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रविवार, 7 अप्रैल 2019

मूर्ख दिवस पर प्रतापगढ़ के सांसद कुँवर हरिवंश सिंह ने राजधानी दिल्ली में अपने आवास पर मनाया प्रतापगढ़ सदर विधायक संगम लाल गुप्ता का जन्मदिन

आधुनिक एवं ब्यवसायी किस्म के नेता कहते हैं कि "दुश्मनी जम कर करो,लेकिन ये गुंजाइश रहे,जब कभी हम दोस्त हो जायें तो शर्मिंदा न हों...!!!
सदर विधायक संगम लाल गुप्ता पर ये पंक्तियाँ फिट बैठती हैं, "बर्बाद गुलिस्ताँ करने को बस एक ही उल्लू काफ़ी था...हर शाख़ पे उल्लू बैठा है अंजाम-ए-गुलिस्ताँ क्या होगा...???
प्रतापगढ़ के सांसद कुँवर हरिवंश सिंह कहते हैं कि हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है,जिस तरफ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जायेगा...!!!
प्रतापगढ़ के सांसद कुँवर हरिवंश सिंह विधायक संगम लाल गुप्ता को मुँह मीठा कराते हुए...
प्रतापगढ़। 39-संसदीय क्षेत्र प्रतापगढ़ के सांसद कुँवर हरिवंश सिंह और 248-प्रतापगढ़ सदर क्षेत्र के विधायक संगम लाल गुप्ता इन दिनों एक ही सीट के लिए अपनी उम्मीदवारी का दावा ठोंक रहे हैं। वो सीट लोकसभा प्रतापगढ़ की उम्मीदवारी की है। दोंनो में समानता भी बहुत है। दोंनो जनप्रतिनिधि आर्थिक राजधनी मुम्बई से प्रतापगढ़ की सेवा के लिए राजनीति के रास्ते आएं हैं। दोंनो जनप्रतिनिधि रियल स्टेट एवं बिल्डर सहित शिक्षण संस्थान को अपना व्यवसाय बनाकर पैसेवाला बड़ा आदमी बने। अब जब धन पर्याप्त हो जाए तो अपनी शोहरत को आगे बढ़ाने एवं कमाए हुए धन को सुरक्षित करने के लिये राजनीति से बेहतर अन्य संसाधन फेल हैं। आज राजनीति भी व्यवसाय हो चुकी है। करोड़ों रुपये टिकट पाने से लेकर चुनाव जीतने तक खर्चकर यदि सफलता मिल गई तो अरबों रुपये की व्यवस्था भी उसी राजनीतिक के रास्ते से प्राप्त हो जाती है। वर्ष-2014 में जब पूरे देश में मोदी नाम की सुनामी आई तो प्रतापगढ़ संसदीय सीट भाजपा ने अपने सहयोगी दल "अपना दल" को एलायंस के तहत उसे दे दिया। प्रतापगढ़ से अपना दल के उम्मीदवार के रुप में कुँवर हरिवंश सिंह जो पड़ोसी जनपद जौनपुर के मूल निवासी और मुंबई में रियल स्टेट एवं बिल्डर के करोबरे कुँवर हरिवंश सिंह को अपना दल ने अपना उम्मीदवार बनाया। सीट गठबंधन में चली गई फिर भी कुँवर हरिवंश सिंह को अभूतपूर्व सफलता मोदी लहर में मिली। सबसे बड़ा दुर्भाग्य ये रहा कि लोकसभा चुनाव के बाद देश में मोदी सरकार बनी तो अपना दल के कोटे से मिर्जापुर से सांसद निर्वाचित हुई अनुप्रिया पटेल को मोदी मंत्रिमंडल में जगह मिली। इसीबीच अनुप्रिया पटेल द्वारा वाराणसी की रोहनिया विधानसभा सीट से त्यागपत्र देने के उपरांत उप चुनाव में अनुप्रिया पटेल की माँ कृष्णा पटेल को भाजपा और अपना दल के संयुक्त उम्मीदवार के रुप में उतारा गया,परंतु कृष्णा पटेल को हार का सामना करना पड़ा।
प्रतापगढ़ सदर विधायक संगम लाल गुप्ताने अपने जन्मदिन पर कुँवर हरिवंश सिंह को खिलाया केक...
चुनाव परिणाम के बाद अपना दल परिवार में कलह शुरू हुई और बिखराव के बीजारोपण कुँवर हरिवंश सिंह ने ही रोपित किये। अनुप्रिया पटेल ने कुँवर हरिवंश सिंह को नसीहत भी दी थी कि वो अपनी औकात में रहे। बात बिगड़ती गई और दूरियाँ बढ़ती गई। सम्बन्ध इतने ख़राब हुए कि अपना दल का विवाद भारत निर्वाचन आयोग के समक्ष पहुँच गया। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने उ.प्र. के विधानसभा चुनाव से पहले अनुप्रिया पटेल से समझौता कर उन्हें विधान सभा चुनाव-2017में 11सीटें दी ऐन चुनाव के वक्त एक नई पार्टी अपना दल एस का रजिस्ट्रेशन सामने आया तो कृष्णा पटेल ने आरोप लगाया कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने उनके परिवार में झगड़ा खड़ा कर अपने प्रभाव से भारत निर्वाचन आयोग में अपना दल एस का रजिस्ट्रेशन कराकर अपना दल एस का अस्तित्व समाप्त करने का षणयंत्र किया है। विधान सभा चुनाव में अपना दल एस को जबर्दस्त सफलता मिली। 11 उम्मीदवारों में 9 उम्मीदवारों को सफलता मिली और पार्टी के पास एकमुश्त 9 विधायक मिल गए। इस तरह से प्रतापगढ़ सदर से संगम लाल गुप्ता विधायक निर्वाचित हो गए। संगम लाल गुप्ता भाजपा में रहते हुए अपना दल एस से टिकट प्राप्त कर लिए। इसमें भी भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और दिल्ली प्रदेशध्यक्ष मनोज तिवारी का नाम आगे आया था। संगम लाल गुप्ता अतिमहत्वाकांक्षा वाले ब्यक्ति हैं। उन्हें विधायक के पद से संतुष्टि नहीं मिल पा रही है और वो प्रतापगढ़ सांसद बनने का ख्वाब देखने लगे। विधायक संगम लाल गुप्ता स्वयं कहते हैं कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह जी और दिल्ली प्रदेशध्यक्ष मनोज तिवारी के रहते उनका टिकट 1000%पक्का है। 
विधायक संगम लाल गुप्ता के दावे को एकबार मान भी लिया जाए तो उनके टिकट में जो विधिक समस्या रोड़ा बनेगी उससे शायद वो अनभिज्ञ हैं। भाजपा ने अनुप्रिया पटेल की पार्टी अपना दल एस को दो संसदीय सीट पहले ही दे रखी है। एक सीट मिर्जापुर तो दूसरी सीट प्रतापगढ़ के बदले में सोनभद्र की दी गई है। एक तरह से प्रतापगढ़ की सीट पर अब अपना दल एस का दावा करना ही बेईमानी है। चूँकि संगम लाल गुप्ता अपना दल एस के सिम्बल से विधायक हैं तो उन्हें भाजपा किस कानून के तहत अपने सिम्बल कमल के फूल पर संसदीय सीट प्रतापगढ़ पर चुनाव लड़ाएगी ? हाँ एक ही उपाय है कि संगम लाल गुप्ता भाजपा की सदस्यता ग्रहण करने से पहले अपना दल एस से निष्काषित एवं निलंबित की कार्रवाई कराकर वो भाजपा से टिकट के दावेदार बन सकते हैं। अन्यथा उन्हें विधायक पद से त्यागपत्र देना पड़ेगा तभी वो भाजपा के सिम्बल को प्राप्त कर लोकसभा चुनाव लड़ सकते हैं।अब बात करते हैं वर्तमान सांसद कुँवर हरिवंश सिंह के राजनीतिक भविष्य की तो कुँवर साहेब भी अपना दल से बगावत कर अपना दल से अलग दल बनाकर भाजपा से गठबंधन करने के लिए क्षत्रिय नेता के रूप में अपनी दावेदारी पेश की है। अपने समर्थन में अपना दल एस के दोंनो विधायकों डॉ आर के वर्मा एवं संगम लाल गुप्ता सहित भाजपा से रानीगंज विधायक धीरज ओझा के समर्थन का दावा सांसद के समर्थकों से किया गया। सोशल मीडिया में खबर चली तो खंडन भी हुआ,परन्तु मूर्ख दिवस पर सदर विधायक संगम लाल गुप्ता का जन्मदिन प्रतापगढ़ के सांसद कुँवर हरिवंश सिंह द्वारा अपने दिल्ली आवास पर मनाया गया।
वर्तमान सांसद कुँवर हरिवंश सिंह के दिल्ली आवास पर सदर विधायक संगम लाल गुप्ता के जन्मदिन की तस्वीरें जब सोशल मीडिया पर वाईरल हुई तो आमजनमानस में सवाल उठने लगा। सवाल उठना भी लाजिमी था कि सांसद की उम्मीदवारी के लिए सदर विधायक संगम लाल गुप्ता और वर्तमान सांसद कुँवर हरिवंश सिंह दोंनो जी जान से लगे हैं। ऐसे में उम्मीदवारी की लाइन में दोंनो दिग्गज एक साथ एक-दूसरे को मुंह मीठा करा रहे हैं जो समझ के परे है। वैसे संगम लाल गुप्ता सरल एवं सीधे विधायकों में से हैं। अभी कैबिनेट मंत्री मोती सिंह को अपने संगम इंटरनेशनल स्कूल में आमंत्रण देकर सबको चौका दिए थे। चूँकि संगम लाल गुप्ता और कैबिनेट मंत्री मोती सिंह की राजनीतिक प्रतिद्वंदिता ब्यक्तिगत में बदलती जा रही थी। सांसद की उम्मीदवारी में कैबिनेट मंत्री मोती सिंह भी हैं। ऐसे में दोंनो के बीच प्रतिस्पर्धा होना तय है। फिलहाल संगम लाल गुप्ता ने उसमें भी रियायत बरती। कुँवर हरिवंश सिंह के लिए संगम लाल गुप्ता का ये उमड़ता घुमड़ता प्रेम यूं ही नहीं उठा। इसके पीछे के कारणों को जब अन्दर से खंगाला गया तो नाम न छापने की शर्त पर भाजपा के एक पदाधिकारी ने बताया कि सांसद कुँवर हरिवंश सिंह की तरफ से एक प्रस्ताव आया है कि उनके पक्ष में सांसद की उम्मीदवारी हेतु तीनों विधायक ने अपना सहमति पत्र दे दिया है सिर्फ भाजपा के जिलाध्यक्ष की पैरोकारी का पत्र मिल जाए तो उनका काम बन जाए।
दरअसल बात कोई यूं ही नहीं उठती। कोई बात रहती है तो ही बात उठती है। जैसे आग वहीं होती हैं,जहाँ धुँआ होता है। जब से जिला के भाजपा पदाधिकारियों को इस बात का अंदेशा हुआ कि सीट जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के खाते में जा सकती है,तब से भाजपा के पदाधिकारी एवं तीनों विधायक और सांसद कुँवर हरिवंश सिंह में एक सहमति बनी कि किसी भी दशा में प्रतापगढ़ की सीट जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के खाते में न जाने पाए। यानि वर्तमान एमएलसी कुँवर अक्षय प्रताप सिंह उर्फ़ गोपाल जी का भाजपा के जिला संगठन सहित तीनों विधायकों एवं सांसद कुँवर हरिवंश सिंह सामूहिक रूप से विरोध करने का मन बनाया है कुँवर हरिवंश सिंह के घर पर सदर विधायक संगम लाल गुप्ता का जो जन्मदिन पर केक कटा और एक-दूसरे को मिठाइयाँ खिलाई गई,वो भी इसी कहानी का हिस्सा है। भाजपा से एक धड़े का कहना है कि भाजपा का सबसे बेहतर उम्मीदवार पूर्व सांसद राजकुमारी रत्ना सिंह हो सकती हैं,जबकि राजकुमारी रत्ना सिंह का टिकट कांग्रेस ने अपनी पहली लिस्ट में घोषित कर दिया। इस बार राजकुमारी रत्ना सिंह भले ही उम्मीदवार घोषित हो चुकी हैं,परन्तु उनकी सक्रियता क्षेत्र में कहीं दिख नहीं रही है। क्षेत्र में होने के बजाय बार-बार उनका दिल्ली जाना भी दाल में कुछ काला होने का संकेत देता है। कल जब उ प्र की चार संसदीय सीटों की उम्मीदवारी का नाम तय हो गया और प्रतापगढ़ फिर रोक लिया गया तो लोंगो में सुगबुगाहट का होना और अलग-अलग कयास लगाना कोई सामान्य बात है।

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