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सोमवार, 17 जून 2019

विधानसभा- 2022की बिछने लगी अभी से विसात

सत्ताधाधारी पार्टी के निशाने पर है,कुंडा व बाबागंज विधानसभा की सीट...!!!
विपक्षी पार्टियां सपा व बसपा भी नहीं छोड़ना चाहती कोई कसर...!!!
कुंडा विधानसभा में अभी से समाजवादी पार्टी की तरफ से सपा जिला अध्यक्ष छविनाथ यादव करने लगे हैं, तैयारी...!!!

लोकसभा चुनाव- 2019 से राजनीति में जबरदस्त सक्रिय हुए ठा.प्रकाश सिंह की दखल से कुंडा की राजनीति में विधानसभा चुनाव- 2022 में अभी से उफान आने लगा है। भाजपा उम्मीदवार विनोद सोनकर के चुनाव प्रचार से लेकर हर रणनीति में सहयोगी की भूमिका का निर्वहन करने वाले ठा.प्रकाश सिंह की सक्रियता के राजनीतिक मायने निकाले जाने लगे हैं। विधानसभा कुंडा व विश्वनाथगंज से भाजपा के टिकट के लिए प्रमुख रूप से अभय प्रताप "पप्पन सिंह" एवं युवा वाहिनी के ठा.प्रकाश सिंह वर्ष- 2017 के विधानसभा चुनाव में टिकट की दावेदारी की थी। परन्तु भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने एक सीट गठबंधन में देकर दूसरी सीट पर भी दोंनो दावेदारों को तवज्जो नहीं दिया।
विश्वनाथगंज विधानसभा से सिटिंग विधायक डॉ आर के वर्मा को अपना दल एस के सिम्बल पर भाजपा के गठबंधन से टिकट मिला। रामपुर खास में जहाँ भाजपा डमी उम्मीदवार उतारती रही,वही वर्ष- 2017 में छोटे सरकार को अपना उम्मीदवार बनाया था। छोटे सरकार अपने दम पर कांग्रेस उम्मीदवार अराधना मिश्रा उर्फ मोना को कड़ी टक्कर दी थी। भाजपा शीर्ष नेतृत्व यदि मुश्तैदी के साथ जिला संगठन के पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं को चुनाव में छोटे सरकार के सहयोग में उतारा होता तो परिणाम दूसरा होता। लगता है राजनीतिक दलों में शीर्ष स्तर पर एक दूसरे की महत्वपूर्ण सीटों पर सहानुभूति के आधार पर उम्मीदवार एवं प्रचार व प्रसार का कार्य किया जाता है।
रानीगंज विधानसभा और सदर प्रतापगढ़ विधानसभा में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह जनसभा को संबोधित करने पहुँचे थे। भाजपा से रामपुर खास के उम्मीदवार छोटे सरकार भी उनसे अपना दुखड़ा सुनाने के लिए पहुँचे थे,परन्तु छोटे सरकार को अपनी बात भी रखने का मौका नहीं मिला। विश्वनाथगंज विधानसभा के गठबंधन उम्मीदवार डॉ आर के वर्मा के चुनाव में केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह जनसभा को संबोधित करने पहुँचे थे,पर भाजपा से उम्मीदवार रहे छोटे सरकार को अपने केंद्रीय मंत्री का अपेक्षित सहयोग न मिला,जो पूरे चुनाव चर्चा का विषय रहा। जनसामान्य में ये चर्चा आम हुई थी कि जब भाजपा को रामपुरखास से अपने उम्मीवार छोटे सरकार का सहयोग नहीं करना था तो उन्हें उम्मीदवार ही क्यों बनाया ?
रानीगंज विधानसभा और सदर प्रतापगढ़ विधानसभा में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह जनसभा को संबोधित करने पहुँचे थे। भाजपा से रामपुर खास के उम्मीदवार छोटे सरकार भी उनसे अपना दुखड़ा सुनाने के लिए पहुँचे थे,परन्तु छोटे सरकार को अपनी बात भी रखने का मौका नहीं मिला। विश्वनाथगंज विधानसभा के गठबंधन उम्मीदवार डॉ आर के वर्मा के चुनाव में केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह जनसभा को संबोधित करने पहुँचे थे,पर भाजपा से उम्मीदवार रहे छोटे सरकार को अपने केंद्रीय मंत्री का अपेक्षित सहयोग न मिला,जो पूरे चुनाव चर्चा का विषय रहा। जनसामान्य में ये चर्चा आम हुई थी कि जब भाजपा को रामपुरखास से अपने उम्मीवार छोटे सरकार का सहयोग नहीं करना था तो उन्हें उम्मीदवार ही क्यों बनाया 
रानीगंज विधानसभा और सदर प्रतापगढ़ विधानसभा में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह जनसभा को संबोधित करने पहुँचे थे। भाजपा से रामपुर खास के उम्मीदवार छोटे सरकार भी उनसे अपना दुखड़ा सुनाने के लिए पहुँचे थे,परन्तु छोटे सरकार को अपनी बात भी रखने का मौका नहीं मिला। विश्वनाथगंज विधानसभा के गठबंधन उम्मीदवार डॉ आर के वर्मा के चुनाव में केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह जनसभा को संबोधित करने पहुँचे थे,पर भाजपा से उम्मीदवार रहे छोटे सरकार को अपने केंद्रीय मंत्री का अपेक्षित सहयोग न मिला,जो पूरे चुनाव चर्चा का विषय रहा। जनसामान्य में ये चर्चा आम हुई थी कि जब भाजपा को रामपुरखास से अपने उम्मीवार छोटे सरकार का सहयोग नहीं करना था तो उन्हें उम्मीदवार ही क्यों बनाया ?
जिला पंचायत सदस्य के चुनाव में ठा. प्रकाश सिंह सक्रिय हुए। अपने सभी विरोधियों के लाख चाहने के बाद भी ठा.प्रकाश सिंह जिला पंचायत सदस्य का चुनाव जीतकर बड़ा संदेश दिया। जिला पंचायत में एक बार फिर से बोर्ड बनाने का मौका अखिलेश सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे रघुराज प्रताप सिंह "राजा भईया" के पास सुरक्षित रहा। जिला पंचायत सदस्य के रूप में राजा भईया के कई खास सदस्य चुनाव में विजयी हुए थे। उम्मीद थी कि बहुत दिनों से राजा भईया और एमएलसी अक्षय प्रताप सिंह "गोपाल जी" से जुड़े रहने वाले अनिल प्रताप सिंह उर्फ लाल साहेब को हो सके तो इस बार मौका दिया जाए,परन्तु ऐसा हो न सका। त्रिस्तरीय कमेटी के सदस्य रहे विनय सिंह भी जिला पंचायत सदस्य का चुनाव जीते थे, वो भी जिला पंचायत के अध्यक्ष बनने की  उम्मीद अपने मन में पाल रखे थे। परन्तु उनकी भी इच्छा मन में ही हिलोरे मारकर दबी की दबी रह गई।
राजा भईया अपने विश्वास पात्र उमा शंकर यादव को जिला पंचायत के अध्यक्ष पद के लिये योग्य समझा और एक तीर से कई निशाना साधा। चूँकि सपा विधायक नागेन्द्र सिंह मुन्ना यादव की पत्नी भी जिला पंचायत का चुनाव जीतकर अपने मुखिया अखिलेश यादव से जिला पंचायत अध्यक्ष के टिकट की दावेदारी पेश की थी। इस लिहाज से राजा भईया ने उमा शंकर यादव के नाम को आगे कर विधायक मुन्ना यादव को चारों खाने चित्त कर दिया था। राजा भईया अपने अंदाज में अखिलेश यादव को भी ये बता दिया कि कुंडा और बिहार में वो जो चाहेंगे वही होगा। आनन्द भूषण सिंह "बब्बू राजा" को निर्विरोध एमएलसी बनाकर राजा भईया एक बार सबक ले लिये थे। अब कुंडा व बाबागंज के अतिरिक्त अन्य लोंगो पर एतबार करना राजा भईया के लिए आसान नहीं ! क्योंकि दूध की जली बिल्ली भी छाछ फूंक कर पीती है।
फिलहाल राजा भईया अब एक राजनीतिक पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं और उन्हें लम्बी राजनीति करनी है तो इन सब बातों से ऊपर उठकर सोचना होगा। लोकसभा चुनाव में जनसत्ता दल लोकतान्त्रिक के सिम्बल से एमएलसी अक्षय प्रताप सिंह "गोपाल जी" उम्मीदवार रहे और उनके चुनाव में पूर्व एमएलसी आनन्द भूषण सिंह "बब्बू राजा" जनसत्ता दल लोकतान्त्रिक में सारे गीले शिकवे भुलाकर शामिल हुए साथ ही खुलकर प्रचार भी किया। ऐसे में राजा भईया को भी पुरानी बातें भुलाकर सबको साथ लेकर ही आगे की राजनीतिक पारी खेलनी होंगी। क्योंकि अभी तक राजा भईया की राजनीति सिर्फ कुंडा और बाबागंज तक ही रहती थी और उसी के दम पर एमएलसी और जिला पंचायत पर कब्जा पाते रहे परन्तु सपा से दूरियां बनने के बाद अपनी राजनीतिक पार्टी बना लेने से अब राजनीतिक दलों से सामंजस्य पुराने जैसा नहीं बच पाया है। कांग्रेस, सपा, बसपा और भाजपा तीनों दल बेहतर से बेहतर उम्मीदवार उतारकर राजा भईया को उनके ही गढ़ बाबागंज एवं कुंडा में ही घेरने का प्रयास करेंगी ताकि एक क्षेत्रीय पार्टी का उदय ही न हो सके।
वर्ष- 2022 के मुख्य दंगल से ठीक पहले सूबे में विधायकों के त्यागपत्र से खाली हुई 12सीटों पर उप चुनाव में जोरदार आजमाइश होगी। 248- सदर प्रतापगढ़ की सीट पर भी उप चुनाव होने हैं। इस उप चुनाव में भाजपा और अपना दल एस के गठबंधन से भी स्थिति साफ हो जाएगी कि वर्ष- 2022 के चुनाव में भाजपा और अपना दल एस का गठबंधन बचेगा अथवा टूट जायेगा। चूँकि लोकसभा में अपना दल एस को जो 2सीटें मिली हैं वो भी प्रधानमन्त्री मोदी जी के नाम पर ही विजयश्री मिली हैं,अन्यथा नतीजा दूसरा होता। अपना दल एस के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद की कमान संभालते ही आशीष सिंह से अपना दल एस के विश्वनाथगंज विधानसभा से विधायक डॉ आर के वर्मा के सम्बन्ध में जो तल्खी आई वो सुधरने का नाम नहीं ले रही हैं। नतीजा ये हुआ कि डॉ आर के वर्मा अपना दल एस से दूर होते गए और भाजपा नेताओं के करीब ! भाजपा की भी रणनीति है कि वो गठबंधन दलों को विशेष तवज्जो न देते हुए उस वर्ग और जाति के नेताओं को अपनी पार्टी में मिलाकर उसकी काट तैयार करे जिससे उसका उस वर्ग और जाति के वोटबैंक सुरक्षित रहे। इस तरह भाजपा 248-प्रतापगढ़ के उप चुनाव में अपना उम्मीदवार उतार सकती है। ऐसा पार्टी के नेताओं और संभावित उम्मीदवारों की राय है।
सत्तासीन भाजपा वर्ष- 2022 की चुनावी दंगल में कुंडा व बाबागंज सहित रामपुरखास में भाजपा अपना किसे उम्मीदवार बनाती है ? क्योंकि प्रतापगढ़ जनपद में 7 विधानसभा सीटो में से चार सीटों पर भाजपा एवं सहयोगी दल अपना दल एस का कब्जा है। क्या तीनों  विधानसभा रामपुर खास, कुंडा एवं बाबागंज की सीटों  पर भाजपा अपने तटस्थ उम्मीदवारों के साथ पूरे मनोयोग से चुनावी मैदान में खड़ी रहेगी अथवा शीर्ष नेतृत्व शीर्ष स्तर पर सिर्फ दिखावा करते हुए अपने उम्मीदवार को आगे कर उसे पिटने के लिए छोड़ देगी। ऐसा इसलिए कहना पड़ रहा है,क्योंकि कुंडा और बाबागंज सीट से तटस्थ उम्मीदवार खोजे नहीं मिल पाता ! वैसे लोकसभा चुनाव में भाजपा उम्मीदवार विनोद सोनकर के पक्ष में स्वयं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी कुंडा में जनसभा के लिए आए थे। एक बार उनका कार्यक्रम लगा फिर टल गया तो उसका मैसेज उल्टा जाने लगा। फिर से मुख्यमंत्री का कार्यक्रम लगा परंतु इस बार भी योगी आदित्यनाथ जी ने कुंडा और बाबागंज के जनप्रतिनिधियों के लिये एक भी शब्द न बोले,जिसे लेकर बड़ी चर्चा रही। राजा भईया और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के सम्बन्धों को भी लेकर खूब चर्चा हुई।
हलाँकि कौशाम्बी से विनोद सोनकर की सीट और प्रतापगढ़ से संगम लाल गुप्ता की सीट को निकालने के लिये भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह स्वयं नजर गड़ाए हुए थे। दोंनो सीटों पर चुनावी जनसभा स्वयं किये और प्रधानमंत्री मोदी की जनसभा भी कराए। चूँकि जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के मंसूबों पर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह पानी फेरना चाहते थे। उसके लिए अमित शाह ने कौशाम्बी में विनोद सोनकर की मदद के लिये दो विशेष चेहरे लगाए। एक चेहरा युवा वाहिनी के ठा.प्रकाश सिंह एवं दूसरा चेहरा अभय प्रताप सिंह "पप्पन" का रहा। इन दो चेहरे की बदौलत भाजपा उम्मीदवार कुंडा व बाबागंज में टिक पाए। नहीं तो उनके साथ कोई टहलने वाला नहीं था। कौशाम्बी का चुनाव पाँचवें चरण में 6मई को था और प्रतापगढ़ का चुनाव छठे चरण में 12मई को था। लिहाजा इन दोंनो चेहरे को भाजपा ने विश्वनाथगंज में अंतिम समय में लगाया। 9मई को मानधाता में केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह की जनसभा में इन्हें लगाया गया।
BJP से वर्ष-2012में विश्वनाथगंज से उम्मीदवार रहे सुशील कुमार सिंह पूरे चुनाव विश्वनाथगंज विधानसभा में डटे रहे। चूँकि विश्वनाथ विधानसभा में सबसे अधिक क्षत्रिय हैं,सो क्षत्रिय क्षत्रपों को लगाया गया। जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के उम्मीदवार अक्षय प्रताप सिंह "गोपाल जी" का सबसे अधिक फोकस विश्वनाथगंज सीट पर था। राजा भईया भी चाहते थे कि उनके दोंनो उम्मीदवारों की जीत भले ही न हो परंतु सम्मानजनक हार जरूर मिले। साथ ही भाजपा उम्मीदवार की हार से उनका मंसूबा फलीभूत हो जाता और हार का श्रेय जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के उम्मीदवारों के सिर जाता। जिससे विधानसभा चुनाव- 2022 में मनमुताविक गठबंधन भाजपा से हो सकेगा। परंतु राजा भईया का मंसूबा यहाँ फेल गया। कौशाम्बी में तीसरे स्थान पर तो प्रतापगढ़ में चौथे स्थान पर करारी शिकस्त मिली और जमानत तक जब्त हो गई। ठा. प्रकाश सिंह को भाजपा संगठन ने प्रतापगढ़ में भी प्रचार के अंतिम दिन भोजपुरी सिने स्टार पवन सिंह की रोड़ शो में भी क्षत्रिय चेहरे के रूप में आगे रखा गया। परंतु उनसे जब विधानसभा चुनाव में उम्मीदवारी की बात की तो उनका दो टूक जवाब था कि उनकी पहली पसंद सीट विश्वनाथ विधानसभा है। विकल्प के रूप में पहले स्थान पर पट्टी और दूसरे स्थान पर सदर प्रतापगढ़ है।
चर्चित विधानसभा क्षेत्र कुंडा से उम्मीदवार होने की बात पर उनका जवाब था कि कुंडा से वो चुनाव नहीं लड़ेंगे। वजह पूँछने पर उन्होंने कहा कि वहाँ व्यक्ति नहीं पार्टी चुनाव लड़े और कम से कम पाँच वर्ष तक पार्टी और सरकारी तंत्र उस उम्मीदवार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर कार्य करे तो ही वहाँ कोई चुनाव लड़ सकता है। पार्टी यदि कुंडा से उम्मीदवार बनाती है के सवाल पर ठा.प्रकाश सिंह का टका सा जवाब था कि पार्टी लड़ने के लिये कहेगी तो देखा जाएगा। उनका कहना था कि हमें भी लगे कि पार्टी वास्तव में कुंडा का चुनाव जीतना चाहती है तो लड़ लिया जाएगा। परंतु एहसास होने के बाद ही ऐसा संभव है। कुछ इसी तरह का जवाब अभय प्रताप "पप्पन सिंह" का था। पप्पन सिंह की भी पहली पसंद विश्वनाथ विधानसभा ही है। जबकि भाजपा नेता सुशील कुमार सिंह विश्वनाथगंज विधानसभा को अपना मान रहे हैं और भाजपा उन्हें वर्ष-2012 में विश्वनाथगंज विधानसभा से अपना उम्मीदवार बना चुकी है। पप्पन सिंह ने तो दावा किया है कि जिस तरह लोकसभा में अपना दल का गठबंधन प्रतापगढ़ से खत्म होकर भाजपा अपना उम्मीदवार लड़ाई। ठीक उसी तरह से इस बार वर्ष-2022 में भाजपा अपने सिंबल से विश्वनाथ विधानसभा चुनाव लड़ायेगी। पार्टी यदि टिकट देती है तो पप्पन सिंह उप चुनाव 248-प्रतापगढ़ का चुनाव लड़ सकते हैं।
भाजपा नेता पप्पन सिंह ने भी कुंडा से वर्ष- 2022 का चुनाव न लड़ने की बात कही। यानि ठा.प्रकाश सिंह और पप्पन सिंह ने कुंडा विधानसभा चुनाव न लड़ने की बात कहकर भाजपा शीर्ष नेतृत्व को सोचने पर अभी से विवश कर दिया है। यदि यही हाल रहा तो कुंडा विधानसभा से दो बार बसपा के टिकट से चुनाव लड़ चुके और लोकसभा चुनाव के समय भाजपा में शामिल हुए शिव प्रकाश मिश्र "सेनानी" ही भाजपा के एकमात्र उम्मीदवार नजर आ रहे हैं, जिन पर भाजपा दाँव लगा सकती है। हलाँकि सेनानी जी 248-प्रतापगढ़ का उप चुनाव लड़ने की इच्छा रखते हैं। देखना है कि भाजपा वर्ष- 2022 में कुंडा व बाबागंज से अपना उम्मीदवार किसे बनाती है ? साथ ही लोकसभा में भाजपा को अब तक के इतिहास में सबसे अधिक मतों से लीड दिलाने वाले छोटे सरकार को इनाम के तौर पर विश्वास बनाये रखती है अथवा उन्हें भी ऐन वक्त बदल देती है। पट्टी से ठा.प्रकाश सिंह यदि अपनी उम्मीदवारी ठोकते हैं तो कैबिनेट मंत्री मोती सिंह का राजनीतिक भविष्य क्या होगा ? जबकि मंत्री मोती सिंह लगातार अपने राजनीतिक उत्तराधिकारी अपने इकलौते पुत्र राजीव प्रताप उर्फ नन्दन सिंह के लिये रास्ता बनाने की जुगत में हैं। यदि ठा.प्रकाश सिंह को पट्टी से टिकट मिलता है तो मोती सिंह के सारे अरमानों पर पानी फिर जाएगा।

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