Breaking

Post Top Ad

Your Ad Spot

सोमवार, 1 जुलाई 2019

एक विशेष सम्प्रदाय द्वारा पवित्र अमरनाथ यात्रा को प्रतिवर्ष क्यों किया जाता है,टारगेट...?

सेक्युलर-लिबरल, मुल्लों, कठमुल्लों के दिखावटी सेक्युलरिज़्म की जालसाजी धोखाधड़ी को पवित्र अमरनाथ यात्रा प्रतिवर्ष पूर्ण रूप से नग्न कर देती है....
सतीश मिश्र की कलम से...
जम्मू कश्मीर में 1990 से शुरू हुए आतंकवाद के खूनी दौर के कारण 2000 में पवित्र अमरनाथ तीर्थयात्रा पर हमला कर के आतंकवादियों ने 40 तीर्थयात्रियों को मौत के घाट उतार दिया था। आज 20 वर्ष बाद भी अमरनाथ यात्रा पर जानेवाले श्रद्धालुओं पर आतंकवाद का साया मौत बनकर मंडराता रहता है। पिछले 30 वर्षों से यह सिलसिला अनवरत चल रहा है। इससे बचाव के लिए हर वर्ष यात्रा के दौरान हज़ारों सुरक्षाकर्मियों को दिन रात जागकर शिवभक्त हिन्दू तीर्थयात्रियों की रक्षा करनी पड़ती है। आज से प्रारम्भ हुई अमरनाथ यात्रा के दौरान शिवभक्त श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए सेना और केंद्रीय सुरक्षाबलों के 40 हज़ार जवान तैनात किए गए हैं। इसी यात्रा की सुरक्षा के लिए तैनात किए गए जम्मू कश्मीर पुलिस के हज़ारों जवानों की संख्या अलग है। हर  वर्ष लाखों तीर्थयात्रियों को मौत के भय के साए में यात्रा क्यों करनी पड़ती है...? अगर आतंकवाद और आतंकवादियों का कोई मज़हब नहीं होता, उनका किसी मज़हब से कोई सम्बन्ध नहीं होता तो... कश्मीर से हज के लिए जानेवाले तीर्थयात्रियों की बस पर पिछले 30 वर्षों से कभी किसी ने कोई कंकड़ तक क्यों नहीं फेंका...? ध्यान रहे कि जम्मू कश्मीर से इस वर्ष 11700 हज यात्री हज पर गए। इनमें 10 प्रतिशत हवाई यात्री मान लिए जाए तो भी 50 की औसत से कम से कम 200 बसों से हज यात्री जम्मू रेलवे स्टेशन पहुंचते हैं। लेकिन इन हज यात्रियों पर किसी प्रकार के कोई आतंकी हमले की खबर पिछले 30 वर्षों के दौरान कभी नहीं देखी सुनी गई।
आज उपरोक्त पोस्ट इसलिए क्योंकि पिछले 30 वर्षों के दौरान हैदराबाद के ओवैसी खानदान और दारूल उलूम देवबंद के छोटे बड़े मौलानाओं की फौज समेत भारत के किसी मुल्ले कठमुल्ले नेता और सेक्युलर लिबरल ठेकेदारों के मुंह से अमरनाथ यात्रा के दौरान होनेवाले इस शत प्रतिशत साम्प्रदायिक आतंकवाद के खिलाफ एक शब्द आजतक नहीं निकला। ये वही गैंग है जो फिलिस्तीन में मुसलमानों के खिलाफ यहूदियों (इज़राइल) के आतंकवाद का बेशर्म शोर मचाकर भारत में हुड़दंग करने में कोई संकोच नहीं करता। ये वही गैंग है जो झारखंड में एक शातिर चोर, अलवर में एक गौतस्कर, दादरी में एक बछड़ा चोर के हत्यारों के पकड़े जाने के बावजूद दिल्ली से न्यूयॉर्क तक हिन्दुओं के खिलाफ नंगनाच करता है। लेकिन सेक्युलर-लिबरल, मुल्लों, कठमुल्लों का यही गैंग अमरनाथ यात्रा पर जानेवाले हिन्दू तीर्थयात्रियों के सिर पर 30 वर्षों से मौत बनकर मंडराने वाले कट्टर मज़हबी धर्मान्ध मुस्लिम आतंकवादियों के खिलाफ एक शब्द नहीं बोलता। दिल्ली या श्रीनगर में मोमबत्ती मार्च नहीं निकालता। हिन्दुओं की धार्मिक स्वतंत्रता पर हो रहे इस मज़हबी आतंकवाद के साम्प्रदायिक प्रहार के विरोध में यूएन में कभी चिट्ठी नहीं लिखता। इसलिए मैंने अपनी पोस्ट की शुरूआत ही यह लिखते हुए की है कि... सेक्युलर-लिबरल, मुल्लों, कठमुल्लों के दिखावटी सेक्युलरिज़्म की जालसाजी धोखाधड़ी को पवित्र अमरनाथ यात्रा प्रतिवर्ष पूर्ण रूप से नग्न कर देती है।

कोई टिप्पणी नहीं:

टिप्पणी पोस्ट करें

Post Top Ad

Your Ad Spot

अधिक जानें