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रविवार, 31 मई 2020

प्रधानमंत्री के रूप में नरेन्द्र मोदी अद्वितीय अविश्वसनीय ऐतिहासिक कार्यकाल रहा

देश में मोदी शासन काल की छठी वर्षगांठ तथा दूसरे कार्यकाल की प्रथम वर्षगांठ पर हो रहे हैं,भांति-भांति के विश्लेषण /आंकलन..

➤सतीश मिश्र -

नेपाल के पशुपति नाथ मंदिर में ऐसे हुआ था पीएम मोदी का स्वागत...
दूसरे कार्यकाल के प्रथम वर्ष के सम्बंध में मेरा स्पष्ट मत है कि मोदी सरकार का यह प्रथम वर्ष ऐतिहासिक अविश्वसनीय सफलताओं से सराबोर रहा है। देश को 72 वर्ष पुराने राजनीतिक प्रशासनिक सामाजिक कैंसर अनुच्छेद 370, 35A से स्थायी मुक्ति मिली 450 बरस से अधिक पुराने, मुगलिया काल की देन बाबरी कोढ़ से देश को स्थायी मुक्ति मिली। (कमेंट बॉक्स में देखें दूसरा कमेंट) 37 बरस पहले कट्टर धर्मान्ध कठमुल्लाओं की ज़हरीली जिद्द के समक्ष साष्टांग दंडवत होकर देश की सर्वोच्च अदालत के फैसले को रौंदने कुचलने का जो शासकीय कुकर्म तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने किया था, उस कुकर्म का प्रायश्चित तीन तलाक के सफाए का कानून बनाकर इसी वर्ष हुआ और CAA सरीखा कानून बनाकर पाकिस्तान, बांग्लादेश अफगानिस्तान में प्रताड़ित हो रहे हिन्दूओं को भी ठोस सन्देश इसी वर्ष दिया गया कि तुम अकेले या अनाथ नहीं हो, हम हैं तुम्हारे साथ। 


कोविड -19 कोरोना संक्रमण काल में एक अभिभावक की तरह देश की जनता के साथ खड़े और डटे रहे...
इस पहले वर्ष के कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धि, सबसे बड़ी सफ़लता यह भी है कि कोरोना महामारी से देश के लाखों लोगों की सरकार ने जिस प्रकार रक्षा की है, उसे इतिहास के पन्नों में स्वर्णाक्षरों में लिखा जाएगा। इसे बस एक तथ्य से समझ लीजिए कि जनसंख्या के अनुपात में कोरोना के कारण हुई मौतों की मृत्यु दर के अनुसार भारत 124वें स्थान पर है। 123 देशों में यह मृत्यु दर भारत से अधिक रही है। राम मन्दिर का निर्णय जिन्हें केवल एक अदालती फैसला मात्र लगता है, वो अपने दिमाग अपनी आंख पर लगे जाले साफ़ करके देखें कि 2010 में हाइकोर्ट के फैसले के 5 साल बाद भी जिस सुप्रीम कोर्ट में 2015 तक सुनवाई शुरू नहीं हुई थी, उसी ने 5 साल में सुनवाई पूरी करके फैसला सुना दिया राम मंदिर के लिए भाजपा के दशकों लम्बे राजनीतिक और कानूनी संघर्ष की भूमिका को कैसे नकारा जा सकता है

अब बात छह वर्षों की...

समाज के सबसे गरीब निर्धन वर्ग तथा किसानों की सहायता एवं कल्याण के लिए चल रहीं मोदी सरकार की दर्जनों विकास योजनाओं की सफलता की चर्चा और प्रचार तो खूब हुआ और आज भी हो रहा है। लेकिन आज उसके बजाय केवल इस बात पर चर्चा करूंगा कि मध्यम वर्ग को क्या मिला ? यह संयोग ही है कि इस चर्चा में स्वतः ही यह तथ्य उभर कर सामने आ जाता है कि उसी मध्यम वर्ग को कांग्रेस शासनकाल में कैसे लूटा गया। 


मोदी और अमित शाह की जोड़ी ने भारत की राजनीति में देश को नया मुकाम दिलाया...

सिर्फ तीन बिंदुओं से स्थिति हो जाएगी स्पष्ट...
1- पहले उल्लेख कर दूं कि देश में आज लगभग 50 करोड़ मोबाइल इंटरनेट यूजर्स हैं अब जानिए कि आज औसतन डेढ़ सौ रुपये प्रतिमाह की दर पर 60 जीबी मोबाइल इंटरनेट डाटा देश में प्रत्येक कम्पनी उपलब्ध करा रही है इसी में असीमित (Unlimited) कॉल की सुविधा भी सम्मिलित है। जबकि वर्ष- 2014 तक Idea cellular 245 रुपये प्रतिमाह में 1 जीबी, Vodafone 251 रुपये प्रतिमाह में 1 जीबी, Airtel 252 रुपये प्रतिमाह में 1 जीबी, Reliance Mobile 247 रुपये प्रतिमाह में 1 जीबी इंटरनेट डाटा दे रहा था अर्थात्‌ आज 6 वर्ष के मोदी शासनकाल के बाद डेढ़ सौ रुपये में जितना इंटरनेट डाटा (60 जीबी) देश के नागरिकों को सहज उपलब्ध है उतने इंटरनेट डाटा के लिए मई 2014 तक देश के नागरिकों को औसतन लगभग 15000 रुपये प्रतिमाह खर्च करने पड़ रहे थे। अर्थात्‌ आज की तुलना में लगभग 100 गुना अधिक इसके अलावा 1 रुपये प्रति मिनट की दर से कॉल के पैसे अलग से देने पड़ते थे। 

2- अटल जी की सरकार की विदाई से पहले 2003 में होम लोन पर ब्याज की दर 7.75% थी लेकिन दस वर्ष बाद महान अर्थशास्त्री प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की सरकार की विदाई से पहले दिसम्बर 2013 तक इसमें 2.75% की वृद्धि हो चुकी थी. दिसंबर 2013 में घर खरीदने के लिए हाउसिंग लोन पर ब्याज की दर 10.5 थीअर्थात 2004 में जब मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री का पदभार सम्भाला तब देश के नागरिकों को 25 लाख के हाउसिंग लोन पर 193750 रुपए ब्याज देना पड़ता था, लेकिन प्रधानमंत्री पद से उनकी विदाई के समय मई 2014 तक इसमें 68750 रुपए की वृद्धि हो चुकी थी। उस समय देश के नागरिकों को 2,62,500 रूपये वार्षिक ब्याज देना पड़ रहा था। आज मोदी सरकार के 6 वर्ष के शासनकाल के बाद होम लोन पर ब्याज की दर में 3.10% की कमी हुई है आज ब्याज दर 7.40% है। देश के नागरिकों को 185000 रू ब्याज देना पड़ रहा है। अर्थात उन्हें 77000 रू प्रतिवर्ष की बचत हो रही है। 

3- इसी प्रकार अटल जी की सरकार की विदाई से पहले 2003 में एजुकेशन लोन पर ब्याज की दर 8.25% थी। लेकिन दस वर्ष बाद महान अर्थशास्त्री प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की सरकार की विदाई से पहले दिसम्बर 2013 तक इसमें 5% की वृद्धि हो चुकी थी दिसंबर 2013 में एजुकेशन लोन पर ब्याज की दर 13.25% हो चुकी थी अर्थात 2004 में जब मनमोहन सिंह ने प्रधानमंत्री का पदभार सम्भाला था उस समय देश के नागरिकों को 10 लाख के एजुकेशन लोन पर 82500 रुपए ब्याज देना पड़ता था, लेकिन प्रधानमंत्री पद से मनमोहन सिंह की विदाई के समय मई 2014 तक इसमें 50000 रुपए की वृद्धि हो चुकी थी। उस समय देश के नागरिकों को 132500 रूपये वार्षिक ब्याज देना पड़ रहा था। 

आज मोदी सरकार के 6 वर्ष के शासनकाल के बाद एजुकेशन लोन पर ब्याज की दर में 3.7% की कमी हुई है आज ब्याज दर 9.55% है। अर्थात मई 2014 तक 10 लाख के एजुकेशन लोन पर 132500 रूपये ब्याज देना पड़ता था। आज इतनी ही रकम के एजुकेशन लोन पर 95500 रू ब्याज देना पड़ता है। (ब्याज की यह सभी दरें भारतीय स्टेट बैंक की हैं) यह केवल 3 ऐसे बिंदु हैं जिनसे यह स्पष्ट हो जाता है कि देश के मध्यम व उच्च मध्यम वर्ग को प्रतिवर्ष कितनी आर्थिक राहत दे रही है,सरकार।

इस आर्थिक राहत में यदि दवाइयों के घटे दाम। देश भर में खुले हज़ारों जनऔषधि केन्द्रों में बाजार मूल्य से 70 से 80 प्रतिशत कम दामों पर जेनरिक नाम से बिक रही दवाओं कारण मिली राहत की न्यूनतम राशि को भी यदि इसमें शामिल कर दूं तो राशि बहुत बड़ी हो जाएगी। अभी इसमें अन्य अनेक वह छोटी मोटी राशि नहीं जोड़ी है जो VAT की जगह GST आने के कारण लगभग डेढ़ दर्जन अन्य प्रकार के टैक्सों से मिले छुटकारे एवं रेस्टोरेंट होटल आदि में लगने वाले टैक्सों की दरों में लगभग 8% की कमी के कारण मिली है। ऊपर जितने बिन्दुओं पर चर्चा की है वो सभी इस देश के उच्च मध्यम, मध्यम तथा निम्न मध्यम वर्ग से ही सम्बन्धित हैं। आज़ादी के पश्चात के 67 वर्षों के दौरान किसी भी सरकार ने मध्यम व उच्च मध्यम वर्ग को इतनी आर्थिक राहत नहीं दी थी, जितनी अपने मात्र 6 साल के कार्यकाल में मोदी सरकार ने देश के मध्यम वर्गीय परिवार को दी है। 

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