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मंगलवार, 5 मार्च 2019

उर्जा विभाग की अंधेरगर्दी विना टेंडर और संविदा के ही कैश काउंटर ऑपरेटर कर रहे हैं,कार्य

कम्पनी के एम डी नरेन्द्र प्रकाश गुप्ता ने स्पष्ट किया कि अब उनका नहीं रह गया ठेका...!!!
THE INDURE PRIVATE LIMITED ने लिया था, 31 अगस्त, 2018 तक का ठेका...!!!
कम्पनी ने बिजली विभाग के हाकिमों से सांठगांठ कर ऑपरेटरों को नहीं दिये माह जून और जुलाई का वेतन....!!!
एक तरफ मोदी सरकार मजदूरों को 15 हजार रूपये से कम आमदनी पाने वाले मजदूरों को श्रम विभाग में रजिस्ट्रेशन कराकर उन्हें पेंशन देने की बात कर रही है और दुसरी तरफ उर्जा विभाग अपने कैश काउंटर के ऑपरेटरों को बंधुआ मजदूर से भी बद्दतर हालत में रख रखा है...!!!
प्रतापगढ़। जनपद प्रतापगढ़ में पहले बिजली विभाग में दो खण्ड हुआ करता था। खण्ड-1 और खण्ड-2 यानि दो डिविजन में पूरा जनपद बांटा गया था। बिजली की मांग और बढ़ती जनसंख्या के मद्देनजर जनपद प्रतापगढ़ में वर्तमान में चार डिविजन खोलने पड़े और विभाग ने प्रतापगढ़ मुख्यालय पर सर्किल ऑफिस भी बना दिया। अधिशासी अभियंताओं को सर्किल में मीटिंग आदि के लिए प्रयागराज जाना पड़ता था,परन्तु सर्किल की स्थापना के बाद अब सारा कार्य लगभग-लगभग मुख्यालय पर ही निपटा लिए जाते हैं। मुख्य अभियंता से मीटिंग के लिए ही अब प्रयागराज जाना पड़ता है और उसके लिए अधीक्षण अभियंता ही पर्याप्त होते हैं। एक तरह से जनता के हितों को देखते हुए उर्जा विभाग का यह निर्णय सराहनीय रहा,परन्तु जमीनी हकीकत को जब देखते हैं तो कार्य में अभी भी बहुत सारे लोचे दिख जाते हैं। बिजली विभाग में जो कार्य संविदा के तहत होने रहते हैं वो सर्किल ऑफिस से ही हो जाते हैं। दिशा निर्देश चीफ ऑफिस और एम डी ऑफिस से भले ही प्राप्त कर लिए जाए,परन्तु कार्य को अमलीजामा पहनाने का कार्य अधीक्षण अभियंता कार्यालय से ही सम्पन्न हो जाता हैं।
सूत्रों से जो जानकारी मिली वो बहुत ही उलझाने वाली है। सरकार और विभाग की प्रथम वरियता राजस्व की वसूली का होता है और वसूली के लिए विभाग ने संविदा पर ऑपरेटर रखकर कार्य निष्पादित कराता है। प्रतापगढ़ में बिजली विभाग में 16 ऑपरेटर कैश काउंटर पर कार्य कर रहे हैं,जबकि 31 अगस्त, 2018 से उनके टेंडर की अवधि समाप्त हो चुकी है,फिर भी बिना टेंडर कराये सभी ऑपरेटरों से विगत 6 माह से अवैध तरीके से बिजली विभाग के अधिकारियों द्वारा कार्य लिया जा रहा है। ऑपरेटरों को उनका मानदेय भी नहीं दिया जा रहा है। आखिर नियम विरुद्ध ढंग से सभी कैश काउंटर पर ऑपरेटरों से कैसे कार्य कराया जा रहा है ? क्या बिजली विभाग के अधिकारियों को नियम कानून को ताक पर रखकर कार्य करने की छूट मिली हुई है ? क्या किसी को बिना मानदेय दिए बगैर कार्य लेना न्याय संगत है ? आखिर इन ऑपरेटरों का भुगतान किस नियम कानून के तहत किया जाएगा ? विभाग के अधिकारियों से बात करने का प्रयास किया गया,परन्तु मुख्य अभियंता,अधीक्षण अभियंता सहित अधिशासी अभियंताओं ने फोन उठाना मुनासिब नहीं समझा...!!!

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