दोनों तरफ दुकाने हैं और एक तरफ हॉट स्पॉट एरिया घोषित होने के बाद सारी दुकाने बंद हैं तो दूसरी तरफ की दुकाने खुली हुई हैं। समझ में नहीं आता कि नीति निर्धारण करने वाले लोग ऐसी मनमानी किस नियम कानून के तहत करते हैं...???

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