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शुक्रवार, 26 जुलाई 2019

योगी सरकार की एन्टी भूमाफिया का गठन को लगा ग्रहण। राजस्व कर्मियों की वजह से जिले में फेल हुई योजना

जे छिनरा वो डोली संग" वाली कहावत को चरितार्थ करते हैं, जिले के राजस्वकर्मी...!!! 
कोतवाली नगर क्षेत्र के दहिलामऊ चांदमारी के पास सई नदी के किनारे जमीन पर भूमाफिया कर रहे,कब्जा...!!! 
प्रतापगढ़ के तत्कालीन जिलाधिकारी, विद्याभूषण द्वारा बच्चों के खेलने के लिए बनवाया जा रहा था, लगभग 14 बीघे सरकारी जमीन पर पिकनिक स्पॉट। लाखों रुपए खर्च करने के बाद भी राजस्व विभाग और भूमाफियाओं की मिलीभगत से हो गया,खेल। तत्कालीन जिलाधिकारी, प्रतापगढ़ विद्या भूषण ने चिन्हित कराई थी,जमीन। जिलाधिकारी विद्या भूषण के सपनों को साकार करने में तेज तर्रार भूमिका का निर्वहन करने वाले तत्कालीन उप जिलाधिकारी सदर, संजय खत्री (IAS) ने भरपूर साथ दिया,परंतु दोंनो अधिकारियों के जाते ही पिकनिक स्पॉट पर भूमाफियाओं की नजर गड़ गई और उस स्थल की प्लांटिंग शुरू हो गई। देखते ही देखते राजस्व कर्मियों की मदद से शहर के भूमाफियाओं ने एक योजना बनाई और योजना के क्रियान्वयन के लिए नगरपालिका प्रशासन को अपने खेल में शामिल किया। नगरपालिका का रोल तय किया गया कि वो अपना कूड़ा पहले वहाँ डंप करें ताकि उसकी दुर्गन्ध से उसके पास कोई जा न सके। फिर क्या था भूमाफियाओं और राजस्व कर्मियों की बनाई योजना आगे बढ़ निकली और पिकनिक स्पॉट पर नगरपालिका प्रशासन शहर का कूड़ा डंप करना शुरू किया। कुछ ही दिनों में पिकनिक स्पॉट का स्वरूप ही बदल गया। योजना के मुताबिक पिकनिक स्पॉट की भ्रूण हत्या जिले के भूमाफियाओं और राजस्व कर्मियों ने कर डाली। 
जिले के भूमाफिया इतने पॉवरफुल हैं कि वो किसी भी भूमि की प्लांटिंग कर सकते हैं। उन्हें लेशमात्र का न तो संकोच होता है़ और न ही सिस्टम का भय। क्योंकि सिस्टम उनके साथ बराबर का सहयोगी होता है़। तभी तो जिले के भूमाफिया सरकारी व गैर सरकारी भूमि की प्लॉटिंग करने में गुरेज नहीं करते। नगर कोतवाली क्षेत्र के दहिलामऊ चांदमारी के पास सई नदी के किनारे जमीन पर भूमाफिया कर रहे,कब्जा। मामले को जानते हुए भी जिला प्रशासन बना हुआ है,अनजान। बेशकीमती सरकारी जमीनों को बेच रहे हैं, शहर के बड़े-बड़े भूमाफिया एवं राजस्व कर्मी। प्रदेश की योगी सरकार की साख में पलीता लगा रहे,जिले में तैनात अधिकारी। खबर प्रकाशित करने के लिए वर्जन लेने पर पर रटा रटाया बयान देने के आदी हो गए हैं,सक्षम अधिकारी। प्रकरण संज्ञान में नहीं था,अब प्रकाश में आया हैं। जाँच कराई जायेगी जो भी दोषी होगा,उसके विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जायेगी। हकीकत में ऐसा कुछ भी नहीं किया जाता बल्कि कुछ दिन बीत जाने के बाद मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। क्योंकि दूध की रखवाली यदि बिल्ली को दी जायेगी तो परिणाम क्या होगा ये बताने की जरूरत नहीं...!!!

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