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मंगलवार, 18 जून 2019

नोडल अफसर के निरीक्षण में खुल गयी जिला अस्पताल पुरुष की पोल

महिला अस्पताल में नोडल अफसर आलोक कुमार की क्लीन चिट पर उठ रहे हैं,सवाल...!!!विकास के नाम पर जिले में भ्रष्ट अफसरों ने मचा रखी है,तवाही। शौंचालय पर 2 दो हजार तो प्रधानमंत्री आवास पर 40हजार का है,खुला रेट...!!! पहले मंडलायुक्त और उसके बाद जिले के नोडल अफसर का निपट गया औचक निरीक्षण,नहीं हुई कोई खास कार्रवाई...!!!
प्रतापगढ़। योगी सरकार में नाम औचक निरीक्षण का और निरीक्षण का कार्य सारे बताकर करना है। दिन भर तहसील से लेकर अलग-अलग विभागों में धमाचौकड़ी मारने के बाद देर रात खाद्य आयुक्त एवं जिला प्रतापगढ़ के नोडल अफसर अलोक सिंह ने जिला अस्पताल का औचक निरीक्षण करने पहुँचे तो जिला अस्पताल पुरूष में अव्यवस्था देख जिला अस्पताल पुरूष के CMS योगेंद्र यति पर भड़क उठे। नोडल अफसर बर्न वार्ड में जनरेटर की व्यवस्था ना होने, अस्पताल में गंदगी, मरीजों को मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता एवं बाहर से मरीजो को दवा लिखने पर जिला अस्पताल के CMS योगेन्द्र यति को जमकर फटकार लगाई। जिला अस्पताल में चल रहे भ्रष्टाचार पर मरीजों एवं उनके साथ रहे तीमारदारों की जुबानी सुनकर नोडल अफसर अलोक सिंह सख्त हो गए। CMS के खिलाफ कार्रवाई के लिए शासन को रिपोर्ट तक सौंपने की बात नोडल अफसर ने कही। सबसे ताज्जुब की बात ये रही कि जिला महिला अस्पताल में इतने सारे खेल के बाद भी नोडल अफसर आलोक कुमार को वहाँ सब कुछ चाक चौबंद मिला। जबकि अभी कुछ दिन पहले जिला महिला अस्पताल की CMS रीता दुबे ने जिला महिला अस्पताल के पुराने सामानों को एक ट्रक पर लादकर जौनपुर अपने पति द्वारा संचालित निजी हॉस्पिटल में भेजने की बात आई थी और माल सहित ट्रक को कोतवाली पुलिस ने कुछ साथी मीडिया के सहयोग से कोतवाली नगर के बलीपुर से धर दबोचा था। हलाँकि बाद में पुलिस और पुलिस के साथ सामान सहित ट्रक को पकड़वाने में महती भूमिका का निर्वहन करने वाला मीडियाकर्मी भी मैनेज हो गया। मुख्य चिकित्साधिकारी, प्रतापगढ़ ए के श्रीवास्तव तो एक अदद तहरीर तक नहीं दिए। सब ले देकर मामला ही खत्म हो गया। सिर्फ दिखाने के लिए अपर निदेशक स्वास्थ्य जाँच के लिए प्रतापगढ़ आये और वो भी जाँच के नाम पर खानापूर्ति कर वापस चले गए।
जिला महिला अस्पताल में मरीज तो भर्ती कर लिए जाते हैं,परन्तु उन्हें बेड तक नसीब नहीं हो पाता। जच्चा और बच्चा की स्थिति बद से बद्तर रहती है। एक बेड पर तीन प्रसूताओं को लिटा दिया जाता है। नवजात शिशु को चटाई बिछाकर जमीन पर तीमारदारों द्वारा रखा जाता है।एक ऑपरेशन में कम से कम 3 से 6 हजार तक की वसूली की जाती है। DNC के केस में भी 4हजार रुपये तक वसूले जाते हैं। जिला महिला अस्पताल में आशा बहुओं के साथ-साथ दूसरी दलाल महिलाओं का एक रैकेट है जो निजी अस्पतालों की दलाली में संलिप्त हैं। ये कहना गलत न होगा कि जिला महिला अस्पताल से ही जिले के निजी अस्पताल संचालित हो रहे हैं। मातृत्व लाभ और एम्बुलेंस से प्रसूताओं को घर तक छोड़ने के मामलों की यदि ईमानदारी से जाँच कर ली जाए तो जिला महिला अस्पताल में कमी ही कमी मिलेगी,परन्तु नोडल अफसर को सबकुछ दुरुस्त मिला जो आश्चर्यजनक है। लोकसभा चुनाव बाद चुनावी प्रचार के दौरान क्षेत्र से मिले फीडबैक के बाद सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ नौकरशाही पर लगाम लगाने की योजना बनाकर जिले के विकास और व्यवस्था की रियल हकीकत खंगालने के लिए जिले में बनाए गए नोडल अफसरों को कर्रा किया गया। साथ ही मंडलायुक्त सहित जिलाधिकारियों को भी टाईट किया गया। शासन के निर्देश पर प्रतापगढ़ की असलियत खंगालने पहुँचे नोडल अफसर आलोक कुमार को जिले में कमी ही कमी दिखी।

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