दिन प्रतिदिन प्रतापगढ़ में कोरोना संक्रमण का बढ़ रहा है,प्रकोप

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कोरोना संक्रमण से बढ़ते मरीज जिला प्रशासन व पुलिस प्रशासन की नाकामी का परिणाम है...!!!
राज्यों से आने वाले लोगों की निगरानी हेतु ग्राम पंचायत स्तर पर बनी समितियों की दशा भगवान भरोसे...!!!
शहरों में भी निगरानी समिति की दशा बद से बद्तर है,वार्ड सभासद के पास न तो इसके लिए कोई बजट है और न ही कोई अधिकार। सिर्फ निगरानी समिति का मुखिया वाला मिला है,तमगा...!!!

उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ में लगातार कोरोना संक्रमित मरीजों में लगातार इजाफा हो रहा हैइससे स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। जनपद में कोरोना के संक्रमण का आलम ये है कि अब जब भी जाँच रिपोर्ट आ रही है तो कभी आधा दर्जन तो कभी एक दर्जन तो कभी डेढ़ दर्जन कोरोना संक्रमित मरीज की रिपोर्ट आ रही है जिले में अब कुल कोरोना मरीज़ों की संख्या बढ़कर 56 पहुंच गई है, जिसमे 12 मरीज़ ठीक होकर अपने घर जा चुके है जबकि एक मरीज़ की मौत हो चुकी है...!!!
सीएमओ ऑफिस से आई प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार अब तक जिले के कुल 1117 लोगों के सैंपल जांच भेजे गए हैं,जिनमे 837 लोगों की रिपोर्ट आ चुकी हैवहीं पूरे जिले में कुल 10734 लोगों को होम क्वॉरेंटाइन कराया गया है। ये तो रहा सरकारी आकड़ा। सच तो ये है कि जिले में यदि सरकारी आकड़े 10734 लोगों को होम क्वॉरेंटाइन कराया गया है तो इतनी ही संख्या में स्वतः अपने संसाधनों से प्रवासी मजदूर और परदेशी बाहर से आकर बिना किसी जाँच पड़ताल कराये अपने घरों में घुस गए और अपनी दबंगई के कारण वो बिना किसी रोकटोक के गाँव और बाजारों में घूम रहे हैं। उन्हें लेश मात्र की चिंता न तो अपनी है और न ही अपने परिवार की है। अब जिसे अपने और अपने परिवार के जीवन की चिंता न होगी वो भला समाज और देश की चिंता क्यों और कैसे करेगा...???
जिले में कोरोना वायरस मरीज की तादात में जिस तरह इजाफा हो रहा है उससे स्वास्थ्य महकमें में तो हडकंप मचा हुआ है। साथ जी जिला प्रशासन की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं जिले का प्रशासनिक अमला पूरी तरीके से अलर्ट पर है और लिस्ट के अनुसार और इलाके को हॉट जोन घोषित करने के साथ ऐसे लोगों को चिन्हित कर रहा है जो पॉज़िटिव मरीजों के संपर्क में थे। जिस तरह से कोरोना के नए मरीज प्रतापगढ़ में सामने आ रहे हैं उससे तो यही लग रहा है कि प्रतापगढ़ जनपद जो अभी तक ऑरेंज जोन में है वो जल्द ही रेड जोन में जा सकता है। इस बात से सभी परेशान जरुर हैं,परन्तु जब बारी आती है कि समाज और देश हित में स्वयं के सहयोग की तो लोग बगल झाँकने लगते हैं। गाँवों की बात करें तो जिला प्रशासन निगरानी समिति तो बना दिया और उसका मुखिया ग्राम प्रधान को बना दिया,परन्तु प्रधानों को कोई अधिकार नहीं दिया कि वो कोई एक्शन ले सके। कई प्रधान तो यहाँ तक कह गए कि 9माह बाद पंचायत चुनाव है, अपना चुनाव कोरोना संक्रमण की वजह से क्यों खराब करें...???
प्रतापगढ़ के संक्रमित मरीजों को उनके जिले में बनाए गए होम क्वारंटीन सेंटर में रखा जाएगा। कोटवा-बनी कोविड-19 लेवल-1 हॉस्पिटल नहीं लाया जाएगा। वहीं फतेहपुर के मरीजों को भी प्रतापगढ़ ले जाए जाने की बात कही जा रही है। प्रतापगढ़ के सीएमओ डॉ अरविन्द कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या अभी तक 56 हो चुकी है। उन्होंने बताया कि मुंबई से लौटे श्रमिक और पॉजिटिव मरीज के परिजनों में कोरोना की पुष्टी होने से आंकड़ा बढ़ा है। गाँव से प्राप्त हो रही रिपोर्ट पर ध्यान दिया जाए तो ऐसे भी लोग मृत हो जा रहे हैं जो दूसरे राज्यों से चलकर प्रतापगढ़ पहुँचे थे और बिना किसी जाँच पड़ताल के ही अपने घर पर रहने लगे थे। कोरोना संक्रमण के डर वश वो अपनी जाँच कराने नहीं गए और पड़ोसियों ने सम्बन्ध ख़राब हो जाने के भय वश अपना मुंह नहीं खोला। मृत हो जाने के बाद उस गाँव के लोग सदमें में है और डर के मारे कुछ बोलने से परहेज कर रहे हैं...!!!
प्रतापगढ़ जिले में कोरोना मरीजों की संख्या अब तक 56 हो चुकी है। 12 मरीज स्वास्थ होकर डिस्चार्ज हो चुके है। जबकी 2 कोरोना पॉजिटिव मरीज की मौत हो चुकी है। बाकी सभी बचे एक्टिव मरीजों का इलाज चल रहा है। वहीं पॉजिटिव रिपोर्ट आने के बाद इलाके को सील किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि लॉकडाउन में बरती जा रही नरमी पर प्रशानिक लापरवाही के चलते लगातार जिले में आंकड़े बढ़ रहे है। जिले में एक लाख से अधिक प्रवासी मजदूर दिल्ली, मुंबई, गुजरात से अपने गांव पहुँच चुके हैं। लेकिन ये सभी क्वारंटाइन के बजाय लगातार गांव से लेकर बाजार तक घूम रहे हैं। शिकायत के बाद भी ऐसा आरोप है न तो उनका स्वास्थ्य परीक्षण कराया जा रहा है और न ही उनको बाजारों और गांव में घूमने से पुलिस रोक पा रही है। जिसके चलते जिले में कोरोना पॉजिटिव की संख्या में भारी इजाफा हो रहा है...!!!
कोरोना मरीजों की बात करें तो जिले में सभी तहसीलों से कोरोना के संक्रमित मरीज पाए जा रहे हैंवहीं सबसे अधिक पॉजिटिव केस कुंडा इलाके में मिले हैं। अभी तक जितने कोरोना संक्रमित मरीज मिले हैं उनकी ट्रेवल्स हिस्ट्री है और वो ज्यादातर माहाराष्ट्र से यात्रा करके जिले में आये हैं और संक्रमण को बढ़ाए हैं। यदि जिला प्रशासन और स्वास्थ्य महकमें की ऐसे ही लचर ब्यवस्था रही तो प्रतापगढ़ की दशा बद से बद्तर होने से कोई रोक नहीं सकता। सबसे खराब दशा तो स्वास्थ्य महकमें की है। उसका मुखिया डॉ अरविन्द कुमार श्रीवास्तव के सेहत पर कोरोना संक्रमण के बढ़ते दबाव पर भी फर्क नहीं डाल सका है। सीएमओ प्रतापगढ़ का सारा ध्यान धन संचय में लगा हुआ है। वर मरे या कन्या पंडित को अपना दक्षिणा से मतलब रहता है। ठीक उसी फार्मूले पर सीएमओ प्रतापगढ़ डॉ अरविन्द कुमार श्रीवास्तव जी कार्य कर रहे हैं। उन्हें सिर्फ और सिर्फ धन चाहिए वो चाहे जिस तरीके से मिले...!!!

rameshrajdar

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