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बुधवार, 20 मई 2020

केवल न्यूज चैनलों के भरोसे रहिएगा तो उल्लू को कबूतर ही कहिएगा

#सनसनीखेज #बिगब्रेकिंग, #ब्रेकिंग न्यूज जैसे शब्दों से बढ़ातें हैं, न्यूज़ चैनल वाले अपनी टीआरपी...!!!
टीआरपी की कहानी सतीश मिश्र की जुबानी...!!!
मुम्बई से पटना की दूरी है, लगभग 1800 किमी यदि मुम्बई से पटना के मध्य 3 फुट की जगह में एक के पीछे एक व्यक्ति को खड़ा किया जाए तो उस कतार में खड़े व्यक्तियों की संख्या जब 19-20, लाख पहुंचेगी तो वो कतार मुम्बई से पटना पहुंच चुकी होगी लेकिन कल से कांग्रेसी प्रवक्ता और न्यूज चैनलों के एंकर पूरी ताकत से राग अलाप रहे हैं कि करोड़ों प्रवासी मजदूर सड़कों पर चल पड़ा है आप स्वयं तय करिए कि सच क्या है...???
अब यह भी समझ लीजिए कि एक या दो नहीं बल्कि 50,000 ट्रकों में ठूँस कर, लाद कर प्रवासी मजदूर लाए जाएं तो उनकी संख्या 20 लाख से अधिक नहीं हो पाएगी जबकि सच यह है कि ऐसे ट्रकों की संख्या अधिकतम 5-6 हजार या इससे भी काफी कम ही है लेकिन कल से कांग्रेसी प्रवक्ताओं और न्यूजचैनलों के एंकरों का हुड़दंग चल रहा है कि ट्रकों में करोड़ों मजदूर पलायन कर रहे हैं जबकि सच यह है कि 15 दिनों में 1000 से अधिक रेलगाड़ियां चला कर सरकार 12 लाख मजदूरों को उनके प्रदेश पहुंचा सकी है इतने मजदूरों के लिए 30,000 ट्रकों की आवश्यकता पड़ती मेरे विचार से उपरोक्त तथ्यों से आप मित्र समझ गए होंगे कि "करोड़ों" प्रवासी मजदूरों के पलायन की कहानी का सच क्या है...???
अब जानिए कि ब्रेकिंग न्यूज के सनसनीखेज चटखारों के साथ झूठ परोसने का यह गोरखधंधा कैसे होता है, क्यों होता है, और न्यूज चैनलों की ऐसी होड़ में "सच" की निर्मम हत्या कैसे की जाती है लगभग 10 वर्ष पहले के मेरे अपने अनुभव के माध्यम से उपरोक्त सच को आज आप मित्र भी जानिए समझिए 2010 में इमैजिन चैनल पर "राखी का इंसाफ" नाम का रियल्टी शो बहुत हिट हो रहा था उसके एक एपिसोड में भाग लेकर लौटे एक व्यक्ति की 20-25 दिनों बाद मृत्यु हो गयी थी उस एपिसोड में उस व्यक्ति को अपनी पत्नी के साथ दुष्टाचरण के लिए राखी सावंत ने बहुत बुरी तरह लताड़ा/फटकारा था उसकी एक करतूत के कारण उसे नामर्द भी कह दिया था....!!!
उस एपिसोड के प्रसारण के 20-25 दिन बाद उसकी मृत्यु हो गई थी. उसकी मौत के कुछ घंटों बाद ही न्यूजचैनलों पर ब्रेकिंग न्यूज की पट्टियां चलने-चमकने लगी थीं कि राखी सावंत द्वारा लताड़े जाने से, नामर्द कहे जाने से आहत होकर उस व्यक्ति ने आत्महत्या कर ली संयोग से उस शो की स्टोरी-रिसर्च विंग का एक महत्वपूर्ण प्रमुख अंग मैं स्वयं था और उस व्यक्ति को सपरिवार मुंबई लेकर मैं स्वयं ही गया था न्यूजचैनलों के हंगामे से उत्साहित उस व्यक्ति के मामा ने जो उसका संरक्षक/पालक भी था और उसके जीवन में आये तूफ़ान का खलनायक तथा पुलिस रिकॉर्ड में नामजद हिस्ट्रीशीटर भी था. उसी मामा ने राखी सावंत समेत 4 व्यक्तियों के खिलाफ थाने में FIR भी दर्ज़ करा दी थी उस FIR में एक नाम मेरा भी था 
उस समय मैं दिल्ली में था और देर शाम की फ्लाईट से मुझे मुंबई पहुंचना था कार्य की व्यस्तता के कारण टीवी देख नहीं सका था, तभी शो के निर्माताओं द्वारा मुंबई से फोन करके मुझे पूरे घटनाक्रम के विषय में जानकारी दी गयी उनकी जानकारी इन न्यूजचैनलों द्वारा चलायी जा रही ब्रेकिंग न्यूज वाली पट्टियों तक ही सीमित थी अतः मैंने उनसे कहा ऐसा होना नहीं चाहिए, थोड़ा रुकिए मैं पता करके बताता हूं मामला झांसी का था अतः मैंने वहां अपने सम्पर्कों व संबंधों के तार जोड़े तो ज्ञात हुआ कि पीलिया रोग से गंभीर रूप से ग्रसित होने के कारण तीन दिन पहले उस व्यक्ति को एक नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया था, जहां कल रात उसकी हालत बहुत बिगड़ जाने के कारण उसे रात में ही झांसी मेडिकल कॉलेज भेज दिया गया था, जहां सवेरे उसकी मृत्यु हो गयी थी  उसके मृत्यु प्रमाण पत्र में मेडिकल सुपरिंटेंडेंट ने बहुत साफ़ शब्दों में उसकी मौत का कारण अत्यधिक शराब पीने के कारण ध्वस्त हो चुके लिवर पर गंभीर पीलिया रोग के जबरदस्त आक्रमण तथा पीलियाग्रस्त अवस्था में भी शराब का पिया जाना लिखा था 
झांसी से लगभग 450 किमी दूर दिल्ली में लगभग दोपहर 2 बजे मुझे मिले समाचार के बाद अपने संबंधों संपर्कों के तार जोड़कर केवल 2 घंटों में शाम 4 बजे तक मैंने उस व्यक्ति के मृत्यु प्रमाणपत्र की प्रति समेत पूरी जानकारी अपने पास दिल्ली मंगवा ली थी और मुंबई भी भेज दी थी लेकिन न्यूज चैनलों पर उस व्यक्ति की तथाकथित "आत्महत्या" का किस्सा जारी था जो जानकारी केवल 2 घंटों में मैंने दिल्ली में होते हुए कर ली थी वो जानकारी क्या घटना स्थल पर मौजूद किसी न्यूज चैनल का संवाददाता नहीं कर पाया होगा...? नहीं ऐसा नहीं था, क्योंकि दूसरे दिन झांसी के सभी स्थानीय अख़बारों ने भी उस व्यक्ति की मेडिकल रिपोर्ट का विवरण छापा था इसके बावजूद न्यूजचैनलों पर तथाकथित आत्महत्या का ही राग अलापा जा रहा था संयोग से एक प्रतिष्ठित अख़बार का क्राइम रिपोर्टर जो एक न्यूज चैनल का झांसी में संवाददाता (स्ट्रिंगर) भी था वो अपने अखबार में तो उस मेडिकल रिपोर्ट का जिक्र करते हुए वास्तविक स्थिति ही लिख रहा था, लेकिन अपने न्यूज चैनल पर उसी "तथाकथित आत्महत्या" का ही राग अलाप रहा था 
अपने एक पत्रकार मित्र के माध्यम से जब उस अख़बार के संपादक महोदय के सामने यह स्थिति रखी गयी तो उन्होंने अपने उस क्राइम रिपोर्टर को बुलाकर इसका कारण पूछा उस क्राइम रिपोर्टर का जवाब चौंकाने वाला था उसने बहुत साफ़ शब्दों में कहा था कि, सर सच मैं जानता हूं अख़बार में वही सच लिख भी रहा हूं, चैनल को भी मैंने पहले दिन ही सच बता दिया था, लेकिन चैनल की तरफ से मुझे सख्त हिदायत दी गयी है कि इस खबर को कम से कम 4-5 दिन तक "आत्महत्या" की तरह ही चलाते रहो इसलिए मैं मजबूर हूं बात यही खत्म नहीं होती, हद तो तब हो गयी थी जब उस मृत व्यक्ति की पत्नी जो अत्यंत गरीब थी और उसके वो अभिभावक जो मेरा बहुत सम्मान करते थे वो भी दूसरे दिन रात को न्यूजचैनलों में सच के बिलकुल विपरीत बोलते दिखेउनके बयान सुनकर मुंबई में मैं हतप्रभ था
अतः उसी दिन रात में मैंने झांसी में अपने संपर्कों का इस्तेमाल कर उनसे सम्पर्क साधा तो बुरी तरह चौंका उनको एक न्यूज चैनल की तरफ से एक नेतानुमा क्षेत्रीय दबंग के माध्यम दस हजार रुपये इस निर्देश के साथ पहुंचाए गए थे कि शाम को चैनल वाले आएंगे उनसे तुम्हे यही कहना है खैर इस समस्या का समाधान मैंने फिर अपने तरीके से किया आज उसका जिक्र यहां अप्रासंगिक होगा किन्तु इस सबके बावजूद तथाकथित आत्महत्या का राग न्यूज चैनलों पर 4-5 दिनों तक नॉनस्टॉप चला था इस सरासर सफ़ेद झूठ को फ़ैलाने की जो शर्मनाक वजह मुझे मुंबई में पता चली थी, वह यह थी कि 2 न्यूज चैनल ऐसे थे, जिनके मनोरंजन चैनल भी चलते थे और "राखी का इन्साफ" रियल्टी शो का प्रसारण टाइम उन दोनों न्यूज चैनलों के मनोरंजन चैनलों पर चल रहे बहुत महंगे और बड़े बजट वाले रियल्टी शो से टकरा ही नहीं रहा था, बल्कि उनकी पूरी TRP और विज्ञापन खा गया था 
इस तरह 4 दिनों तक सरासर सफ़ेद झूठ को सच बनाकर देश के सामने इसलिए परोसा जा रहा था ताकि "राखी का इन्साफ" रियल्टी शो पर प्रतिबंध लग जाए क्योंकि वो दोनों न्यूजचैनल बड़े और नामी गिरामी थे इसलिए शेष न्यूज चैनल सनसनी फैलने की उस भेड़चाल में स्वतः ही शामिल हो गए थेइसमें उन्हें आंशिक सफलता भी मिली थी, शो पर प्रतिबंध तो नहीं लगा था, लेकिन इमैजिन चैनल को शो का प्रसारण टाइम बदलने के सरकारी दबाव के आगे झुकना पड़ा था जबकि वास्तविकता यह है कि राखी सावंत और स्वयं मेरे समेत मेरे 2 अन्य सहयोगियों के खिलाफ दर्ज़ FIR को रद्द कराने के लिए जब मैं इलाहबाद उच्च न्यायालय पहुंचा था तो तथ्यों, साक्ष्यों को देखने समझने के बाद उस FIR को रद्द करने का फैसला सुनाने में माननीय उच्च न्यायालय को केवल 15 मिनट लगे थे 
इसके बाद मैंने साक्ष्यों समेत पूरी तैयारी कर ली थी उन न्यूज चैनलों को अदालत के कठघरे के भीतर पहुंचाने की साक्ष्य ऐसे थे कि बात अदालत के कठघरे पर ही खत्म नहीं होती कई लोगों को सींखचों के पीछे भी जाना पड़ता किन्तु मुंबई में "शो" के निर्माताओं ने ही ऐसा करने से मना कर दिया था तो यह है सनसनीखेज ब्रेकिंग न्यूजों की हकीकत आज कल भी सड़को पर प्रवासी मजदूरों की तथाकथित "करोड़ों" की संख्या के बहुत से किस्से न्यूजचैनलों पर नॉनस्टॉप सनसनीखेज ब्रेकिंग न्यूज बनकर चल रहे हैं लेकिन प्रवासी मजदूरों की "करोड़ों" की संख्या का सच क्या है यह मैंने पोस्ट की शुरुआत में तथ्यात्मक तर्कों से स्पष्ट किया है मेरे विचार से आप सभी मित्र अब यह तो समझ ही गए होंगे कि पोस्ट की शुरूआत में ही मैंने क्यों लिखा कि... केवल न्यूजचैनलों के भरोसे रहिएगा तो उल्लू को कबूतर ही कहिएगा...!!!

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