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बुधवार, 26 जून 2019

भाजपा नेताओं और सत्तासीन मोदी सरकार को आरोप-प्रत्यारोप का दौर खत्म कर करना चाहिए,काम और बनाए रखना चाहिए,जनता का विश्वास

बीजेपी के तीन धरोहर-अटल,आडवाणी मुरली मनोहर नारे का सत्रहवीं लोकसभा में हुआ अंत...!!!
अनुसांगिक संगठनों की शक्ति मोदीराज में हुई क्षीण...!!!
वर्तमान समय में सिर्फ अमित शाह और मोदी के नाम पर संचालित है, भाजपा...!!!
केंद्र में दूसरी बार बनी मोदी सरकार एवं भाजपाईयों को अब नेहरू गाँधी को कोसने के बजाय जनता द्वारा दिए गए प्रचण्ड बहुमत का कर्ज उतारकर दूध और पानी को अलग कर देना चाहिए न कि आरोप प्रत्यारोप से जनता को दिग्भर्मित करना चाहिये। क्योंकि भाजपा का शासन भी 13दिन, 13महीने, 4.5वर्ष, 5वर्ष तक रहा। भाजपा केंद्र की सरकार में जब पूर्व स्व.अटल बिहारी के नेतृत्व में NDA के रूप में पहली बार सत्तासीन हुई तो उसके सामने अनेको चुनौतियां थी। परन्तु आज परिस्थिति बदली हुई है।
मोदी के नेतृत्व में पहली बार भाजपा को 16वीं लोकसभा के गठन के साथ 5वर्ष तक केंद्र में NDA की सरकार बनाने का मौका मिला। परन्तु मोदी जी भी इन पाँच वर्षों तक सिर्फ कांग्रेस और कांग्रेसी नेताओं को कोसते रहे। पूरे भारत में राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों में अपना चेहरा इस्तेमाल कर राज्यों में भाजपा की सरकार बनाते रहे। बेजोड़ गठबंधन कर जम्मू & कश्मीर में महबूबा से बेमेल मोहब्बत करने के बाद भी डॉ श्यामा प्रसाद की संदिग्ध मौत की जाँच न करा पाना भाजपा की नाकामी थी।
यही नहीं देश की तमाम सरकारी योजनाओं को पंडित दीन दयाल के नाम से केंद्र की मोदी और प्रदेश की योगी सरकार लांच तो किया परन्तु अपने इन दोंनो नेताओं की संदिग्ध मौत की जाँच नहीं करा सकी जो दुःखद एवं दुर्भाग्यपूर्ण रहा। सत्ता पाने के बाद भी विधवा विलाप करने किसी भी दृष्टिकोण से उचित नहीं। भाजपाई नेता कब तक नेहरू गाँधी के नाम पर घड़ियाली आँसू बहायेंगे ? अब तो भाजपा के पास मौका भी है कि वो अपने उन दोंनो नेताओं को सच्ची श्रद्धांजलि दें,जिनकी बदौलत आज उन्हें सत्ता प्राप्त हुई। उनकी शहादत तभी पूर्ण होगी जब उनकी संदिग्ध मौत की निष्पक्ष जाँच कराकर उनके कातिलों का नाम जनता जनार्दन के समक्ष सार्वजनिक हो...!
भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष जे पी नड्डा का बयान कि डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी की संदिग्ध मौत की जाँच तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने नहीं कराई। आज डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जन्मदिन पर ये बयान उनकी आत्मा को चोट पहुंचाने जैसा रहा। आज देश के तीन हिस्से में भाजपा की सरकार है। केंद्र में दूसरी बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी शपथ लिए। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह स्वयं केंद्रीय गृहमंत्री हैं। यदि भाजपा इतनी ही सजग और जागरूक है तो अपने दोंनो नेताओं की संदिग्ध मौत की निष्पक्ष जाँच क्यों नहीं करा लेती ? कौन मना किया है ?
नेताजी सुभाष चन्द्र बोस जी की तरह भाजपा के इन दो नेताओं की मौत तो विदेश में तो नहीं हुई। फिर इतनी हाय तौबा क्यों ? भाजपाईयों को आरोप लगाना बन्द कर कार्य कर देना चाहिये। आरोप लगाने का काम विपक्ष का होता है न कि सत्ताधारी दल का ! ऐसे में जनता को अपने नारे "सबका साथ सबका साथ और सबका विश्वास" पर अमल कर उस पर दृढ़ता के साथ खड़ा होना चाहिये। ताकि जनता में मोदी सरकार के प्रति आस्था व विश्वास कायम रह सके...!!!

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