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मंगलवार, 16 अप्रैल 2019

देश के कानून के साथ राजनीतिक दल के मुखियाओं द्वारा खेली जाती है,कबड्डी

सत्ताधारी पार्टी के पास नहीं मिला उम्मीदवार...!!!
भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने  248-प्रतापगढ़ विधानसभा के लिए वर्ष-2017 में संगम लाल गुप्ता को अपना दल एस से बनवाया था,उम्मीदवार...!!!
अपना दल एस से विधायक निर्वाचित होने के बाद भी भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने लोकसभा में अपना दिया हुआ उम्मीदवार ले लिया वापस और बना दिया भाजपा से प्रतापगढ़ का उम्मीदवार...!!!

भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह एवं प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी...
देश के कानून में किसी भी राजनीतिक दल के रजिस्ट्रेशन  में 100 लोग इस बात का हलफनामा देते हैं कि वो किसी भी दल के प्राथमिक सदस्य नहीं। फिर जसवंत नगर से समाजवादी पार्टी के वर्तमान विधायक शिवपाल यादव ने अपनी राजनीतिक पार्टी बना ली और उसके वो राष्ट्रीय अध्यक्ष बन बैठे। यही नहीं लोकसभा का नामांकन भी किये हैं। क्या भारत निर्वाचन आयोग अपनी आँखों में पट्टी बांध रखा है...!!!
प्रतापगढ़ संसदीय सीट पर जनसत्ता दल लोकतान्त्रिक से सपा के सिम्बल से निर्विरोध एमएलसी निर्वाचित हुए अक्षय प्रताप सिंह गोपाल जी बिना समाजवादी पार्टी से त्यागपत्र दिए जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के सदस्य बन बैठे। फिर पदाधिकारी और कुछ ही दिनों में वो भी प्रतापगढ़ संसदीय सीट से जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के उम्मीदवार होंगे। है न अंधेर नगरी चौपट राजा वाली कहावत...!!!
अब भाजपा का शीर्ष नेतृत्व भी महीनों से माठा मारने के बाद कानून के साथ आंख मिचौली कर अपना दल एस के राष्ट्रीय सचिव एवं विधायक संगम लाल गुप्ता को प्रतापगढ़ संसदीय सीट से उम्मीदवार बनाकर ये सिद्ध  कर दिया कि समरथ को नहीं दोष गोसाई...!!!
सुनील अरोड़ा,मुख्य आयुक्त भारत निर्वाचन आयोग,नई दिल्ली... 
भाजपा जैसे राष्ट्रीय दल में उम्मीदवारी तय करने के लिए जिला कमेटी से नाम का पैनल जाता है। फिर प्रदेश कार्यालय से राष्ट्रीय (केंद्रीय)कार्यालय पर उम्मीदवार के चयन का नाम जाता है। फिर संसदीय दल की बैठक में नाम का चयन किये जाने की ब्यवस्था है।भाजपा में एक विधा और भी है। वह है,आरएसएस की दखल का। आरएसएस में प्रांतवार रिपोर्ट प्रेषित होती है। एक प्रति आरएसएस मुख्यालय नागपुर भी मंथन के लिए प्रेषित होती है,परन्तु मोदी और अमित शाह युग में ये सब हाथी का दांत साबित हो चुका है। भाजपा टू मैन शो पार्टी बनकर रह गई है। कहने के लिए भाजपा में सर्व सम्मति से फैसले लिए जाते हैं। जबकि हकीकत ये है कि वर्तमान भाजपा में फैसले थोपे जाते हैं। प्रतापगढ़ संददीय सीट पर भी उम्मीदवार दिया नहीं गया बल्कि थोपा गया है। अब जनता जनार्दन के इच्छा पर तय है कि वो अपना अमूल्य मत थोपे हुए उम्मीदवारों पर देती है अथवा वो अपना स्वतन्त्र निर्णय लेकर थोपे गए उम्मीदवार को नकार देती है।
भाजपा जिलाध्यक्ष हरिओम मिश्र का दावा कि संगम लाल गुप्ता भाजपा की सदस्यता ले चुके हैं। जनता जानना चाहती है कि अपना दल-S के राष्ट्रीय सचिव और सदर प्रतापगढ़ से विधायक रहते कब और किस कानून के तहत संगम लाल गुप्ता ने भाजपा की सदस्यता ली...??? क्या शीर्ष नेतृत्व ने भाजपा में संगम लाल गुप्ता को भाजपा की सदस्यता दिलाई...??? वहीं अपना दल एस के राष्ट्रीय अध्यक्ष आशीष सिंह का कहना है कि संगम लाल गुप्ता को आम सहमति पर भाजपा से 39-लोकसभा संसदीय सीट से उम्मीदवार बनाया गया है। आशीष सिंह इस बात पर चुप्पी साध गए कि क्या अपना दल एस के राष्ट्रीय सचिव पद से संगम लाल गुप्ता को हटा दिया गया अथवा भाजपा के प्राथमिक सदस्य बनकर लोकसभा का टिकट हथियाने वाले संगम लाल गुप्ता के लिए भारत निर्वाचन आयोग और देश में लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम-1950 में विशेष प्राविधान के तहत संगम लाल गुप्ता को छूट मिली है कि वो एक साथ दोंनो दलों की सदस्यता लिए रहेंगे। विधायक की बात तो दीगर रही। विधायक संगम लाल गुप्ता की स्थिति देख CN सिंह की याद आ गई। कहीं वही हश्र संगम लाल गुप्ता का न हो जाए...!!!

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