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शनिवार, 6 अप्रैल 2019

परिवहन विभाग के मुख्य सचिव की मनमानी से भुखमरी के कगार पर पहुँचा ARTO दफ्तर का भवन स्वामी

कमीशन के चक्कर में तीन साल से अपने भवन के किराये हेतु भवन स्वामी परिवहन विभाग का काट रहा है,चक्कर...!!!
योगी और मोदी सरकार में शामिल सभी चौकीदार चौकन्ने हैं तो परिवहन विभाग में इस कमीशनखोरी में कौन-कौन लोग हैं,शामिल...!!!
परिवहन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) स्वतंत्र देव सिंह जी बनते हैं सबसे ईमानदार और कमीशनखोरी व लूट में उनका विभाग सबसे अव्वल...!!!
बीमारी से तंग भवन स्वामी पैसे के अभाव में नहीं करा पा रहा है,अपना ईलाज...!!!
मुख्यमंत्री के जनसुनवाई पोर्टल IGRS पर दर्ज है,शिकायत...!!!
परिवहन आयुक्त की स्पष्ट आख्या के बाद भी भवन के किराये की नहीं मिल रही प्रमुख सचिव परिवहन के यहाँ से संस्तुति...!!!
अपनी बीमारी का ईलाज एवं परिवार के जीविकोपार्जन हेतु ARTO प्रतापगढ़ के कार्यालय हेतु किराये पर दिया था,अपना भवन...!!!
प्रतापगढ़। इसे कहते हैं कि घर का उर्द जंगेर में डालना ! नगरपालिका क्षेत्र में ARTO को कार्यालय हेतु भवन का विज्ञापन अखबार में गजट कराया गया तो महुली के रहने वाले श्याम किशोर जायसवाल को लगा कि उसकी भाग्य खुल गई। वह अपना किशोर मैरेज हाल को बंद कर अपने उक्त भवन को ARTO दफ्तर खोलने के लिए दे दिया। भवन को कितना किराया मिले इसके लिए विभाग शासन स्तर पर एक रिपोर्ट मांगता है। सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी,प्रतापगढ़ ने पत्रावली तैयार करके परिवहन आयुक्त के यहाँ प्रेषित की। किराये की पत्रावली स्वीकृत हेतु परिवहन आयुक्त के यहाँ से होकर प्रमुख सचिव के यहाँ लंबित है। आज भवन स्वामी अपने भवन की किरायेदारी की स्वीकृति के लिए 2 वर्ष से दर दर की ठोकरे खा रहा है। भवन स्वामी विगत 6 माह से सम्बन्धित अधिकारियों को प्रार्थना पत्र दे देकर थक गया,परन्तु उसके भवन का किराया की स्वीकृति नहीं मिल सकी। भवन स्वामी को उसके भवन का किराया कैसे प्राप्त हो ? 
क्या भवन स्वामी ARTO प्रतापगढ़ को कार्यालय खोलने के लिए अपना भवन किराए पर देकर कोई गुनाह कर दिया जो उसके बीमारी दशा में उसे उसके भवन का किराया नहीं स्वीकृत किया जा रहा है ? भवन स्वामी इस बीच परिवहन विभाग के प्रमुख सचिव कार्यालय का भी चक्कर लगा आया,परन्तु पार्थी को मिलने नहीं दिया गया। 9 मई, 2018 को मजबूर होकर उक्त प्रकरण को माननीय मुख्यमंत्री के जनसुनवाई पोर्टल IGRS पर शिकायत रजिस्टर्ड कराया,जिसका नम्बर- 40017318012910 है। उक्त प्रकरण में परिवहन आयुक्त ने परिवहन विभाग के प्रमुख सचिव को नियमानुसार आवश्यक कार्यवाही करने हेतु दिनांक-17/05/2018 को अपनी आख्या प्रेषित कर दिया है। साथ ही उक्त प्रकरण दिनांक-17/05/2018 को निस्तारित करने का मैसेज भवन स्वामी के रजिस्टर्ड मोबाइल नम्बर पर आ गया। भवन स्वामी मैसेज देखकर आवाक रह गया। भवन स्वामी ये जानकार हतप्रभ रह गया कि मुख्यमंत्री की साईट पर इस कदर झूठ बोलकर प्रकरण को निस्तारित किया जा रहा है,जिसकी कोई सीमा नहीं।
भवन स्वामी द्वारा नियति तिथि 8 जून, 2018 पर प्रकरण का पूर्ण निस्तारण न होने की दशा में दिनांक-13 जून, 2018 को उक्त प्रकरण में अनुस्मारक दिया गया। अपर मुख्य सचिव, परिवहन विभाग 6 जून, 2018 को पुनः आयुक्त - परिवहन को निर्देशित किया कि कृपया प्रकरण को गंभीरता से पुनः परीक्षण कर नियमानुसार कार्यवाही करते हुए 15 दिवस में आख्या उपलब्ध कराए। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जब परिवहन आयुक्त ने परिवहन विभाग के प्रमुख सचिव को नियमानुसार आवश्यक कार्यवाही करने हेतु दिनांक-17/05/2018 को अपनी आख्या प्रेषित कर दिया था तो प्रमुख सचिव को परिवहन आयुक्त से पुनः आख्या मांगने का मतलब समझ के परे है। प्रमुख सचिव को भवन किराया स्वीकृति प्रदान करने के बजाय उस पर बार-बार आख्या की मांग करना किसी भी दृष्टिकोण से न्याय संगत नहीं है। भवन स्वामी का स्वास्थ्य बहुत ख़राब है। भवन स्वामी श्याम किशोर अपनी दवा गुजरात वापी से करा रहा है। भवन स्वामी को पैसे की सख्त आवश्यकता है। भवन स्वामी  के जीवन का सवाल है। मानवीय संवेदनाओं को दृष्टिगत रखते हुए भवन स्वामी के भवन के किराये की स्वीकृति अविलम्ब प्रदान करते हुए उसका भवन किराया दिलाया जाए,जिससे वह अपना इलाज आसानी से करा सके।

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