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रविवार, 31 मई 2020

चीन और भारत की वर्तमान सामरिक स्थिति में कौन है, किस पर भारी ?

कांग्रेसी नौटंकी के चेहरे पर कालिख पोत रही है,यह सच्चाई...
➤सतीश मिश्र -
26 मई 2014 को मोदी सरकार के गठन के 80 दिन बाद 13 अगस्त, 2014 को तत्कालीन गृह राज्यमंत्री किरण रिजिजू ने राज्यसभा में पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में तिथिवार वर्षवार विवरण देते हुए बताया था कि 2010 से 4 अगस्त 2014 तक चीन ने कुल 1612 बार भारतीय सीमा का अतिक्रमण/उल्लंघन किया है(तथ्य की पुष्टि के लिए पहला कमेंट देखें) लगभग 1645 दिनों की उपरोक्त अवधि में 1612 बार चीनी सेना द्वारा भारतीय सीमा के अतिक्रमण/उल्लंघन की उपरोक्त सच्चाई बताती है कि उस दौरान चीन की सेना औसतन लगभग रोजाना ही भारतीय सीमा का अतिक्रमण/उल्लंघन कर रही थी। 
वर्ष-2010 से 4 अगस्त 2014 तक चीन ने कुल 1612 बार भारत चीन सीमा का अतिक्रमण किया था,इस खबर की पुष्टि इस लिंक पर क्लिक कर के करिए...!!!
https://zeenews.india.com/.../chinese-army.../230644
भारत और चीन में चल रही है टशन...
अतः आज चीन के साथ सीमा विवाद को लेकर हो रहे भारत के टकराव पर मोदी सरकार के खिलाफ़ कलपने बिलखने तड़पने और आगबबूला होने की राजनीतिक नौटंकी कर रही कांग्रेस तथा उसकी मुखिया सोनिया-राहुल-प्रियंका-मनमोहन की चौकड़ी को देश से बताना चाहिए कि उन 1645 दिनों के दौरान कांग्रेस नेतृत्व वाले यूपीए की तत्कालीन सरकार ने चीन के विरुद्ध कौन सा तीर मारा था, कौन सी तोप चलायी थी या कौन सी राजनीतिक/कूटनीतिक तिकड़म लगायी थी ?
वर्ष- 2010 से 4 अगस्त 2014 तक चीन ने कुल 1612 बार भारत चीन सीमा का अतिक्रमण किया था इस खबर की पुष्टि इस लिंक पर क्लिक कर के करिए...




आज उपरोक्त सवाल इन दिनों चीन के साथ भारत के विवाद पर कांग्रेस द्वारा की जा रही राजनीतिक नौटंकी के चेहरे पर कालिख पोतने का काम कर रहा है। यूपीए शासनकाल के दौरान चीन की सेना द्वारा भारतीय सीमा का अतिक्रमण/उल्लंघन कितना सफल, कितना सुपरहिट हुआ था और मोदी शासनकाल में चीन की सेना द्वारा भारतीय सीमा का अतिक्रमण/उल्लंघन कितना असफल, कितना सुपरफ्लॉप हुआ है। वह विवरण इन दिनों चीन के साथ भारत के विवाद पर कांग्रेस द्वारा की जा रही राजनीतिक नौटंकी के चेहरे की कालिख को बहुत ज्यादा गाढ़ा कर देगा। 


पीएम मोदी और चीन के पीएम जिनपिंग...
चीन की धमकियों, बनर घुड़कियों के सामने घुटने किसने टेके, मनमोहन सरकार ने या मोदी सरकार ने ? इस सवाल का जवाब देते हैं,यह तथ्य वर्ष-1999 में अटल जी की सरकार में सुरक्षा मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने भारत चीन सीमा से सटे हुए रणनीतिक रूप से अत्यन्त महत्वपूर्ण क्षेत्रों में 4643 किमी लम्बी 73 सड़कों के निर्माण के प्रस्ताव को स्वीकृति दी थी। 
मोदी शासन काल में सड़क निर्माण की गति के तथ्य...
https://swarajyamag.com/defence/india-is-building-border-roads-faster-than-before-this-could-be-one-reason-behind-chinas-aggressive-posture-along-the-lac?fbclid=IwAR3Cg3Yy0X-ES7alFjugRhtO2k4RvzcqduSN3bIhMRDxqg1Musz6cnoLQDQ

प्रस्ताव के अनुसार 2003 से 2006 के मध्य इन सड़कों का निर्माण होना था इनमें सीमा से सटी अत्यधिक महत्त्वपूर्ण 3346 किमी लम्बी 61 सड़कों का निर्माण सीमा सड़क संगठन (BRO) को करना था शेष 1297 किमी लम्बी 12 सड़कों का निर्माण CPWD को करना था लेकिन मई 2004 में अटल जी की सत्ता से विदाई के साथ यह कार्य ठंडे बस्ते में चला गया था। वर्ष-2006-07 में मनमोहन सिंह की यूपीए सरकार ने इस कार्य को प्रारम्भ करने का निर्णय लिया और 2012 तक इस कार्य को समाप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया किन्तु मई 2014 में यूपीए सरकार की विदाई के समय तक BRO द्वारा बनाई जाने वाली सीमा से सटी अत्यधिक महत्त्वपूर्ण 3346 किमी लम्बी 61 सड़कों में से केवल 18% कार्य हुआ था। मात्र 625 किमी लम्बी सड़क का निर्माण पूरा हुआ था 82% कार्य शेष रह गया था 
यहां विशेष रूप से उल्लेख करना आवश्यक है कि मार्च 2009 तक (3 वर्षों में) तो BRO ने 520 किमी लम्बाई की 12 सड़कों का निर्माण पूरा कर लिया था लेकिन अगले 5 वर्षों के दौरान उसने केवल 105 किमी लम्बी 7 सड़कों का ही निर्माण किया था ध्यान रहे कि यही वह कालखंड था, जिसमें 2010 से 2014 तक चीन ने 1645 बार भारतीय सीमा का अतिक्रमण किया था अतः उपरोक्त 5 वर्षों (2009-14) के दौरान चीन सीमा से सटी महत्त्वपूर्ण रणनीतिक सड़कों के निर्माण कार्य की गति में लगभग 8 गुना की गिरावट बताती है कि मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली तत्कालीन कांग्रेसी यूपीए की सरकार ने चीन की बंदर घुड़कियों के सामने पूरी तरह घुटने टेक दिए थे चीन की धमकियों के समक्ष हाथ खड़े कर दिए थे अगर ऐसा नहीं था तो कांग्रेस विशेषकर "सोनिया राहुल प्रियंका मनमोहन" की कांग्रेसी चौकड़ी देश को बताए कि उन 5 वर्षों के दौरान चीन सीमा से सटी महत्त्वपूर्ण रणनीतिक सड़कों के निर्माण कार्य की गति में लगभग 8 गुना की गिरावट क्यों हुई थी ?
मई 2014 में सत्ता में आने के बाद मोदी सरकार ने इस कार्य को युद्धस्तर पर प्रारम्भ किया परिणाम स्वरुप मार्च 2018 तक 2316 किमी सड़क निर्माण कर 68% कार्य पूर्ण किया मार्च 2019 तक 2550 किमी सड़क निर्माण कर लगभग 75% कार्य पूर्ण किया और मार्च 2020 तक लगभग 2900 किमी सड़क निर्माण कार्य कर 85% से अधिक कार्य पूर्ण किया जा चुका है अगले वर्ष 2021 तक 3346 किमी लम्बी इन 61 सड़कों के निर्माण का कार्य BRO पूर्ण कर लेगा और 2022 तक 4643 किमी लम्बी 73 सडकों वाला यह प्रोजेक्ट पूर्ण हो जाएगाइसके साथ ही 125 पुलों का निर्माण भी BRO कर रहा है इन दिनों चीन के साथ भारत के विवाद पर कांग्रेस द्वारा की जा रही राजनीतिक नौटंकी के चेहरे की कालिख को उपरोक्त तथ्य बहुत ज्यादा गाढ़ा कर रहे हैं

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