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मंगलवार, 26 मई 2020

प्रतापगढ़ में ताश के पत्तों के साथ बंटा कोरोना वायरस का संक्रमण।

जनपद प्रतापगढ़ में अब तक कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या पहुँची 66, अब तक 3कोरोना मरीजों की हो चुकी है,मौत जबकि 15लोग जीत चुके हैं, कोरोना की जंग।



देश मे कोरोना के खिलाफ जंग जारी है। कोरोना संक्रमण के आंकड़े तेजी से जंगल में आग की तरह फैल रहे हैं। देश मे शहर हो या गाँव सभी जगहों पर कोरोना का संक्रमण तेजी से पाँव पसार रहा है। उत्तर प्रदेश के जनपद प्रतापगढ़ में भी कोरोना के खिलाफ जंग जारी है। इसी जंग के बीच कोरोना संक्रमण मरीजों की संख्या 66 पहुँच गई। दूसरे राज्यों से आने वाले परदेशियों ने जिले के आंकड़ों में लगातार बढ़ोत्तरी कर रहे हैं। प्रत्येक राज्यों से आने वालों को होम क्वारंटाइन कराने के दावे जिला प्रशासन द्वारा लगातार किये जा रहे हैं। परंतु हकीकत कुछ और ही है। सरकारी आकड़ों पर विश्वास करें तो जितने परदेशी दूसरे राज्यों से आये हैं, उससे अधिक परदेशी और प्रवासी मजदूर स्वयं के संसाधन से अपने घरों तक पहुँच कर बिना स्वास्थ्य परीक्षण कराये घर पर रहने लगे। घर पर तो रहने ही लगे साथ ही गाँव और बाज़ार में घूमने भी लगे। 

" जब कोरोना संक्रमण के मरीज थोक भाव में मिलते हैं तो मीडिया में सिर्फ दिखाने के लिए अख़बारों की हेडलाइन और न्यूज़ चैनलों में बिग ब्रेकिंग चलाई जाती है कि कोरोना बम फूटा...जिससे जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग में हडकम्प मच गया। ये सब नाटक है जनपद प्रतापगढ़ के रानीगंज तहसील के बसहा गांव में एक साथ 6 कोरोना पॉजिटिव मरीज पाएं गए हैं। इस तरह अब जिले में कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या 66 हो गई है, अब तक 3 कोरोना मरीजों की मौत हो चुकी है जबकि 15 लोग कोरोना की जंग जीत चुके है। मुंबई से आए राजेन्द्र निवासी-रानीगंज बसहा जो होम क्वारंटाइन था, जिसने अपने आस पास के ग्रामीणों के साथ ताश के पत्ते खेले और जब राजेन्द्र की जांच रिपोर्ट कोरोना संक्रमित पाई गई तो परिजनों और साथ में ताश के पत्ते फेंटने वालों की भी जाँच कराई गई। जांच में चार परिजनों सहित दो साथ में ताश खेलने वालों की भी रिपोर्ट कोरोना पॉज़िटिव आई एक साथ 6 लोगों की रिपोर्ट पॉज़िटिव आने के बाद प्रशासनिक अमले में कहने और सुनने के लिए हड़कम्प मच गया है "
परदेश से आने वाले परदेशियों को न तो अपने जीवन का खतरा समझ में आ रहा है और न ही अपने परिवार वालों के जीवन के खतरे को समझ पा रहे हैं। जब ये अपने और अपने परिवार के जीवन को संकट में दाल सकते हैं तो समाज इनके लिए गया भाड़ में ! तभी तो देश की आर्थिक राजधानी मुंबई  से आने के बाद भी अपना और अपने परिवार के साथ ही अपने समाज का ख्याल नहीं रख सके। जिला प्रशासन के होम क्वारंटाइन कराने की हवा उस समय निकल गई जब देश के उस राज्य से आने वाले लोग मनमानी करते पाए गए। ऐसा इसलिए कहा जा सकता है, क्योंकि देश में महाराष्ट्र अकेले ही 50 हजार कोरोना संक्रमण के मरीज अभी तक पाए गए हैं।   

सबसे आश्चर्यजनक बात ये रही कि जिन्हें होम क्वारंटाइन कराने का दावा शासन और प्रशासन कर रहा था वो लोग ताश के पत्ते खेल रहे थे। जब मुंबई से आए राजेन्द्र की जाँच रिपोर्ट पॉज़िटिव आई तो परिजनों और साथ में तास के पत्ते फेंटने वाले परिजनों सहित दो साथ में ताश खेलने वालों की भी रिपोर्ट कोरोना पॉज़िटिव आई। जिला प्रशासन से सवाल है कि यदि मुंबई से आये लोग होम क्वारंटाइन कराये गए थे तो वो ताश का पत्ता कैसे खेलने लगे ? इस संक्रमण को फ़ैलाने की जिम्मेवार कोई लेगा ? शायद नहीं ! फिर तो ऐसे ही संख्या गिनते रहिये। बहुत जल्द आकड़ा सैकड़े में होगा ! चूँकि होम क्वारंटाइन के नाम पर जो नाटक चल रहा है वो अधिक दिनों तक रुकने वाला नहीं हैं। सीएमओ एके श्रीवास्तव ने बताया कि अब जिले में 66 केस हो गए हैं। 15 मरीज स्वस्थ हो गए हैं, तीन की मृत्यु हुई है और 48 एक्टिव केस हैं, जिनका इलाज चल रहा है। जिले से अब तक 1695 सैंपल भेजे गए हैं जिसमें से 1495 की रिपोर्ट आई है।

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