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मंगलवार, 2 जुलाई 2019

प्रतापगढ़ के नव निर्वाचित सांसद संगम लाल गुप्ता के कथित पीए पर उठ रहे हैं,गंभीर सवाल

प्रधानमंत्री-नरेंद्र मोदी,भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष-अमित शाह सहित RSS-प्रमुख मोहन भागवत से रजिस्टर्ड डाक से शिकायती पत्र भेजकर लगाए हैं,संगीन आरोप...!!!
लोकसभा चुनाव के समय से मची है आपस में गदर जो चुनाव बाद हो रही है,सार्वजनिक...!!!
पीए,पीआरओ और प्रतिनिधि बनने को लेकर सांसद संगम लाल गुप्ता के यहाँ मची हुई है,रार...!!!
पाँच वर्ष तक सांसद से जुड़कर शोहरत और माल कमाना है,सभी का मकसद...!!!
RSSसे जुड़े स्वयं सेवक एवं भाजपा नेताओं ने संयुक्त रूप से की है,शिकायत...!!!
सांसद संगम लाल गुप्ता को सबको संजोये रखने की है,बड़ी चुनौती...!!!
सांसद से जुड़े हर लोग बता रहे हैं,अपना-अपना कथित पद...!!!
सांसद संगम लाल के यहाँ अंदरखाने की बातों पर गौर किया जाए तो बाहर की तरह अंदर भी व्यक्ति विशेष बनने की मची है,होड़...!!!
नामांकन से पूर्व भाजपा उम्मीदवार संगम लाल गुप्ता के साथ भगवा रंग में डूबे नामिका अधिवक्ता विवेक उपाध्याय...
शिकायत कर्ताओं में स्वयं सेवक नन्दन मिश्रा, सेवक कपिल तिवारी, रवि मिश्रा, प्रदीप मिश्रा, जय बहादुर, भाजपा नेता दिनेश सिंह, दीपक गुप्ता एवं राजेश पांडेय ने शिकायत कर नव निर्वाचित सांसद संगम लाल गुप्ता के ऊपर मूलतः सपाई मानसिकता से ग्रसित व्यक्ति को अपने कथित पीए के रूप में संरक्षण देने का लगाया है,बेहद संगीन आरोप...!!! सांसद संगम लाल गुप्ता से बात कर उनका पक्ष जानने का किया गया,प्रयास। बात न हो पाने से उनका पक्ष नहीं लिखा जा सका। बात होते ही रखा जायेगा,सांसद का पक्ष...!!!
नव निर्वाचित सांसद संगम लाल गुप्ता के अनुज दिनेश गुप्ता जो संगम यूथ फाउंडेशन के चेयरपर्सन हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि अभी सांसद जी का कोई प्रतिनिधि अधिकृत नहीं किया गया है। विधायक रहते जो लोग कार्य कर रहे थे,आज भी वही कार्य देख रहे हैं। अभी किसी को पीए अधिकृत किया ही नहीं गया तो सांसद पर संरक्षण का आरोप लगाने का कोई मतलब ही नहीं होता। अब कोई किसी का विरोधी है और वो सांसद के पास आता जाता है तो उसे भी भगाया नहीं जा सकता। सांसद जी उसके भी सांसद हैं जो उन्हें वोट किसी कारणवश नहीं दिया, उनका सांसद अब दूसरा तो कोई होगा नहीं ! इसलिए चुनाव बाद जो जीतता है,वो पूरे संसदीय क्षेत्र का सांसद होता है। यही लोकतंत्र की खूबसूरती है। जब सांसद का प्रतिनिधि/पीआरओ/पीए कोई नियुक्त होगा तो उसकी सूचना मीडिया के माध्यम से सार्वजनिक कर दी जाएगी...!!!
सबका साथ,सबका विकास और सबका विश्वास वाला पीएम के मूल मंत्र का निर्वहन करना सबसे सभी सांसदों के लिए होगी अग्नि परीक्षा...!!!
सवाल उठता है कि जब पीए,प्रतिनिधि और पीआरओ के पद पर किसी की नियुक्ति नहीं हुई तो आखिर किस अधिकार से सांसद संगम लाल गुप्ता अपने साथ आरोपित कथित पीए को दिल्ली से दौलताबाद की सैर किस रूप में करा रहे हैं। किसी का किसी के यहाँ जाना अलग विषय है,परन्तु किसी को जब सांसद अपने साथ दिल्ली दरबार से लेकर संसद भवन तक अपने साथ घुमाए और पास बनवाएगा तो आरोप में बल स्वतः आ जाता है। संगम लाल गुप्ता पर लोकसभा चुनाव के समय से ही कथित पी ए के नाम का विरोध शुरू हुआ था, जिसे दबाने का प्रयास भी किया गया। परन्तु अब विरोध के स्वर प्रतापगढ़ से दिल्ली तक पहुंच चुका है। अभी तक विरोध ओरल था,अब लिखित में शुरू हो गया है। शिकायत कोई और नहीं बल्कि भाजपा और संघ से जुड़े लोग कर रहे हैं। शिकायती पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि कथित पीए का काला कारनामा सहित उसके सपाई होने तक के गम्भीर आरोप हैं। फिर भी सांसद संगम लाल गुप्ता उस कथित पीए को सबसे अधिक तरजीह दे रहे हैं। इस बात की सच्चाई दबी जुबान से विधायक से सांसद बने संगम लाल गुप्ता के साथ जुड़े कई अन्य लोग भी स्वीकार किये हैं,परन्तु वो मुखर होकर इसका विरोध नहीं कर पा रहे हैं। पुरानी टीम को भी इस बात का मलाल है कि ऐसे कथित पीए जो अन्य जनप्रतिनिधियों का राजनीतिक पतन का कारण बना हो उसके रहने से संगम लाल गुप्ता का भी बंटाधार हो सकता है। उसे सांसद संगम लाल गुप्ता इतनी तरजीह क्यों दे रहे हैं...???
भाजपा और आरएसएस से जुड़े लोग जब नव निर्वाचित सांसद संगम लाल गुप्ता पर संगीन आरोप लगायेंगे तो पाँच वर्ष कैसे पार होगी उनकी नैय्या...???
सांसद संगम लाल गुप्ता की वो कौन सी कमजोर नस है जो कथित पीए जान गया है जिससे संगम लाल गुप्ता उसके मोह फांस में फंसे हुए हैं। विरोधी सबके होते हैं,परन्तु बहुत अपने यदि किसी एक का विरोध कर रहे हों तो उस जनप्रतिनिधियों को ऐसे विवादित ब्यक्ति को अपने से दूर कर देना चाहिये। पूर्व सांसद कुँवर हरिवंश सिंह भी यही गलती किये थे। राघवेंद्र सिंह "राजू" के लाख विरोध के बाद भी कुँवर साहेब अपने निजी सचिव के रूप में राघवेंद्र सिंह राजू को बनाए रखे। स्थिति इतनी खराब हुई कि चुनाव के 6माह पहले निजी सचिव राघवेंद्र सिंह राजू को हटाना पड़ा। उनके स्थान पर दीपक मिश्र को रखा गया। पूर्व सांसद कुँवर हरिवंश सिंह केंद्रीय कार्यालय पर 5वर्ष में 3कार्यालय प्रभारियों को बदला। निजी सचिव राघवेंद्र सिंह राजू का विरोध कुँवर साहेब के पुत्र रमेश सिंह तत्कालीन "ब्लाक प्रमुख" खुटहन, जौनपुर ने भी किया था, परन्तु सारे विरोध के बाद भी कुँवर साहेब निजी सचिव राघवेंद्र सिंह राजू को अपना निजी सचिव बनाए रखे। हलाँकि कुँवर साहेब निर्माण कार्य एवं लेनदेन के कार्य को निष्पादित करने के लिए अपने रिश्तेदार बाबा और अपने भतीजे राणा सिंह को रख रखा था। नव निर्वाचित सांसद संगम लाल गुप्ता भी पूर्व सांसद कुँवर हरिवंश सिंह के नक्शे कदम पर आगे बढ़ रहे हैं...!!!

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