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रविवार, 10 फ़रवरी 2019

सच कड़वा होता है जो मिर्ची की तरह लगता बहुत है...!!!

फिल्म के मशहूर नायक स्व.राज कुमार का डॉयलाग था कि जानी...!जिनके अपने घर सीसे के हों...वो दूसरो पर पर पत्थर नहीं फेंका करते...!!!
प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी और उनकी पत्नी यशोदा बेन 
लोकसभा चुनाव में सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद निर्वाचन आयोग ने लोकसभा और विधान सभा के निर्वाचन में नामांकन के साथ हलफनामा में संशोधन करते हुए ये अनिवार्य कर दिया कि कोई कॉलम छोड़ा नहीं जायेगा। सभी कॉलम भरना अनिवार्य है। फिर भाजपा की तरफ से उम्मीदवार बने गुजरात के मुख्यमंत्री रहे नरेन्द्र मोदी पर सबकी निगाहें टिक गई। नरेन्द्र मोदी गुजरात और उ प्र के वाराणसी संसदीय सीट यानि दो स्थानों से अपना नामांकन किया और पत्नी के कॉलम में यशोदा बेन को अपनी पत्नी स्वीकार किया। अब बिकाऊ मीडिया और समूचे विपक्षियों के पिछवाड़े मिर्ची बम का विस्फोट होने लगा। ये सही है कि जब नरेन्द्र वर्ष 2014 में अपने हलफनामे में यशोदा बेन को अपनी पत्नी स्वीकार किया तब देश की 90फीसदी जनता जान पाई थी कि मोदी जी शादीशुदा हैं। क्योंकि इसके पहले उनके द्वारा विधान सभा के नामांकन में पत्नी वाले कॉलम के सामने विकल्प के रूप में NA यानि लागू नहीं लिखा जाता रहा। अब उन्होंने वर्ष 2014 में सार्वजनिक रूप से यशोदा बेन को अपनी पत्नी बताया तो उन पर यशोदा बेन के लिए तलाक का आरोप कैसे ? ये कहना कि वो तो अपनी पत्नी छोड़ दिये हैं। पर आरोप लगाने वाले को पहले ज्ञानार्जन करना चाहिये फिर उस मुद्दे पर बहस करनी चाहिये। पत्नी रहते हुए भी उससे अलग रहना भी एक त्याग है। पति के लिए ही नहीं बल्कि पत्नी के लिये भी। उदाहरण गौतम बुद्ध की कहानी को आरोप लगाने वाले लोंगो को पढ़ लेना चाहिये,तो उन्हें ज्ञान हो जायेगा। जब से मुस्लिम महिलओं के लिए मोदी जी ने तलाक, तलाक, तलाक का विधेयक लाया तब से तलाक के प्रेमियों के तन बदन में मानों आग लग गई हो। तलाक,तलाक,तलाक कहने के बाद अपनी ही पत्नी को फिर से अपनी पत्नी बनाने के लिए गैर मर्द से हलाला कराना होता है,फिर अपनी बीबी बनाया जा सकता है। 
सपा संरक्षक मुलायम सिंह एवं दुसरी पत्नी साधना गुप्ता एवं उनसे पैदा हुआ पुत्र प्रतीक एवं उनकी पत्नी अपर्णा यादव...
विरोधियों को ये जानना आवश्यक है कि मोदी और यशोदा बेन के ऐसा कुछ भी नहीं हुआ है। l पी एम बनने के बाद भाड़ मीडिया और समूचा विपक्ष विधवा विलाप किया और यशोदा बेन से मिलकर मोदी के खिलाफ यशोदा बेन को जमकर उकसाया और भड़ास निकालने के लिए उन्हें प्रेरित किया परंतु सारे उपाय विफल हो गए। सब गुड गोबर हो गया। यशोदा बेन को कोई तकलीफ नहीं फिर विपक्षियों के पिछवाड़े क्यों मिर्ची लग रही है ? जवाब थोड़ा कटु सत्य है इसलिए विरोधियों को सलाह है कि वो इसे इतिमिनान से पढ़गें। आज भी मोदी और यशोदा बेन एक दूसरे को पति और पत्नी मानते हैं। फिर कैसा विवाद ? विवाद तब उत्पन्न होता जब यशोदा बेन अपने पति पर किसी प्रकार का शोषण करने अथवा प्रताड़ना करने और विवाह विच्छेद का मुकदमा न्यायालय में दाखिल की होती ! विपक्षियों से एक सवाल है। सवाल ये कि जब सपा के संरक्षक मुलायम सिंह यादव की पहली पत्नी यानि अखिलेश यादव की अम्मी जीवित थी और मुलायम सिंह उनके जीवन काल में साधना गुप्ता से प्रेम प्रलाप किये और प्रतीक गर्व में आया तो मुलायम सिंह को साधना से शादी करनी पड़ी। क्या हिन्दू विवाह में पहली पत्नी रहते दूसरी शादी की जा सकती है ? विधि विशेषज्ञ बताते हैं कि कानूनन ऐसा नहीं किया जा सकता ! फिर साधना गुप्ता मुलायम की क्या हुई ? प्रतीक जब मुलायम के घर साधना गुप्ता के साथ आया तो वो गाँव की भाषा में गोहनलगुआ बनकर आया। प्रतीक क्या मुलायम सिंह की जायज औलाद है ? मोदी पर कीचड़ उछालने वालों से जब ये सवाल किया जाता है तो उन्हें साँप सूंघ जाता है।

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