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गुरुवार, 14 फ़रवरी 2019

"तानाशाही हटाओ-लोकतंत्र बचाओ सत्याग्रह" का "आप" ने फूंका बिगुल

'आप' की महारैली में कोलकाता के बाद दिल्ली में एकजुट हुआ विपक्ष,पर नहीं बात...!!!
मोदी के डर से एकमंच पर एकत्र हुए कथित दिग्गज...
नई दिल्ली ममता बनर्जी एवं चन्द्रबाबू नायडू के अलावा शरद पवार, शरद यादव, कनिमोई, एच डी देवगौड़ा, राम गोपाल यादव, यशवंत सिन्हा, शत्रुघ्न सिन्हा के अलावा फारुख अब्दुल्ला समेत कई नेता तो शामिल हुए पर महागठबंधन के पेंच फंसा रहा। पश्चिम बंगाल के कोलकाता के बाद देश की राजधानी दिल्ली में मोदी सरकार के खिलाफ विपक्ष एकजुट तो हुआ,परन्तु मोदी सरकार को हिलाने में नाकाम दिखा। दिल्ली के जंतर मंतर पर बुधवार को दोपहर में आम आदमी पार्टी के नेतृत्व में विपक्ष का बड़ा विरोध प्रदर्शन करने की मंशा थी। आम आदमी पार्टी ने इसको 'तानाशाही हटाओ लोकतंत्र बचाओ सत्याग्रह' का नाम दिया। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू इसमें शामिल हुए। इसके अलावा एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार, सपा नेता रामगोपाल यादव, डीएमके नेता कनिमोई, जेडीएस नेता एचडी देवेगौड़ा, शरद यादव, शत्रुघ्न सिन्हा, यशवंत सिन्हा समेत फारुक अब्दुल्ला भी शामिल हुए। सारे दिग्गजों को एकजुट होने के बावजूद जनता का ध्यान उधर खिंचता नहीं दिख रहा देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस बात को जनता अधिक तवज्जों दे रही है कि मोदी सरकार के प्रहार से सभी चोर और भ्रष्ट नेता एक मंच पर नजर आ रहे हैं। सारे विरोधी एक घाट पर पानी पीने के लिए तैयार हैं,इससे तो यही सिद्ध होता है कि ये मोदी का खौफ है। क्योंकि आम आदमी पार्टी का उदय कांग्रेस और UPAसरकार में हुए घपले और घोटाले के विरोध में हुआ था और वही आम आदमी पार्टी के जनक अरविन्द केजरीवाल भी कांग्रेस के साथ गलबहियां करने के लिए बेताब हैं। परन्तु कांग्रेस भी कम चालाक नहीं है वो अरविन्द केजरीवाल का रूप पहचानती है और उसे एहसास भी है कि दिल्ली में विधान सभा और लोकसभा में उसे नेस्तनाबूत करने वाला उसका शुभचिंतक कैसे हो सकता है ? दिल्ली में कांग्रेस को रसातल में पहुँचाने वाले अरविन्द केजरीवाल को भला कांग्रेस कैसे भूल पाएगी ? सम्भवतः इसी वजह से प्रमुख विपक्षी पार्टी होते हुए भी कांग्रेस ने इस रैली में शामिल होना उचित नहीं समझा। अंत तक उहापोह की स्थिति में दिखी। 'आप' के सूत्रों के मुताबिक उम्मीद यही थी कि कांग्रेस भी इस प्रदर्शन का हिस्सा बनेगी। लेकिन कांग्रेस अंत तक अपना पत्ता नहीं खोली और जंतर मंतर पर आयोजित कार्यक्रम से अपने को दूर रखा।

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