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सोमवार, 10 जून 2019

कठुआ का फैसला उस फोड़े की तरह है,जिसका दुर्गन्ध युक्त विषाक्त मवाद अभी बाहर निकलना शेष है...

अपीलीय कोर्ट में कठुआ केस के फैसले के कई पहलू अभी सामने आने शेष हैं...!!!
कठुआ काण्ड के हुए फैसले में "दूध का दूध, पानी का पानी" अभी अलग नहीं हुआ है, बल्कि दूध में और पानी मिलाया गया है...!!!
कठुआ कांड में दायर कश्मीर क्राइम ब्रांच की चार्जशीट पढ़िए। उस चार्जशीट में बहुत विस्तार से बखान है कि विशाल जंगोत्रा ने किस तरह लगातार 2 दिनों तक अन्य सह अभियुक्तों के साथ मिलकर उस बच्ची से बलात्कार किया और फिर उसकी हत्या करके लाश ठिकाने लगाई। लेकिन आज के फैसले में उस विशाल जंगोत्रा को बरी कर दिया गया है। क्योंकि मेरठ स्थित सरकारी बैंक के ATM की CCTV फुटेज क्राइम ब्रांच की वेताल कथा की धज्जियां उड़ा रही थी। यहां विशेष उल्लेखनीय यह है कि उस CCTV फुटेज की DVR को कश्मीर क्राइम ब्रांच की टीम फोरेंसिक जांच के लिए अपने साथ ले गयी थी और जांच के बाद अदालत को यह बताया गया कि DVR बिल्कुल खाली है। इसमें कोई फुटेज है,ही नहीं। लेकिन क्राइम ब्रांच का यह सफेद झूठ टिक नहीं पाया,क्योंकि उसी DVR से ली गयी वह CCTV फुटेज Zee न्यूज अपनी खबर में दिखा चुका था। अतः Zee न्यूज के रिपोर्टर राजू केनी को भी गवाही के लिए बुलाया गया। उससे बहस की गयी। उस बहस में क्राइम ब्रांच के सफेद झूठ और अदालत को धोखा देने की क्राइम ब्रांच की कोशिश की धज्जियां उड़ गयीं, क्योंकि सबूत के रूप में वो पूरी फुटेज Zee न्यूज के पास उपलब्ध थी, जिस फुटेज के DVR में नहीं होने का दावा क्राइम ब्रांच ने अदालत में किया था। अतः विशाल जंगोत्रा की रिहाई बता रही है कि क्राइम ब्रांच ने कितनी ईमानदारी से उस पूरे कांड की जांच की है और उसकी चार्जशीट कितनी तथ्यात्मक और साक्ष्यों पर आधारित है...? क्योंकि जो आदमी घटनास्थल से 600 किमी दूर उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में था उसको लेकर इतनी लंबी चौड़ी कथा अपनी चार्जशीट में क्राइम ब्रांच ने क्यों और कैसे लिख दी थी...???
जिस सांजीराम को अदालत ने आज अपराधी मानकर सज़ा सुनाई है, उसकी अपराध में संलिप्तता का कारण स्वयं क्राइम ब्रांच ने अपनी चार्जशीट में यही बताया था कि वो अपने लड़के विशाल जंगोत्रा के अपराध को छुपाना चाहता था, उसको बचाना चाहता था और बकरवाल समुदाय को वहां से भगाना चाहता था। अतः अब जब यह सिद्ध हो गया है कि सांजीराम का लड़का निर्दोष था, घटना वाले दिन वो 600 किमी दूर उत्तरप्रदेश के मुजफ्फरनगर में था, जो अदालत में सिद्ध भी हो गया, तो सांजीराम अपने लड़के को किसलिए और क्यों बचाना चाह रहा था.? उपरोक्त सवाल अभी पीछा नहीं छोड़ेंगे। जिस क्राइम ब्रांच की चार्जशीट में इतना बड़ा सफेद झूठ बोला गया हो। जिस क्राइम ब्रांच द्वारा फोरेंसिक जांच का सफेद झूठ अदालत के सामने प्रस्तुत किया गया हो। उसी क्राइम ब्रांच की वेताल कथा सरीखी चार्जशीट के आधार पर कोर्ट ने शेष अरोपियों को दोषी मान लिया है। यह गज़ब का विरोधाभास है। यह फैसला फिलहाल याद दिला रहा है उस 2G कांड के फैसले की जिसमें यह तो माना गया कि 2G घोटाला लूट तो हुई लेकिन ए राजा, कनिमोझी, समेत सारे आरोपियों को निर्दोष भी घोषित कर दिया गया और देश अभी तक असमंजस में है कि जिनके पास सारी जिम्मेदारी, सारे अधिकार थे, यदि वही सब लोग पूरी तरह निर्दोष और निरपराध थे तो पौने दो लाख करोड़ के उस सनसनीखेज घोटाले को क्या भूतों पिशाचों जिन्नों ने अंजाम दिया था...? अतः कठुआ केस के आज के फैसले के कई पहलू सामने आने हैं। थोड़ा समय लगेगा और वो पहलू भी सामने आ जाएंगे। तब तक प्रतीक्षा करिये। मेरा मानना है कि आज के फैसले से "दूध का दूध, पानी का पानी" नहीं हुआ है। बल्कि दूध में और पानी मिलाया गया है। यह पानी किसके इशारे पर क्यों मिलाया गया.? इस सवाल का जवाब भी बहुत जल्दी मिल जाएगा। थोड़ा धैर्य रखिये। फिलहाल यह जान लीजिए कि कठुआ का फैसला उस फोड़े की तरह है,जिसका दुर्गन्ध युक्त विषाक्त मवाद अभी बाहर निकलना शेष है।

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